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उत्तराखंडः दान दाताओं में एक भी साधु-संत नहीं
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
Updated Thu, 04 Jul 2013 11:22 AM IST
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टीवी चैनलों में बैठकर समाज सेवा की सीख देने वाले ‘अरबपति’ साधु-संतों के आशीर्वाद देने वाले हाथ उत्तराखंड की त्रासदी के जख्मों से कराह रहे लोगों की मदद के लिए नहीं उठ रहे हैं।
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मुख्यमंत्री राहत कोष में अब तक आए 153.21 करोड़ रुपये के दान दाताओं की सूची में हरिद्वार और ऋषिकेश का एक भी बड़ा संत शामिल नहीं है।
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योग गुरु बाबा रामदेव समेत दर्जनों ऐसे साधु-संत हैं जो उत्तराखंड से करोड़ों रुपयों का कारोबार कर रहे हैं। इन साधुओं को आश्रम बनाने के लिए राज्य सरकार ने करोड़ों की जमीन भी मुफ्त अथवा कौड़ियों के भाव दी है।
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हरिद्वार से गंगोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ तक गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे इन साधुओं के लगभग दो हजार आश्रम हैं।
इनमें से ज्यादातर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और इनमें इनके विदेशी ‘शिष्य’ भी रहते हैं। त्रासदी के आधा माह बीत जाने के बावजूद मदद के लिए साधु-संत नदारद हैं।
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मुख्यमंत्री राहत कोष में अब तक सबसे ज्यादा 50 करोड़ रुपये की मदद कोल इंडिया ने की है। उत्तर प्रदेश 25 करोड़ रुपये की मदद कर दूसरे स्थान पर है।
हरियाणा, कर्नाटक, दिल्ली ने 10-10 करोड़ रुपये दिये हैं। केंद्र सरकार की बिजली कंपनियों ने भी 25 करोड़ रुपये की मदद की है। उत्तराखंड सरकार के दिल्ली कार्यालय से अब तक 25 करोड़ रुपये जुटाए गये हैं।
सूत्रों के अनुसार सूची में हरिद्वार व ऋषिकेश के एक भी साधु-संत का नाम अब तक नहीं आया है। हरिद्वार व ऋषिकेश में ऐसे कई बाबा हैं जिनके आश्रमों को हर साल करोड़ों रुपयों का चंदा मिलता है।
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जिस तरह गोवा में उद्योगपतियों के निजी ‘सी बीच’ यानी समुद्र के तट हैं उसी तरह हरिद्वार और ऋषिकेश में दर्जनों ऐसे बाबा हैं जिन्होंने गंगा के किनारे घाटों पर कब्जा किया है।
अकेले हरिद्वार और ऋषिकेश में ही सैकड़ों आश्रम हैं। टीवी की दुनिया में छाए रहने वाले साधु-संतों के भी उत्तराखंड में भव्य आश्रम हैं। लेकिन मदद के नाम पर सभी खामोश हैं।