उत्तराखंड आपदाः 1227 मासूम हैं लापता
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प्रलय में लापता चार हजार से अधिक लोगों में 1227 बच्चे हैं। कहा जा सकता है कि लापता होने वालों में हर चौथा शख्स बच्चा है। सरकार ने यह आंकड़ा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम को दिया है।
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वहीं आपदा प्रभावित बच्चों के कल्याण एवं पुनर्वास का भी कोई ठोस प्रारूप सरकार के पास नहीं दिख रहा है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा कुशल सिंह और संयुक्त सचिव विनीत जोशी बुधवार को देहरादून पहुंचे। इन्होंने अफसरों की बैठक में आपदा में प्रभावित बच्चों के बारे में जानकारी हासिल की। बाद में यह टीम मीडिया से मुखातिब हुई।
यह अंतिम आंकड़ा नहीं
प्रमुख सचिव आईसीडीएस (इंटिग्रेडिट चाइल्ड डेवलेपमेंट स्कीम) राधा रतूड़ी ने आपदा में 1227 बच्चों के लापता होने की जानकारी दी। साथ ही यह भी कहा कि यह अंतिम आंकड़ा नहीं है। विभाग के पास आपदा प्रभावित महज एक बच्ची के ही दून अस्पताल में भर्ती होने की पुख्ता जानकारी थी।
दान दाताओं में एक भी साधु-संत नहीं
आपदा प्रभावित बच्चों के लिए किसी कार्ययोजना का खाका भी विभाग के पास नहीं था। प्रमुख सचिव ने कहा कि इस समय प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक खाद्यान्न पहुंचाने की है। लेकिन हालात की लगातार मानीटरिंग की जा रही है।
केंद्र देगा हरसंभव मदद
टीम ने कहा कि क्षतिग्रस्त आंगनबाड़ी केंद्रों के पुनर्निर्माण को केंद्र सरकार शत प्रतिशत अनुदान देगी। महिला और बाल विकास के लिए 94 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
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सबला, स्वाधार और गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिला योजना के लिए अलग से धनराशि दी जाएगी।टीम ने भरोसा दिलाया कि आईसीपीएस के तहत भेजे जाने वाले प्रस्ताव पर जल्द स्वीकृति दी जाएगी।
संतुष्ट नहीं टीम
राज्य में चल रही आईसीपीएस और आईसीडीएस प्रोग्राम चल रहे हैं। केंद्रीय टीम ने दोनों प्रोग्राम का उद्देश्य एक होने के बावजूद उसके लिए अलग अलग अधिकारी होने से समन्वय न बन पाने की बात कही।
उन्होंने विभाग को सलाह दी कि इन योजनाओं को एक ही अधिकारी के निर्देशन में चलाया जाए।