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कैदी बना रहे सरकारी स्कूलों के फर्नीचर
Updated Mon, 20 Aug 2018 11:04 PM IST
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हिमांशु भट्ट
हरिद्वार। जनपद के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए डबल सीटर फर्नीचर रोशनाबाद की जेल में बंद कैदियों से बनवाया जा रहा है। विभाग अभी पांच सौ फर्नीचर का ऑर्डर दिया है, जबकि दो हजार फर्नीचर बनकर तैयार है। एक फर्नीचर सेट पर शिक्षा विभाग को दो हजार रुपये तक की बचत हो रही है।
शिक्षा विभाग स्कूलों के लिए फर्नीचर बाजार से ही बनवाता रहा है। बाजार से एक डबल सीटर फर्नीचर (दो कुर्सी, दो बैंच का सामान) बनवाने में लगभग 35 सौ रुपये का खर्च आता है। अब जिलाधिकरी के आदेशों पर फर्नीचर रोशनाबाद जेल के कैदियों से बनवाया जा रहा है। कैदियों से फर्नीचर बनवाना आर्थिक दृष्टि से शिक्षा विभाग के लिए ही नहीं बल्कि जेल के कैदियों के लिए भी फायदेमंद है। अधिक आर्डर मिलने से फर्नीचर बनाने वाले कैदियों को उनकी बनवाई का पैसा दिया जाता है। जेल में तैयार किए जा रहे ये फर्नीचर बाजार मूल्य से सस्ते होने के साथ ही गुणवत्ता में भी काफी बेहतर हैं।
बजट की कमी से नहीं दिए ज्यादा आर्डर
जेल में कैदियों से फर्नीचर बनवाना आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद होने से शिक्षा विभाग को खूब भा रहा है, लेकिन विभाग के पास पर्याप्त बजट नहीं होने से कम आर्डर दिया गया है। जैसे- जैसे बजट आएगा वैसे-वैसे विभाग फर्नीचर का आर्डर देगा।
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विभाग को एक सेट 35 सौ रुपये तक पड़ता था। जेल से यही सेट लगभग 15 सौ रुपये का पड़ रहा है। पांच सौ फर्नीचर का आर्डर दिया गया है। बजट की उपलब्धता के आधार पर ही आगे भी फर्नीचर बनाने का आर्डर दिया जाता रहेगा।
- आरडी शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी
जिलाधिकारी के आदेशों पर शिक्षा विभाग के लिए कैदियों की ओर से फर्नीचर बनाने का कार्य किया जा रहा है। फर्नीचर के लिए लकड़ी सहित अन्य सामग्री शिक्षा विभाग द्वारा ही उपलब्ध कराई जा रही है। - बीपी पांडे, वरिष्ठ अधीक्षक, जिला कारागार हरिद्वार
हरिद्वार। जनपद के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए डबल सीटर फर्नीचर रोशनाबाद की जेल में बंद कैदियों से बनवाया जा रहा है। विभाग अभी पांच सौ फर्नीचर का ऑर्डर दिया है, जबकि दो हजार फर्नीचर बनकर तैयार है। एक फर्नीचर सेट पर शिक्षा विभाग को दो हजार रुपये तक की बचत हो रही है।
शिक्षा विभाग स्कूलों के लिए फर्नीचर बाजार से ही बनवाता रहा है। बाजार से एक डबल सीटर फर्नीचर (दो कुर्सी, दो बैंच का सामान) बनवाने में लगभग 35 सौ रुपये का खर्च आता है। अब जिलाधिकरी के आदेशों पर फर्नीचर रोशनाबाद जेल के कैदियों से बनवाया जा रहा है। कैदियों से फर्नीचर बनवाना आर्थिक दृष्टि से शिक्षा विभाग के लिए ही नहीं बल्कि जेल के कैदियों के लिए भी फायदेमंद है। अधिक आर्डर मिलने से फर्नीचर बनाने वाले कैदियों को उनकी बनवाई का पैसा दिया जाता है। जेल में तैयार किए जा रहे ये फर्नीचर बाजार मूल्य से सस्ते होने के साथ ही गुणवत्ता में भी काफी बेहतर हैं।
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बजट की कमी से नहीं दिए ज्यादा आर्डर
जेल में कैदियों से फर्नीचर बनवाना आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद होने से शिक्षा विभाग को खूब भा रहा है, लेकिन विभाग के पास पर्याप्त बजट नहीं होने से कम आर्डर दिया गया है। जैसे- जैसे बजट आएगा वैसे-वैसे विभाग फर्नीचर का आर्डर देगा।
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विभाग को एक सेट 35 सौ रुपये तक पड़ता था। जेल से यही सेट लगभग 15 सौ रुपये का पड़ रहा है। पांच सौ फर्नीचर का आर्डर दिया गया है। बजट की उपलब्धता के आधार पर ही आगे भी फर्नीचर बनाने का आर्डर दिया जाता रहेगा।
- आरडी शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी
जिलाधिकारी के आदेशों पर शिक्षा विभाग के लिए कैदियों की ओर से फर्नीचर बनाने का कार्य किया जा रहा है। फर्नीचर के लिए लकड़ी सहित अन्य सामग्री शिक्षा विभाग द्वारा ही उपलब्ध कराई जा रही है। - बीपी पांडे, वरिष्ठ अधीक्षक, जिला कारागार हरिद्वार