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विक्रम की हैट्रिक से वाराणसी चैंपियन
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कप के साथ अखिल भारतीय काली कुमाऊं फुटबॉल प्रतियोगिता की विजेता वाराणसी की टीम के खिलाड़ी।
- फोटो : CHAMPAWAT
वाराणसी की टीम ने धमाकेदार प्रदर्शन कर अखिल भारतीय काली कुमाऊं फुटबॉल प्रतियोगिता की खिताबी जंग अपने नाम की। रविवार को गोरलचौड़ मैदान में हुए फाइनल मुकाबले में उसने देहरादून को बुरी तरह रौंदा।
विजेता टीम के विक्रम ने एक तिकड़ी सहित कुल चार गोल कर जीत में जबर्दस्त भूमिका निभाई और प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने। विजेता टीम को अखिल भारतीय फुटबॉल फेडरेशन के महासचिव कुशल दास, एयर कमाडोर नावेश बहरी और आयोजक सी-हॉक के चेयरमैन नरेंद्र लडवाल ने एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया। जबकि उप विजेता टीम को 50 हजार रुपये का इनाम दिया गया।
फाइनल मुकाबले में देहरादून ने तीसरे मिनट में गोल करने का सिलसिला शुरू किया। उसकी ओर से विक्रम ठाकुरी ने ये गोल दागा। कुछ ही देर में वाराणसी के विक्रम ने गोल कर मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। दो मिनट बाद फिर विक्रम ने गोल कर वाराणसी को बढ़त दिला दी। इसके बाद तो वाराणसी की ओर से गोलों की झड़ी लग गई। 33वें मिनट में विक्रम ने तीसरा गोल कर तिकड़ी जमाई।
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41वें मिनट में कमल दुआ ने गोल कर टीम को एक के मुकाबले चार गोल से आगे कर दिया। दूसरे हाफ में 15वें मिनट में कमल दुआ ने एक और गोल किया। मैच की अंतिम सीटी बजने से कुछ पहले वाराणसी की ओर से विक्रम ने अपना चौथा गोल कर टीम को एक के मुकाबले छह गोल से जिता दिया।
रेफरी संदीप पोखरियाल और मनोज व कुंदन लाइनमैन तथा वीरेंद्र बिष्ट फोर्थ ऑफिशियल थे। जबकि आंखों देखा हाल अशोक वर्मा और रघुराज देउपा ने सुनाया। विद्या मंदिर के छात्रों ने घोष के जरिये अतिथियों की अगवानी की और लोक गायक राजू अटवाल ने स्वागत व लोकगीत प्रस्तुत किया। उत्तराखंड फुटबॉल संघ के उपाध्यक्ष प्रहलाद सिंह मेहता ने कौशल दास को ज्ञापन दे उत्तराखंड में फुटबॉल को विशेष प्रोत्साहन देने की मांग की।
फाइनल में ये लोग मौजूद थे:
स्वत्थान के संजय जोशी, दिनेश जोशी, एडीएम टीएस मर्तोलिया, एसडीएम अनिल गर्ब्याल, शंकर पांडेय, मंदीप ढेक, डॉ.महेश ढेक, डॉ.यशवंत बोहरा, रवींद्र तड़ागी, विकास साह, मयूख चौधरी, रोहित बिष्ट, दीपक लारा, महेंद्र बोहरा, प्रदीप बोहरा, मुन्ना राय, परमानंद पुनेठा, विपिन उप्रेती, विष्णु गिरी, सुरेंद्र सौन, माधोसिंह अधिकारी।
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विजेता टीम के विक्रम ने एक तिकड़ी सहित कुल चार गोल कर जीत में जबर्दस्त भूमिका निभाई और प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने। विजेता टीम को अखिल भारतीय फुटबॉल फेडरेशन के महासचिव कुशल दास, एयर कमाडोर नावेश बहरी और आयोजक सी-हॉक के चेयरमैन नरेंद्र लडवाल ने एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया। जबकि उप विजेता टीम को 50 हजार रुपये का इनाम दिया गया।
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फाइनल मुकाबले में देहरादून ने तीसरे मिनट में गोल करने का सिलसिला शुरू किया। उसकी ओर से विक्रम ठाकुरी ने ये गोल दागा। कुछ ही देर में वाराणसी के विक्रम ने गोल कर मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। दो मिनट बाद फिर विक्रम ने गोल कर वाराणसी को बढ़त दिला दी। इसके बाद तो वाराणसी की ओर से गोलों की झड़ी लग गई। 33वें मिनट में विक्रम ने तीसरा गोल कर तिकड़ी जमाई।
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41वें मिनट में कमल दुआ ने गोल कर टीम को एक के मुकाबले चार गोल से आगे कर दिया। दूसरे हाफ में 15वें मिनट में कमल दुआ ने एक और गोल किया। मैच की अंतिम सीटी बजने से कुछ पहले वाराणसी की ओर से विक्रम ने अपना चौथा गोल कर टीम को एक के मुकाबले छह गोल से जिता दिया।
रेफरी संदीप पोखरियाल और मनोज व कुंदन लाइनमैन तथा वीरेंद्र बिष्ट फोर्थ ऑफिशियल थे। जबकि आंखों देखा हाल अशोक वर्मा और रघुराज देउपा ने सुनाया। विद्या मंदिर के छात्रों ने घोष के जरिये अतिथियों की अगवानी की और लोक गायक राजू अटवाल ने स्वागत व लोकगीत प्रस्तुत किया। उत्तराखंड फुटबॉल संघ के उपाध्यक्ष प्रहलाद सिंह मेहता ने कौशल दास को ज्ञापन दे उत्तराखंड में फुटबॉल को विशेष प्रोत्साहन देने की मांग की।
फाइनल में ये लोग मौजूद थे:
स्वत्थान के संजय जोशी, दिनेश जोशी, एडीएम टीएस मर्तोलिया, एसडीएम अनिल गर्ब्याल, शंकर पांडेय, मंदीप ढेक, डॉ.महेश ढेक, डॉ.यशवंत बोहरा, रवींद्र तड़ागी, विकास साह, मयूख चौधरी, रोहित बिष्ट, दीपक लारा, महेंद्र बोहरा, प्रदीप बोहरा, मुन्ना राय, परमानंद पुनेठा, विपिन उप्रेती, विष्णु गिरी, सुरेंद्र सौन, माधोसिंह अधिकारी।