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भूमिगत जल स्रोत का रिचार्ज होना जरूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Tue, 17 Jan 2017 11:01 PM IST
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पानी बचाने की कार्यशाला
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। केंद्रीय भूमिगत जल बोर्ड उत्तराखंड क्षेत्र और स्वयंसेवी संस्था हिमवत्स की ओर से आयोजित दो दिनी कार्यशाला का मंगलवार को समापन हो गया। दूसरे दिन के पहले सत्र में जलागम के उप निदेशक डॉ. एसएस कुंवर ने पानी के बहाव, संचय की जानकारी दी।
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डॉ. देवाशीष बाक्सी ने वर्षा जल संचय विषय पर व्याख्यान दिया। भूमिगत जल स्रोत का रिचार्ज होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए उन जल स्रोतों के आसपास चौड़ी प्रजाति के पत्तों वाले पेड़ लगाए जाने जरूरी हैं।
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डॉ. सोमवीर सिंह ने केंद्रीय भूमिगत जल बोर्ड की ओर से भूमिगत जल के रासायनिक घटकों की जानकारी दी। शिक्षक फणींद्र पांडेय ने जल बचाव से संबंधित कविता का पाठ किया। नैनीताल से आई टीम ने जल संरक्षण पर शानदार नाटक की प्रस्तुति दी। समापन अवसर पर जहां अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए, वहीं सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र बांटे गए।
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राजेंद्र गहतोड़ी ने संचालन किया। हिमवत्स संस्था के डॉ. जीबी बिष्ट ने सभी का आभार जताया। इस दौरान डॉ. रवि कल्याण, बीडी फुलारा, डॉ. डीडी जोशी, डॉ. बीसी जोशी, मोहन चंद्र रस्यारा, अमरनाथ वर्मा, नारायण राम टम्टा, जयदत्त भट्ट, प्रकाश पुनेठा, मुक्तेश पचौली, संजय कुमार, गौरव जोशी, ललित मुरारी, शुभम तड़ागी, राजीव भंडारी, परविंदर कुमार, ओमप्रकाश, दीपक टम्टा थे।