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आसुरी प्रवृतियों के निष्कासन को होता है अश्वमेध महायज्ञ: डॉ पण्ड्या
Updated Mon, 26 Nov 2018 12:11 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
शांतिकुंज के प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि आसुरी प्रवृत्तियों के निष्कासन और सत्प्रवृत्तियों के धारण करने के लिए प्रेरित करने वाला महायज्ञ का नाम अश्वमेध महायज्ञ है। प्राचीन काल में इसी उद्देश्य के लिए अश्वमेध महायज्ञ कराया जाता था। इन दिनों समाज में आसुरी प्रवृत्तियां बढ़ी हैं, जिसके लिए ऐसे सामूहिक अनुष्ठान की आवश्यकता है।
वे मुंबई में सन 2021 में होने वाले अश्वमेध गायत्री महायज्ञ के लिए शक्ति कलश पूजन समारोह के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मायानगरी में अश्वमेध महायज्ञ मुंबई वासियों में नई शक्ति का संचार होगा, जिससे वे आसुरी प्रवृत्तियों के निष्कासन और सत्प्रवृत्तियों को अपनाने के लिए प्रेरणादायक का काम करेगा। उन्होंने इसके लिए वर्ष 2021 तक यज्ञ की सफलता और प्रचार के लिए तन, मन, धन से जुड़ने का आह्वान किया।
डॉ पंड्या ने कहा कि अश्वमेध महायज्ञ गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा के मार्गदर्शन से सन 1992 में प्रारंभ हुआ था। मुंबई में होने वाला महायज्ञ इस शृंखला का 51वां महायज्ञ है। शांतिकुंज व्यवस्थापक शिवप्रसाद मिश्र ने कहा कि अश्वमेध महायज्ञ एक आध्यात्मिक प्रयोग है। इसके लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना है। जन-जन की भागीदारी से होने वाला यह आध्यात्मिक अनुष्ठान जनमानस में नव प्रेरणा का संचार करेगा। देसंविवि के कुलपति शरद पारधी, डॉ ओपी शर्मा आदि ने अश्वमेध महायज्ञ की सफलता के लिए चलाए जाने वाले विविध कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। समापन समारोह का संचालन केदार प्रसाद दुबे ने किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र जोन के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के अलावा मुंबई अश्वमेध महायज्ञ से जुड़े कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।
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शांतिकुंज के प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि आसुरी प्रवृत्तियों के निष्कासन और सत्प्रवृत्तियों के धारण करने के लिए प्रेरित करने वाला महायज्ञ का नाम अश्वमेध महायज्ञ है। प्राचीन काल में इसी उद्देश्य के लिए अश्वमेध महायज्ञ कराया जाता था। इन दिनों समाज में आसुरी प्रवृत्तियां बढ़ी हैं, जिसके लिए ऐसे सामूहिक अनुष्ठान की आवश्यकता है।
वे मुंबई में सन 2021 में होने वाले अश्वमेध गायत्री महायज्ञ के लिए शक्ति कलश पूजन समारोह के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मायानगरी में अश्वमेध महायज्ञ मुंबई वासियों में नई शक्ति का संचार होगा, जिससे वे आसुरी प्रवृत्तियों के निष्कासन और सत्प्रवृत्तियों को अपनाने के लिए प्रेरणादायक का काम करेगा। उन्होंने इसके लिए वर्ष 2021 तक यज्ञ की सफलता और प्रचार के लिए तन, मन, धन से जुड़ने का आह्वान किया।
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डॉ पंड्या ने कहा कि अश्वमेध महायज्ञ गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा के मार्गदर्शन से सन 1992 में प्रारंभ हुआ था। मुंबई में होने वाला महायज्ञ इस शृंखला का 51वां महायज्ञ है। शांतिकुंज व्यवस्थापक शिवप्रसाद मिश्र ने कहा कि अश्वमेध महायज्ञ एक आध्यात्मिक प्रयोग है। इसके लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना है। जन-जन की भागीदारी से होने वाला यह आध्यात्मिक अनुष्ठान जनमानस में नव प्रेरणा का संचार करेगा। देसंविवि के कुलपति शरद पारधी, डॉ ओपी शर्मा आदि ने अश्वमेध महायज्ञ की सफलता के लिए चलाए जाने वाले विविध कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। समापन समारोह का संचालन केदार प्रसाद दुबे ने किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र जोन के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के अलावा मुंबई अश्वमेध महायज्ञ से जुड़े कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।
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