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200 गांवों की बेटियों ने छोड़ दिया स्कूल

Wed, 09 Oct 2013 10:02 AM IST
योगेंद्र सिंह/ अमर उजाला, हरिद्वार
योगेंद्र सिंह/ अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 09 Oct 2013 10:02 AM IST
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girls left school in haridwar

सरकार सर्व शिक्षा अभियान पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद हरिद्वार जिले के दो ब्लॉकों के 200 गांवों में की लड़कियों ने कभी स्कूल नहीं देखा है।

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जी, हां इन गांवों की 186 लड़कियां कभी स्कूल नहीं गई। इतना ही नहीं यहां 541 बालिकाएं प्राइमरी जूनियर स्कूल में ही पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।

सर्वे में हुआ खुलासा
महिला समाख्या इकाई के सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ। सर्वे के अनुसार कक्षा एक से सात तक के बीच पढ़ाई छोड़ने वाली बालिकाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय संचालित महिला समाख्या इकाई भगवानपुर और बहादराबाद ब्लॉक में अपनी गतिविधियां संचालित करती है।

दो महीने पहले इकाई ने दोनों ब्लॉकों के 200 गांवों में 6-14 साल की बालिकाओं की पढ़ाई का सर्वे किया। सर्वेक्षण में बालिकाओं की कक्षा एक से सातवीं तक पढ़ाई छोड़ देने और निरक्षरता की बात सामने आई।
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ब्लॉक बहादराबाद में 267 ड्रॉप आउट और 132 बालिकाएं निरक्षर पाई गईं। भगवानपुर में 274 ड्राप आउट और 54 अनपढ़ बालिकाओं को पता चला। कुल मिलाकर दो ब्लॉक के 200 गांवों में ही 541 बालिकाएं प्राइमरी जूनियर स्कूल में ही पढ़ाई छोड़ चुकी हैं और 186 अनपढ़ हैं।

महिला समाख्या इकाई रुड़की की जिला प्रभारी सरिता कुड़ियाल ने बताया कि उनकी टीम ने गांवों में घर-घर जाकर रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट तैयार करके मुख्य शिक्षा अधिकारी को भेजी गई।

तो जिले का हाल कैसा होगा?
महिला समाख्या की ओर से दो ब्लॉक के केवल 200 गांवों के सर्वेक्षण में बालिका शिक्षा का हाल उजागर हुआ। यदि पूरे जिले का सर्वेक्षण किया जाए तो बहुत ही बदतर स्थिति सामने आ सकती है।


सर्व शिक्षा अभियान और बजट
सर्व शिक्षा अभियान सभी को शिक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। एसएसए को हर साल करोड़ों रुपए का बजट मिलता है। पिछले साल करीब 50 करोड़ रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए गए। 10 वर्षों में अरबों रुपए बच्चों को साक्षर बनाने के लिए खर्च किए जा चुके है।

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