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चार माह तक शिव का साम्राज्य, विष्णु शयन पर जाएंगे
हरिद्वार/ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jul 2013 07:07 PM IST
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प्रकृति के नियमानुसार 19 जुलाई को भगवान सदाशिव जाग जाएंगे। ब्रह्मांड नियंता विष्णु चार माह के शयन पर जाएंगे और यह शयन ही संतों का चातुर्मास बन जाएगा।
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धरती पर भगवान शिव का साम्राज्य 13 नवंबर तक रहेगा। देवोत्थान एकादशी को विष्णु जागरण के साथ ब्रह्मांड की सत्ता पुन: भगवान विष्णु के पास आ जाएगी।
आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी 19 जुलाई को पड़ रही है। इस दिन विष्णु के साथ सभी देवों का क्षीरसागर में शयन हो जाएगा। धरती और ब्रह्मांड में भगवान शिव का साम्राज्य चलेगा।
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चूंकि सभी धार्मिक कार्यों का आधार भगवान विष्णु ही हैं, अत: एकादशी को हरिशयन होते ही मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। 13 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के दिन विष्णु सहित सभी देवों का जागरण होगा और फिर विष्णु अधिपति बन जाएंगे।
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आषाढ़ के पांच दिन, श्रावण के 30 दिन, भाद्रपद के 30 दिन, अश्विनी के 30 दिन और कार्तिक के 11 दिन मिलकर चंद्रमास के हिसाब से 106 और सौरमास के हिसाब से 108 दिनों का चातुर्मास बनता है।
भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के अध्यक्ष डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया चातुर्मास में संहारक शिव ही सृष्टि कर्ता बन जाते हैं। यही नहीं वे सृष्टि के भर्ता का दायित्व भी संभालते हैं। इन दिनों में कुंडली जागरण का विशेष योग बनता है।
यही वजह है कि साधु-संत चातुर्मास का उपयोग आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए करते हैं। वे एक ही स्थान पर बैठकर चातुर्मास करते हुए ब्रह्मांड से वे तत्व खोजते हैं जो धरतीवासियों के काम आ सकें।
डा. मिश्रपुरी ने बताया कि विष्णु शयन के समय तंत्र शास्त्र का ज्ञान प्राप्त करने का समय आता है। ये चार मास इतने सिद्ध हैं कि इन महीनों में कृष्ण, शिव, गणपति, दुर्गा और सूर्य का पूजन होता है।
चंद्रमा रूपी पितरों का आह्वान और ध्यान भी इन्हीं दिन होता है। भगवान शिव के जागते ही श्रावण मास में उनकी आराधना का दौर 23 जुलाई से शुरू हो जाएगा।