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देसंविवि पहुंचा दक्षिण कोरियाई दल, भारतीय संस्कृति से हुआ अवगत
Updated Tue, 06 Feb 2018 10:56 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
दक्षिण कोरिया का तीस सदस्यीय दल देवसंस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचा। दल के भ्रमण का उद्देश्य भारतीय संस्कृति के साथ ही योग दर्शन से रूबरू होना है। मेहमानों को भारतीय संस्कृति, योग व आयुर्वेद के प्रशिक्षण व मार्गदर्शन के लिए योग विभाग तथा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ से जुड़े आचार्यों की अलग- अलग टीम बनाई गई थीं।
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने कहा कि भारतीय ऋषियों ने योग व ध्यान के माध्यम से कई सिद्धियां प्राप्त की थी। साथ ही वे आयुर्वेद के माध्यम से अपने स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाए रखते थे। आज भी इनकी महत्ता कायम है। जरूरत है तो केवल विश्वास के साथ व्यावहारिक जीवन में उतारने की। उन्होंने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की अवधारणाओं, संकल्पनाओं से मेहमानों को अवगत कराया। इस अवसर पर प्रतिकुलपति डा. पंड्या ने दक्षिण कोरियाई दल को युग साहित्य एवं उपवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।
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अपने संदेश में कुलाधिपति डा. प्रणव पंड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति सार्वभौमिक सत्यों पर खड़ी है और इसी कारण वह सब और गतिशील होती है। कोई भी संस्कृति की अमरता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह कितनी विकासोन्मुखी है। प्रवास के दौरान दक्षिण कोरियाई दल ने विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकल्पों का भ्रमण कर भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद, स्वावलंबन, रीसाइक्लिंग, गोशाला में औषधी निर्माण आदि का अध्ययन किया। मेहमानों को डा. अरुणेश पाराशर, डा. उमाकांत इंदौलिया की टीम ने भ्रमण कराया।
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