फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Water accumulation campaign has not reached Shyamalalala

श्यामलाताल तक नहीं पहुंचा जल संचय अभियान

Wed, 31 May 2017 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत Updated Wed, 31 May 2017 10:59 PM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
केंद्र और राज्य सरकार की पहल से इन दिनों जहां देखो जल संचय और संरक्षण को लेकर विशेष अभियान चलाने का सिलसिला सा चल पड़ा है। लेकिन चंपावत जिले में एक ऐसा स्थान भी है जहां कुदरती रूप से मौजूद झील तक यह अभियान अब तक नहीं पहुंच पाया है। हम बात कर रहे हैं चंपावत जिले के श्यामलाताल में स्थित प्राकृतिक झील की। जो समुचित रखरखाव के अभाव में सूखने के कगार पर पहुंच गई है।

कुमाऊं मंडल विकास निगम और पर्यटन विभाग की ओर से झील के संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। कभी झील में नौकायन के लिए डाली गई पैडल नौकाएं भी वर्तमान में मिट्टी के ढेर में दब गई हैं। यही नहीं श्यामलाताल के समीप ही दो अन्य कुदरती ताल भी हैं, लेकिन इनके संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करना तो दूर इन कुदरती झीलों के बारे में बहुत कम ही लोगों को जानकारी है। एक दशक पूर्व तक करीब दो किमी की परिधि में फैली झील के चारों ओर लाखों रुपये की लागत से रेलिंग बनाई गई थी। जो वर्तमान में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह ऐरी का कहना है कि श्यामलाताल क्षेत्र में पर्यटन संबंधी गतिविधियों के विकास के लिए नई कार्ययोजना बनाई जा रही है। जिसमें झील के जल स्तर को बढ़ाने के उपाय करने के साथ ही इसे पर्यटन मानचित्र में शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन



.
खंडहर में तब्दील हो रहे हैं पर्यटक आवास गृह
चंपावत। श्यामलाताल में बनी कुदरती झील के किनारे कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा लाखों रुपये की लागत से बनाए गए पर्यटक आवास गृह भी पूरी तरह से खस्ताहाल हो गए हैं। एक दशक पूर्व तक यह पर्यटक आवास गृह काफी गुलजार रहते थे। विशेषकर श्यामलाताल में स्थित स्वामी विवेकानंद आश्रम में आने वाले बंगाली पर्यटकों की यहां खूब आवाजाही होती थी। लेकिन एक दशक पूर्व केएमवीएन द्वारा घाटे में चल रहे पर्यटक आवास गृहों को बंद कर दिया गया। पर्यटक आवास गृह के प्रभारी पंकज कुमार के अनुसार विभाग की ओर से इन पर्यटक आवास गृहों का संचालन पीपीपी मोड में देने की कार्ययोजना भी तैयार की। लेकिन आवास गृहों से फर्नीचर हटा दिए जाने के कारण कोई भी पीपीपी मोड में आवासों के संचालन के लिए आगे नहीं आया।
विज्ञापन
विज्ञापन


.
पिकनिक के नाम पर वन संपदा को हो रहा नुकसान
चंपावत। जानकारी के अभाव में श्यामलाताल झील के दीदार के लिए भले ही देश विदेश के पर्यटक बेहद कम संख्या में यहां पहुंचते हैं। लेकिन श्यामलाताल झील में पिकनिक मनाने के लिए आसपास के लोगों की टीमें अक्सर यहां पहुंचती हैं। स्थानीय नागरिक बंशीधर, हरीश चंद्र, शंकर दत्त, महेश चौड़ाकोटी आदि का कहना है कि झील और इसके सेवित क्षेत्र का कोई समुचित रखरखाव नहीं होने से यहां पिकनिक मनाने आने वाले लोग वन संपदा को खासा नुकसान पहुंचा रहे हैं।  केएमवीएन और वन विभाग द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed