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..देहरादून के कालेजों पर कब कसा जाएगा शिकंजा
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हरिद्वार। छात्रवृत्ति घोटाले में अभी तक देहरादून के एक भी निजी शिक्षण संस्थान संचालक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। हरिद्वार और रुड़की में ताबड़तोड़ गिरफ्तारी के बाद भी देहरादून के कालेजों को लेकर एसआईटी की मंशा पर ही सवाल उठने लगे हैं। जबकि देहरादून के तो एक कद्दावर भाजपा विधायक के कालेज को सबसे अधिक छात्रवृत्ति की रकम देने की बात निकलकर आ रही है।
हाईकोर्ट के आदेश पर छात्रवृत्ति घोटाले के लिए एसआईटी का गठन किया गया। शुरूआती दौर में तो एसआईटी में टालमटोल वाला रवैया अपनाती रही। शासन की मंशा भी घोटालेबाजों को सलाखों के अंदर करने की नहीं लग रही थी। इसलिए एसआईटी प्रमुख टीसी मंजूनाथ का चमोली के एसपी के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया था। हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद ही उनकी वापसी हुई। हाईकोर्ट की सख्ती को देखते हुए एसआईटी को जांच में तेजी दिखानी पड़ी। लेकिन यह जांच और कार्रवाई का दायरा अब तक केवल हरिद्वार जनपद ही है। इसमें से भी रुड़की और आसपास के निजी कालेज ही जांच के दायरे में आए और उनके संचालकों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। लेकिन रह रह कर एक सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर एसआईटी का पूरा फोकस केवल रुड़की की तरफ ही क्यों है। खैर, इस बात को छोड़ भी दे तो देहरादून के कालेजों पर अब तक शिकंजा क्यों नहीं कसा गया है जबकि सूबे की राजधानी होने के चलते सबसे पहले चाबुक वहां से ही चलना चाहिए था। लेकिन एसआईटी का फोकस केवल रुड़की तक ही है।
चर्चा है कि देहरादून के एक विधायक के कालेज को भारी भरकम रकम छात्रवृत्ति के नाम पर दी गई है, उस पर शिकंजा कसा कब जाएगा, यह गौर करने वाली बात है। हरिद्वार के भी निजी शिक्षण संस्थान अभी अछूते ही हैं। चर्चा है कि भाजपा के एक हैवीवेट नेता का संरक्षण इन सभी निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों को है।
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हाईकोर्ट के आदेश पर छात्रवृत्ति घोटाले के लिए एसआईटी का गठन किया गया। शुरूआती दौर में तो एसआईटी में टालमटोल वाला रवैया अपनाती रही। शासन की मंशा भी घोटालेबाजों को सलाखों के अंदर करने की नहीं लग रही थी। इसलिए एसआईटी प्रमुख टीसी मंजूनाथ का चमोली के एसपी के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया था। हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद ही उनकी वापसी हुई। हाईकोर्ट की सख्ती को देखते हुए एसआईटी को जांच में तेजी दिखानी पड़ी। लेकिन यह जांच और कार्रवाई का दायरा अब तक केवल हरिद्वार जनपद ही है। इसमें से भी रुड़की और आसपास के निजी कालेज ही जांच के दायरे में आए और उनके संचालकों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। लेकिन रह रह कर एक सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर एसआईटी का पूरा फोकस केवल रुड़की की तरफ ही क्यों है। खैर, इस बात को छोड़ भी दे तो देहरादून के कालेजों पर अब तक शिकंजा क्यों नहीं कसा गया है जबकि सूबे की राजधानी होने के चलते सबसे पहले चाबुक वहां से ही चलना चाहिए था। लेकिन एसआईटी का फोकस केवल रुड़की तक ही है।
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चर्चा है कि देहरादून के एक विधायक के कालेज को भारी भरकम रकम छात्रवृत्ति के नाम पर दी गई है, उस पर शिकंजा कसा कब जाएगा, यह गौर करने वाली बात है। हरिद्वार के भी निजी शिक्षण संस्थान अभी अछूते ही हैं। चर्चा है कि भाजपा के एक हैवीवेट नेता का संरक्षण इन सभी निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों को है।
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