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देश का प्रथम इंडो पोलिश केंद्र देसंविवि में बनाने पर हुई चर्चा
Updated Wed, 07 Feb 2018 11:04 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
पोलैंड के काजीमिएर्ज विएल्की यूनिवर्सिटी (वीकेडब्ल्यू) के कुलपति प्रो. बेनेडिक्ट ओद्या के नेतृत्व में चार सदस्यीय दल देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के दौरे पर पहुंचा। यहां उन्होंने भारत में प्रथम इंडो-पोलिश केंद्र बनाने की दिशा में देसंविवि के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या के साथ विस्तृत मंथन किया। इस अवसर पर दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भारत व पोलैंड के बीच युवाओं के शैक्षणिक विकास एवं उसमें सक्रिय भागीदारी को लेकर भी चर्चा की।
देसंविवि के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने बताया कि भारतीय संस्कृति को विश्व भर में युवाओं के बीच पहुंचाने की दिशा में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का काम जारी है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद आदि को लेकर विश्वभर के युवाओं में जबरदस्त रुझान दिखाई दे रहा है। इसके लिए देसंविवि का काम कर रहा है।
पोलैंड के काजीमिएर्ज विएल्की यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. बेनेडिक्ट ओद्या ने बताया कि पोलैंड के युवाओं को भारतीय संस्कृति व योग से जोड़ने के लिए विगत वर्ष से देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के साथ शैक्षणिक अनुबंध किया है। इसी दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए भारत का प्रथम इंडो-पोलिश केंद्र की स्थापना देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में करना चाहते हैं। कुलपति प्रो. बेनेडिक्ट ओद्या के साथ प्रो. मारेक मक्को, वीकेडब्ल्यू में अंतरराष्ट्रीय संबंध कार्यालय की प्रमुख अनिएला एवं इरेस्मस समन्वयक कतार्जय्ना भी साथ हैं। इस दल ने विश्वविद्यालय का भ्रमण कर भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद, स्वावलंबन, रीसाइक्लिंग, गोशाला में औषधि निर्माण आदि का अध्ययन किया।
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उच्च शिक्षा मंत्री डा. रावत देसंविवि पहुंचे
उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत देवसंस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचे। विवि स्थित प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में उन्होंने राज्य के युवाओं के चहुमुंखी विकास के लिए प्रार्थना की। देसंविवि के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने पाठ्यक्रम के अलावा युवाओं के विकास में चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर डा. चिन्मय पंड्या ने उच्च शिक्षा राज्यमंत्री का युग साहित्य एवं उपवस्त्र भेंटकर उन्हें सम्मानित किया।
हरिद्वार।
पोलैंड के काजीमिएर्ज विएल्की यूनिवर्सिटी (वीकेडब्ल्यू) के कुलपति प्रो. बेनेडिक्ट ओद्या के नेतृत्व में चार सदस्यीय दल देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के दौरे पर पहुंचा। यहां उन्होंने भारत में प्रथम इंडो-पोलिश केंद्र बनाने की दिशा में देसंविवि के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या के साथ विस्तृत मंथन किया। इस अवसर पर दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भारत व पोलैंड के बीच युवाओं के शैक्षणिक विकास एवं उसमें सक्रिय भागीदारी को लेकर भी चर्चा की।
देसंविवि के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने बताया कि भारतीय संस्कृति को विश्व भर में युवाओं के बीच पहुंचाने की दिशा में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का काम जारी है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद आदि को लेकर विश्वभर के युवाओं में जबरदस्त रुझान दिखाई दे रहा है। इसके लिए देसंविवि का काम कर रहा है।
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पोलैंड के काजीमिएर्ज विएल्की यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. बेनेडिक्ट ओद्या ने बताया कि पोलैंड के युवाओं को भारतीय संस्कृति व योग से जोड़ने के लिए विगत वर्ष से देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के साथ शैक्षणिक अनुबंध किया है। इसी दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए भारत का प्रथम इंडो-पोलिश केंद्र की स्थापना देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में करना चाहते हैं। कुलपति प्रो. बेनेडिक्ट ओद्या के साथ प्रो. मारेक मक्को, वीकेडब्ल्यू में अंतरराष्ट्रीय संबंध कार्यालय की प्रमुख अनिएला एवं इरेस्मस समन्वयक कतार्जय्ना भी साथ हैं। इस दल ने विश्वविद्यालय का भ्रमण कर भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद, स्वावलंबन, रीसाइक्लिंग, गोशाला में औषधि निर्माण आदि का अध्ययन किया।
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उच्च शिक्षा मंत्री डा. रावत देसंविवि पहुंचे
उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत देवसंस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचे। विवि स्थित प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में उन्होंने राज्य के युवाओं के चहुमुंखी विकास के लिए प्रार्थना की। देसंविवि के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने पाठ्यक्रम के अलावा युवाओं के विकास में चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर डा. चिन्मय पंड्या ने उच्च शिक्षा राज्यमंत्री का युग साहित्य एवं उपवस्त्र भेंटकर उन्हें सम्मानित किया।