{"_id":"58ee4d084f1c1ba368cf766a","slug":"woman-making-dinner-in-farming","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेतीगाड़ में खाना बनाते जली महिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेतीगाड़ में खाना बनाते जली महिला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Wed, 12 Apr 2017 09:21 PM IST
विज्ञापन
आग से झुलसी महिला को हायर सेंटर ले जाते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर मानेश्वर के पास एक महिला घर में खाना बनाते वक्त आग से झुलस गई। महिला को फौरन जिला अस्पताल लाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद महिला को हायर सेंटर रेफर किया गया।
मानेश्वर के पास खेतीगाड़ गांव निवासी मीना देवी (33) पत्नी विपिन जोशी मंगलवार रात करीब 8 बजे घर में खाना बना रही थी। इसी बीच आग की लपटें महिला के चेहरे तक पहुंची। इससे चेहरे सहित शरीर के कुछ हिस्से आग की चपेट में आ गए।
परिजन महिला को तुरंत जिला अस्पताल ले गए। जिला अस्पताल के डा.पीके ठाकुर और डा.उदय शंकर ने बताया कि करीब 20 प्रतिशत हिस्सा आग से झुलसा है। प्राथमिक उपचार के बाद बुधवार सुबह करीब 10 बजे महिला को हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया गया।
विज्ञापन
रेफरल सेंटर जाने को तैयार नहीं थे 108 कर्मी
चंपावत सहित यहां पहाड़ के ज्यादातर जिलों में आग से झुलसने पर बचाव का खास प्रबंध नहीं है। जिला अस्पताल सहित जिले के किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में न बर्न वार्ड है और न प्लास्टिक सर्जन है। सुविधा न होने से बर्न केस को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया जाता है, लेकिन आपात चिकित्सा सेवा 108 के कर्मी मरीज को ले जाने को तैयार नहीं हुए। वह हल्द्वानी के बजाय जली महिला को पिथौरागढ़ ले जाने की जिद करते रहे। आखिरकार चिकित्सकों के हस्तक्षेप के बाद मरीज को हल्द्वानी ले जाया गया, लेकिन इस दौरान करीब दो घंटे की देरी हुई।
जिला अस्पताल द्वारा मरीज को रेफर किया गया, तो मरीज के परिजनों ने आपात सेवा 108 को फोन किया। 108 सेवा आई तो, लेकिन 108 के कर्मी चिकित्सकों द्वारा हल्द्वानी रेफर किए जाने के बावजूद मरीज को पिथौरागढ़ ले जाने पर आमादा थे, जबकि पिथौरागढ़ में न प्लास्टिक सर्जन था और नहीं बर्न वार्ड। मुख्य चिकित्साधीक्षक डा.आरके जोशी, डा.एचसी त्रिपाठी, डा.उदय शंकर के हस्तक्षेप के बाद आपात सेवा से झुलसी महिला को हल्द्वानी रवाना किया गया।
आमतौर पर 108 की इंटरफेसिलिटी सेवा में गंभीर मरीजों को ही लिया जाता है। हल्द्वानी ले जाने पर चंपावत सेंटर में 10 घंटे से अधिक वक्त तक 108 सेवा नहीं रहती। इसलिए आपात सेवा को हल्द्वानी के बजाय पिथौरागढ़ के लिए कहा गया था। जिला अस्पताल को दूरदराज के लिए अपनी एंबुलेंसों का उपयोग करना चाहिए। -मनीष टिंकू, राज्य समन्वयक, आपात सेवा 108 देहरादून।
विज्ञापन
मानेश्वर के पास खेतीगाड़ गांव निवासी मीना देवी (33) पत्नी विपिन जोशी मंगलवार रात करीब 8 बजे घर में खाना बना रही थी। इसी बीच आग की लपटें महिला के चेहरे तक पहुंची। इससे चेहरे सहित शरीर के कुछ हिस्से आग की चपेट में आ गए।
विज्ञापन
परिजन महिला को तुरंत जिला अस्पताल ले गए। जिला अस्पताल के डा.पीके ठाकुर और डा.उदय शंकर ने बताया कि करीब 20 प्रतिशत हिस्सा आग से झुलसा है। प्राथमिक उपचार के बाद बुधवार सुबह करीब 10 बजे महिला को हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया गया।
विज्ञापन
रेफरल सेंटर जाने को तैयार नहीं थे 108 कर्मी
चंपावत सहित यहां पहाड़ के ज्यादातर जिलों में आग से झुलसने पर बचाव का खास प्रबंध नहीं है। जिला अस्पताल सहित जिले के किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में न बर्न वार्ड है और न प्लास्टिक सर्जन है। सुविधा न होने से बर्न केस को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया जाता है, लेकिन आपात चिकित्सा सेवा 108 के कर्मी मरीज को ले जाने को तैयार नहीं हुए। वह हल्द्वानी के बजाय जली महिला को पिथौरागढ़ ले जाने की जिद करते रहे। आखिरकार चिकित्सकों के हस्तक्षेप के बाद मरीज को हल्द्वानी ले जाया गया, लेकिन इस दौरान करीब दो घंटे की देरी हुई।
जिला अस्पताल द्वारा मरीज को रेफर किया गया, तो मरीज के परिजनों ने आपात सेवा 108 को फोन किया। 108 सेवा आई तो, लेकिन 108 के कर्मी चिकित्सकों द्वारा हल्द्वानी रेफर किए जाने के बावजूद मरीज को पिथौरागढ़ ले जाने पर आमादा थे, जबकि पिथौरागढ़ में न प्लास्टिक सर्जन था और नहीं बर्न वार्ड। मुख्य चिकित्साधीक्षक डा.आरके जोशी, डा.एचसी त्रिपाठी, डा.उदय शंकर के हस्तक्षेप के बाद आपात सेवा से झुलसी महिला को हल्द्वानी रवाना किया गया।
आमतौर पर 108 की इंटरफेसिलिटी सेवा में गंभीर मरीजों को ही लिया जाता है। हल्द्वानी ले जाने पर चंपावत सेंटर में 10 घंटे से अधिक वक्त तक 108 सेवा नहीं रहती। इसलिए आपात सेवा को हल्द्वानी के बजाय पिथौरागढ़ के लिए कहा गया था। जिला अस्पताल को दूरदराज के लिए अपनी एंबुलेंसों का उपयोग करना चाहिए। -मनीष टिंकू, राज्य समन्वयक, आपात सेवा 108 देहरादून।