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Champawat News: स्वयं सहायता समूह से आत्मनिर्भर बनीं पाटी की महिलाएं
Mon, 13 Apr 2026 11:05 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 13 Apr 2026 11:05 PM IST
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चंपावत। जिले के पाटी विकासखंड की छह महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है। पशुपालन, सब्जी उत्पादन और मधुमक्खी पालन से ये महिलाएं न सिर्फ अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं।
वर्ष 2023 में गठित जागृति स्वयं सहायता समूह आज ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बन गया है। समूह से जुड़ी छह महिलाएं संगठित प्रयासों के जरिए हर माह 20 से 25 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
एनआरएलएम योजना से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला। पशुपालन और दुग्ध उत्पादों के साथ-साथ मौसमी सब्जियों की खेती और मधुमक्खी पालन ने उनकी आय के स्रोत को मजबूत किया। समूह की महिलाएं दूध और घी जैसे उत्पाद तैयार कर स्थानीय बाजार में बेच रही हैं। इसके अलावा मौसमी सब्जियों का उत्पादन उन्हें अतिरिक्त आमदनी दे रहा है। प्राकृतिक तरीके से तैयार शहद को भी बाजार में अच्छी पहचान मिल रही है।
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समूह की सदस्य दीपा भट्ट ने बताया कि एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला इससे उनका काम घरेलू दायरे से निकलकर व्यवसाय का रूप ले सका। उन्होंने अन्य ग्रामीण महिलाओं से भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने की अपील की। समूह की महिलाएं अब अन्य सदस्यों को भी सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षणों की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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वर्ष 2023 में गठित जागृति स्वयं सहायता समूह आज ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बन गया है। समूह से जुड़ी छह महिलाएं संगठित प्रयासों के जरिए हर माह 20 से 25 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
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एनआरएलएम योजना से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला। पशुपालन और दुग्ध उत्पादों के साथ-साथ मौसमी सब्जियों की खेती और मधुमक्खी पालन ने उनकी आय के स्रोत को मजबूत किया। समूह की महिलाएं दूध और घी जैसे उत्पाद तैयार कर स्थानीय बाजार में बेच रही हैं। इसके अलावा मौसमी सब्जियों का उत्पादन उन्हें अतिरिक्त आमदनी दे रहा है। प्राकृतिक तरीके से तैयार शहद को भी बाजार में अच्छी पहचान मिल रही है।
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समूह की सदस्य दीपा भट्ट ने बताया कि एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला इससे उनका काम घरेलू दायरे से निकलकर व्यवसाय का रूप ले सका। उन्होंने अन्य ग्रामीण महिलाओं से भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने की अपील की। समूह की महिलाएं अब अन्य सदस्यों को भी सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षणों की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।