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भारत में भीख मांग रहे सात समंदर पार से आए सैलानी
ऋषिकेश/हेमवती नंदन भट्ट
Updated Fri, 10 May 2013 12:34 AM IST
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वे विदेश से टूरिस्ट वीजा पर भारत सैलानी बनकर आए थे। धर्म और अध्यात्म के प्रति रुचि उन्हें ऋषिकेश ले आई, लेकिन हालात ने उन्हें इसी तीर्थनगरी की गलियों में भिखारी बना दिया।
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इनके वीजा के दिन बचे हैं। पैसा खत्म है, मांगकर गुजारा कर रहे हैं। एक ने तो मंगते साधुओं का बाना अपना लिया है, नाम भी कैलाश नाथ रख लिया है। उन्हीं के साथ भीख मांगते हैं। उन्हीं के बीच उठते-बैठते और सो जाते हैं।
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गंगा तट पर ध्यान, योग सीखने और आध्यात्मिक शांति के लिए बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी आते हैं। इन दिनों यहां भ्रमण करने आए कुछ विदेशियों को जेब का धन खर्च होने पर भिक्षावृत्ति को मजबूर होना पड़ रहा है।
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स्थानीय लोग और तीर्थयात्री उनकी मदद भी कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया निवासी नैथ्यू खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताते हैं। वह दो महीने पहले टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। इन दिनों स्वर्गाश्रम क्षेत्र में हैं। जेब के पैसे खत्म हो गए।
कोई रास्ता नहीं निकला तो मजबूरी में भिक्षावृत्ति कर रहे हैं। उन्होंने अपना वेश साधु जैसा बनाकर कैलाश नाथ नाम रख लिया है। हाथों और गले में रुद्राक्ष की माला धारण किए नैथ्यू कहते हैं कि मेरा वीजा जून में समाप्त होगा।
लिहाजा मुझे तब तक यहां रहने के लिए पैसों की जरूरत है। इसके लिए यह तरीका अपनाना पड़ा। नैथ्यू दिन में स्वर्गाश्रम के आसपास के क्षेत्र में बैठकर लोगों से पैसा मांगते हैं। रात को गंगा के किनारे किसी भी घाट पर साधुओं के साथ सो जाते हैं।
टर्की (तुर्की) के फरत और उनकी पत्नी पास की भी यही कहानी है। फरत और पास गिटार और पियानो बजाकर स्वर्गाश्रम क्षेत्र में भिक्षावृत्ति कर रहे हैं।
कुछ दिन पूर्वी यूरोप निवासी एक अन्य विदेशी को भी क्षेत्र में भिक्षावृत्ति करते हुए देखा गया था। वह अपनी पत्नी और बच्चे के साथ स्वर्गाश्रम टैक्सी स्टैंड के समीप एक कॉटेज में नि:शुल्क रहते थे। वह क्षेत्र में स्थानीय भिक्षुओं के साथ बैठते थे और बांसुरी बजाकर भिक्षावृत्ति करते थे।