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करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच को दो पुलिस टीमें गठित
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चंपावत पुलिस कार्यालय में मौजूद बैठक में चार जिलों के पुलिस अधिकारी।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। कई वित्तीय कंपनियों में करोड़ों रुपये के घोटालों की जांच के लिए पुलिस की ओर से दो टीमों का गठन किया गया है। इसके लिए पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं अजय रौतेला ने चंपावत के एसपी लोकेश्वर सिंह को पर्यवेक्षण अधिकारी नामित किया है। दोनों टीमों ने चंपावत सहित चार जिलों में नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) से संबंधित दर्ज 21 मुकदमों की विवेचना शुरू कर दी है।
एसपी कार्यालय में अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के पुलिस अधिकारियों की बैठक में जांच का रोडमैप तैयार किया गया। एसपी ने बताया कि एनबीएफसी से संबंधित अल्मोड़ा जिले में चार, पिथौरागढ़ में छह, बागेश्वर जिले में आठ और चंपावत जिले के विभिन्न थानों में तीन मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि जांच में किम इंफास्ट्रक्चर, अनंत निधि, कैमुना क्रेडिट सोसायटी, आगिट, रियल इंडिया, मल्टीपल, एवरग्रीन, अर्थलैंड डेवलपमेंट, सहारा आदि पर करीब 1600 से अधिक निवेशकों की 40 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के गबन के आरोप हैं। उन्होंने बताया कि चारों जिलों में गबन संबंधी मुकदमों के विवेचकों के साथ बैठक कर समीक्षा की गई। सभी विवेचकों को एनबीएफसी से संबंधित मुकदमों में वांछित आरोपितों के विरुद्ध ठोस साक्ष्य जुटाकर गिरफ्तार करने के लिए निर्देशित किया गया।
बैठक में मौजूद रहे ये पुलिस अधिकारी
चंपावत। बैठक में अल्मोड़ा के निरीक्षक भूपेंद्र सिंह बृजवाल, एसआई चंद्र सिंह, बागेश्वर जिले के एसआई पंकज जोशी, कृष्ण गिरि, कैलाश सिंह और खष्टी बिष्ट, पिथौरागढ़ जिले से एसआई हीरा सिंह, सुशील जोशी, चंपावत के एसआई दीवान सिंह जलाल, लोहाघाट थानाध्यक्ष मनीष खत्री और उमराव सिंह आदि रहे। संवाद
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क्या होती है नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी
चंपावत। एनबीएफसी किसी जमा योजना में लोगों के रुपये जमा करवाती है और उन्हें कई तरह के ऋण दिलाती है। यह एक वित्तीय संस्था होती है, जो बैंक की तरह काम तो करती है लेकिन, यह बैंक नहीं होती। यह कंपनी पहले किसी योजना के तहत जमाकर्ता से रुपये जमा करवाती है, इसके बाद जमाकर्ता को मुनाफे का कुछ हिस्सा ऋण के रूप में प्रदान करती है। इस तरह की कंपनी जमा राशि, बीमा, उधार, शेयर, स्टॉक्स में निवेश करती है। ऐसी ही कुछ कंपनियां विभिन्न माध्यमों से लोगों का पैसा गबन कर फरार हो जाती हैं। संवाद
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एसपी कार्यालय में अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के पुलिस अधिकारियों की बैठक में जांच का रोडमैप तैयार किया गया। एसपी ने बताया कि एनबीएफसी से संबंधित अल्मोड़ा जिले में चार, पिथौरागढ़ में छह, बागेश्वर जिले में आठ और चंपावत जिले के विभिन्न थानों में तीन मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि जांच में किम इंफास्ट्रक्चर, अनंत निधि, कैमुना क्रेडिट सोसायटी, आगिट, रियल इंडिया, मल्टीपल, एवरग्रीन, अर्थलैंड डेवलपमेंट, सहारा आदि पर करीब 1600 से अधिक निवेशकों की 40 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के गबन के आरोप हैं। उन्होंने बताया कि चारों जिलों में गबन संबंधी मुकदमों के विवेचकों के साथ बैठक कर समीक्षा की गई। सभी विवेचकों को एनबीएफसी से संबंधित मुकदमों में वांछित आरोपितों के विरुद्ध ठोस साक्ष्य जुटाकर गिरफ्तार करने के लिए निर्देशित किया गया।
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बैठक में मौजूद रहे ये पुलिस अधिकारी
चंपावत। बैठक में अल्मोड़ा के निरीक्षक भूपेंद्र सिंह बृजवाल, एसआई चंद्र सिंह, बागेश्वर जिले के एसआई पंकज जोशी, कृष्ण गिरि, कैलाश सिंह और खष्टी बिष्ट, पिथौरागढ़ जिले से एसआई हीरा सिंह, सुशील जोशी, चंपावत के एसआई दीवान सिंह जलाल, लोहाघाट थानाध्यक्ष मनीष खत्री और उमराव सिंह आदि रहे। संवाद
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क्या होती है नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी
चंपावत। एनबीएफसी किसी जमा योजना में लोगों के रुपये जमा करवाती है और उन्हें कई तरह के ऋण दिलाती है। यह एक वित्तीय संस्था होती है, जो बैंक की तरह काम तो करती है लेकिन, यह बैंक नहीं होती। यह कंपनी पहले किसी योजना के तहत जमाकर्ता से रुपये जमा करवाती है, इसके बाद जमाकर्ता को मुनाफे का कुछ हिस्सा ऋण के रूप में प्रदान करती है। इस तरह की कंपनी जमा राशि, बीमा, उधार, शेयर, स्टॉक्स में निवेश करती है। ऐसी ही कुछ कंपनियां विभिन्न माध्यमों से लोगों का पैसा गबन कर फरार हो जाती हैं। संवाद