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नसबंदी के दो साल बाद हुई लड़की, सीएमओ करेंगे भरण पोषण
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रोशनाबाद। जिला उपभोक्ता फोरम ने नसबंदी ऑपरेशन फेल होने के मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) हरिद्वार को ऑपरेशन के बाद जन्मी बच्चे के भरण पोषण के रूप में छह लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर व शिकायत खर्च और अधिवक्ता की फीस के रूप में 10 हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता राजकुमारी पत्नी बृजेश कुमार निवासी ग्राम हथियाथल कंचनपुर मंगलौर ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी तीन संतान पहले से ही हैं। पति मजदूरी कर परिवार का मुश्किल से भरण पोषण कर पाते हैं। उन्होंने चिकित्सक की सलाह पर 21 मार्च 2009 को रुड़की चिकित्सालय में नसबंदी ऑपरेशन कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनका नसबंदी ऑपरेशन फेल हो गया। नसबंदी ऑपरेशन के दो साल बाद वे गर्भवती हुई और उसके यहां पुत्री पैदा हुई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मुआवजे की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर उपभोक्ता फोरम की शरण ली थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष कंवर सैन व सदस्य अंजना चड्ढा व विपिन कुमार ने शिकायतकर्ता दंपति की शिकायत को सही पाते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सेवाओं में कमी करने का दोषी ठहराया। उन्होंने एक माह की अवधि में शिकायतकर्ता दंपति को नसबंदी ऑपरेशन के बाद जन्मी बच्ची के भविष्य में भरण पोषण, शिक्षा दीक्षा, विवाह व अन्य होने वाले खर्च के रूप में 6 लाख रुपये व वाद खर्च और अधिवक्ता फीस के रूप में 10 हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं। साथ ही, उक्त धनराशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से शिकायत दर्ज करने तक से देने के लिए कहा है।
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शिकायतकर्ता राजकुमारी पत्नी बृजेश कुमार निवासी ग्राम हथियाथल कंचनपुर मंगलौर ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी तीन संतान पहले से ही हैं। पति मजदूरी कर परिवार का मुश्किल से भरण पोषण कर पाते हैं। उन्होंने चिकित्सक की सलाह पर 21 मार्च 2009 को रुड़की चिकित्सालय में नसबंदी ऑपरेशन कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनका नसबंदी ऑपरेशन फेल हो गया। नसबंदी ऑपरेशन के दो साल बाद वे गर्भवती हुई और उसके यहां पुत्री पैदा हुई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मुआवजे की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर उपभोक्ता फोरम की शरण ली थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष कंवर सैन व सदस्य अंजना चड्ढा व विपिन कुमार ने शिकायतकर्ता दंपति की शिकायत को सही पाते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सेवाओं में कमी करने का दोषी ठहराया। उन्होंने एक माह की अवधि में शिकायतकर्ता दंपति को नसबंदी ऑपरेशन के बाद जन्मी बच्ची के भविष्य में भरण पोषण, शिक्षा दीक्षा, विवाह व अन्य होने वाले खर्च के रूप में 6 लाख रुपये व वाद खर्च और अधिवक्ता फीस के रूप में 10 हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं। साथ ही, उक्त धनराशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से शिकायत दर्ज करने तक से देने के लिए कहा है।
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