{"_id":"43af24be-e06f-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"destruction-in-kedarnath-4","type":"story","status":"publish","title_hn":"केदारनाथ में मरे मुस्लिमों के अंतिम संस्कार पर जमीयत का विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केदारनाथ में मरे मुस्लिमों के अंतिम संस्कार पर जमीयत का विरोध
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jun 2013 09:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहाड़ में आई आपदा के शिकार मुसलिम समुदाय के लोगों के लिए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर जमीयतुल उलेमा ए हिंद ने उंगली उठाई है।
दुआएं भी मांगी गई
उत्तराखंड सचिव मौलाना अल्ताफ हुसैन मजाहिरी ने कहा है कि इस्लाम धर्म के मुताबिक मुसलिम के मरने पर कफन दफन प्रक्रिया अपनाई जाती है जबकि केदारनाथ में मिलने वाली लाशों का सीधे अंतिम संस्कार किया जा रहा है। ऐसे मुस्लिमों के लिए जुमा की नमाज में मगफिरत (जन्नत में जाने) की दुआएं भी मांगी गई।
मौलाना अल्ताफ ने कहा कि पहाड़ में ऐसे काफी मुस्लिम उस वक्त मौजूद थे जो कि या तो खच्चर चलाते थे या फिर मजदूरी करते थे। उन्होंने मांग की है कि शवों को पहचानकर उन्हें कफन पहनाकर दफनाया जाना चाहिए।
मगफिरत की दुआएं भी कराई
दूसरी ओर, शहर मुफ्ती सलीम अहमद का कहना है कि आपदा में मरे मुस्लिमों की अगर पहचान हो जाए तो ठीक है लेकिन अगर वह पहचान में नहीं आते हैं और उनका सबके साथ अंतिम संस्कार हो जाता है तो हमें उनकी मगफिरत की दुआएं करनी चाहिए। उन्होंने मुस्लिम कालोनी स्थित जामा मस्जिद में जुमा की नमाज में उनकी मगफिरत की दुआएं भी कराई।
विज्ञापन
मुफ्ती रहीस अहमद का कहना है कि सरकार को चाहिए कि मरने वाले मुस्लिमों की पहचान करे।
विज्ञापन
दुआएं भी मांगी गई
उत्तराखंड सचिव मौलाना अल्ताफ हुसैन मजाहिरी ने कहा है कि इस्लाम धर्म के मुताबिक मुसलिम के मरने पर कफन दफन प्रक्रिया अपनाई जाती है जबकि केदारनाथ में मिलने वाली लाशों का सीधे अंतिम संस्कार किया जा रहा है। ऐसे मुस्लिमों के लिए जुमा की नमाज में मगफिरत (जन्नत में जाने) की दुआएं भी मांगी गई।
मौलाना अल्ताफ ने कहा कि पहाड़ में ऐसे काफी मुस्लिम उस वक्त मौजूद थे जो कि या तो खच्चर चलाते थे या फिर मजदूरी करते थे। उन्होंने मांग की है कि शवों को पहचानकर उन्हें कफन पहनाकर दफनाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
मगफिरत की दुआएं भी कराई
दूसरी ओर, शहर मुफ्ती सलीम अहमद का कहना है कि आपदा में मरे मुस्लिमों की अगर पहचान हो जाए तो ठीक है लेकिन अगर वह पहचान में नहीं आते हैं और उनका सबके साथ अंतिम संस्कार हो जाता है तो हमें उनकी मगफिरत की दुआएं करनी चाहिए। उन्होंने मुस्लिम कालोनी स्थित जामा मस्जिद में जुमा की नमाज में उनकी मगफिरत की दुआएं भी कराई।
विज्ञापन
मुफ्ती रहीस अहमद का कहना है कि सरकार को चाहिए कि मरने वाले मुस्लिमों की पहचान करे।