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सावधान! कहीं मैन ईटर तो नहीं हो गया कॉर्बेट पार्क में बाघ
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 10 Apr 2016 09:00 PM IST
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कार्बेट पार्क में कोई बाघ मैन ईटर तो नहीं हो गया है। सवा तीन महीने में जिम कार्बेट नेशनल पार्क में बाघ के तीन लोगों को निवाला बना लेने से वन विभाग सकते में आ गया है। इससे यह सवाल पैदा हो गया है कि कार्बेट का कोई बाघ आदमखोर तो नहीं हो गया? यह जानने के लिए विभाग के सारे आला अधिकारी कार्बेट पहुंच गए हैं।
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प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड राजेंद्र कुमार का कहना है कि कार्बेट के निरीक्षण के बाद अफसर रिपोर्ट देंगे उसी आधार पर रणनीति बनाएंगे। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को एहतियात बरतने के निर्देश दे दिए गए हैं। बाघों की बढ़ती जनसंख्या और टूटते ‘पिरामिड’ के कारण वनाधिकारियों को ऐसा संदेह हो रहा है।
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बूढ़ा होने पर मनुष्यों पर हमला शुरू कर देता है बाघ
उनका कहना है कि बाघ जब अधिक होते हैं और उनके भोजन के लिए चीतल, हिरन आदि की संख्या कम होने लगती है तो वे मनुष्यों पर हमला करना शुरू कर देते हैं। इसके अलावा बाघ बूढ़ा होने पर भी मनुष्यों पर हमला शुरू कर देता है।
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उम्र अधिक होने से बाघ के दौड़ने की शक्ति कम होने के साथ पंजे और दांत भी कमजोर होने लगते हैं। ऐसे में मनुष्यों का मांस चीतल, हिरन के मांस की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक मुलायम होता है।
बाघ के हमले की तरीके और घटना स्थल में प्राप्त होने वाली निशानियों से अधिकारी इस संबंध में जानकारी जुटाएंगे। साथ ही वनाधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बीट वॉचिंग के लिए समूहों में जाएं, किसी को अकेला न छोड़ें। निरीक्षण के बाद अफसर अपनी रिपोर्ट प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड को सौंपेंगे।