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तीर्थों और संस्कृति की रक्षा करें पुरोहित: ब्रह्मचारी
Mon, 08 Jul 2019 10:35 AM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2019 10:35 AM IST
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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जयराम आश्रम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि तीर्थों और संस्कृति को बचाने की जिम्मेदारी तीर्थ पुरोहितों की है। इसके लिए उन्हें प्रभावी भूमिका निभाते हुए काम करना चाहिए। उन्होंने बदलते जमाने के साथ पुरोहितों की शैली और वेशभूषा आदि में आ रहे परिवर्तन को संस्कृति के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि यदि हमने धोती कुर्ता और जनेऊ को ही नहीं बचाए रखा तो हम अपनी भूमिका के साथ इंसाफ नहीं कर रहे हैं।
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ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी रविवार को मणिद्वीप आश्रम में आयोजित अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज तीर्थों पर अनेक तरह की परेशानियां हैं। सबसे ज्यादा समस्या तीर्थों पर बढ़ती गंदगी की है। जब तीर्थ स्थल साफ सुथरे ही नहीं रहेंगे तो श्रद्धालु वहां क्यों आएंगे। इसके लिए सरकार की तो जिम्मेदारी है ही वहां संस्कृति संरक्षण का जिम्मेदारी संभालने वाले तीर्थ पुरोहितों की भी है। युवा पीढ़ी को संस्कारित करने और संस्कृति का संरक्षण करने के लिए सभी को आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने सरकार द्वारा मठ मंदिरों के अधिग्रहण को लेकर कहा कि सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
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अध्यक्षता कर रहे महासभा के अध्यक्ष महेश पाठक ने कहा कि आज तीर्थ पुरोहितों के हकों को छीनने की साजिश की जा रही है। सरकार देश के विभिन्न तीर्थों पर पुरोहितों के अधिकारों का क्षरण करने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अब और दमन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीर्थ पुरोहितों से अपने स्वरूप को बरकरार रखने और नई पीढ़ी को भी संस्कारवान व पुरोहित्व में पारंगत बनाने की बात कही। गंगा सभा हरिद्वार के अध्यक्ष प्रदीप झा ने कहा कि गंगा की रक्षा के लिए बड़े पैमाने पर काम करने की जरूरत है। महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि गंगा और तीर्थ की रक्षा के लिए हर स्तर पर किए जाने वाले प्रयासों में श्रीगंगा सभा साथ रहेगी। इस दौरान वाराणसी, उज्जैन, इलाहाबाद, मथुरा, वृंदावन गोकुल, कुरुक्षेत्र, भीमशंकर, नासिक, ओंकारेश्वर समेत विभिन्न तीर्थस्थलों से आए पुरोहितों ने भाग लिया। आशुतोष शर्मा, दुष्यंत झा, सिद्धार्थ चक्रपाणि, यतीन्द्र सिखौला, डा. सत्यनारायण शर्मा, रजनीश शर्मा, उज्जवल पंडित आदि ने अतिथियों का स्वागत किया।
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