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विकास के हर पत्थर में समाएं हैं तिवारी
उजाला ब्यूरो चंपावत।
Updated Thu, 18 Oct 2018 10:52 PM IST
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टनकपुर में दिसंबर 2005 में तत्कालीन विधायक हेमेश खर्कवाल के विवाह के मौके पर बधाई देते पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय मंत्री, उत्तर प्रदेश के चार बार मुख्यमंत्री रहने के अलावा उत्तराखंड की पहली निर्वाचित सरकार के पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहे पंडित नारायण दत्त तिवारी की अब बस यादें ही शेष हैं। चंपावत जिले के पहाड़ी क्षेत्र में उनका आना-जाना लोहाघाट और देवीधुरा को छोड़ कम ही रहा। जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा से उनका करीबी रिश्ता रहा।
दरअसल मैदान का ये इलाका 2002 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनने तक उनकी नैनीताल संसदीय क्षेत्र का हिस्सा भी रहा। पंडित तिवारी यहां विकास पुरुष के पर्याय थे। एक दशक पूर्व तक हुए विकास के हर काम में उनकी छाप साफ नजर आती है। टनकपुर में टीवी टावर 1987 में लग गया था। ये वो दौर था, जब पिथौरागढ़, अल्मोड़ा जैसे पुराने जिलों में तक टावर नहीं था।
टीवी क्रांति लाने वाला यह टावर पंडित एनडी तिवारी की ही देन थी। 2009 तक चंपावत जिले का टनकपुर-बनबसा क्षेत्र नैनीताल संसदीय सीट में शामिल था। राज्य बनने के बाद सीएम के रूप में उन्होंने क्षेत्र के विकास के अनेकों झंडे गाड़े। 1997 में बने चंपावत जिले में 2003 तक मात्र एक तहसील थी। सीएम रहते हुए तिवारी ने इस जिले को एक तहसील से बढ़ाकर चार तहसील वाला जिला बनाया।
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अक्तूबर 2003 में टनकपुर तहसील का उद्घाटन किया। इसके बाद पाटी और लोहाघाट तहसील भी उन्हीं के कार्यकाल में बनी। टनकपुर में 70 के दशक का आईटीआई हो या 2004 में खुले डिग्री कॉलेज, बनबसा जीजीआईसी से लेकर सूखीढांग-डांडा-मीडार, अमोड़ी-रीठा साहिब मोटर मार्ग सहित विकास के कई मील के पत्थर उन्होंने गाड़े।
उनका सबसे बड़ा योगदान भारत सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए 80 के दशक में एनचपीसी के टनकपुर पावर स्टेशन की नींव रखना रहा। 1992 में बनकर तैयार 125 मेगावाट क्षमता के इस पावर स्टेशन ने न केवल बिजली उत्पादन में इजाफा किया, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में मददगार साबित हुआ है।
विकास की सोच थी सियासत की धुरी : हेमेश
चंपावत। 2002 में पहली बार विधानसभा पहुंचे पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल को सीएम के रूप में एनडी तिवारी के पूरे पांच साल के कार्यकाल को देखने का अवसर मिला। वे बताते हैं कि विकास और नियोजन की सोच उनकी सियासत की धुरी थी। इसी विकासवाद सोच और शालीन व्यवहार के चलते अपने विरोधियों में भी वे लोकप्रिय और राजनीतिक अजातशत्रु की श्रेणी में थे। ब्यूरो
सीएम के रूप में भी इलाके से जुड़ाव रहा
चंपावत। स्वर्गीय तिवारी पांच वर्ष के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में पहाड़ तो कभी नहीं आए, लेकिन टनकपुर-बनबसा का दौरा दो बार किया। 21 अक्तूबर 2003 में उन्होंने टनकपुर का दौरा कर तहसील सहित विकास की नई इबारत लिखी। दूसरी बार वे 10 दिसंबर 2005 को तत्कालीन विधायक हेमेश खर्कवाल के विवाह समारोह में पहुंचे थे जबकि केंद्रीय मंत्री और सांसद के रूप में वे 17 बार यहां आ चुके हैं।
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दरअसल मैदान का ये इलाका 2002 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनने तक उनकी नैनीताल संसदीय क्षेत्र का हिस्सा भी रहा। पंडित तिवारी यहां विकास पुरुष के पर्याय थे। एक दशक पूर्व तक हुए विकास के हर काम में उनकी छाप साफ नजर आती है। टनकपुर में टीवी टावर 1987 में लग गया था। ये वो दौर था, जब पिथौरागढ़, अल्मोड़ा जैसे पुराने जिलों में तक टावर नहीं था।
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टीवी क्रांति लाने वाला यह टावर पंडित एनडी तिवारी की ही देन थी। 2009 तक चंपावत जिले का टनकपुर-बनबसा क्षेत्र नैनीताल संसदीय सीट में शामिल था। राज्य बनने के बाद सीएम के रूप में उन्होंने क्षेत्र के विकास के अनेकों झंडे गाड़े। 1997 में बने चंपावत जिले में 2003 तक मात्र एक तहसील थी। सीएम रहते हुए तिवारी ने इस जिले को एक तहसील से बढ़ाकर चार तहसील वाला जिला बनाया।
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अक्तूबर 2003 में टनकपुर तहसील का उद्घाटन किया। इसके बाद पाटी और लोहाघाट तहसील भी उन्हीं के कार्यकाल में बनी। टनकपुर में 70 के दशक का आईटीआई हो या 2004 में खुले डिग्री कॉलेज, बनबसा जीजीआईसी से लेकर सूखीढांग-डांडा-मीडार, अमोड़ी-रीठा साहिब मोटर मार्ग सहित विकास के कई मील के पत्थर उन्होंने गाड़े।
उनका सबसे बड़ा योगदान भारत सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए 80 के दशक में एनचपीसी के टनकपुर पावर स्टेशन की नींव रखना रहा। 1992 में बनकर तैयार 125 मेगावाट क्षमता के इस पावर स्टेशन ने न केवल बिजली उत्पादन में इजाफा किया, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में मददगार साबित हुआ है।
विकास की सोच थी सियासत की धुरी : हेमेश
चंपावत। 2002 में पहली बार विधानसभा पहुंचे पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल को सीएम के रूप में एनडी तिवारी के पूरे पांच साल के कार्यकाल को देखने का अवसर मिला। वे बताते हैं कि विकास और नियोजन की सोच उनकी सियासत की धुरी थी। इसी विकासवाद सोच और शालीन व्यवहार के चलते अपने विरोधियों में भी वे लोकप्रिय और राजनीतिक अजातशत्रु की श्रेणी में थे। ब्यूरो
सीएम के रूप में भी इलाके से जुड़ाव रहा
चंपावत। स्वर्गीय तिवारी पांच वर्ष के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में पहाड़ तो कभी नहीं आए, लेकिन टनकपुर-बनबसा का दौरा दो बार किया। 21 अक्तूबर 2003 में उन्होंने टनकपुर का दौरा कर तहसील सहित विकास की नई इबारत लिखी। दूसरी बार वे 10 दिसंबर 2005 को तत्कालीन विधायक हेमेश खर्कवाल के विवाह समारोह में पहुंचे थे जबकि केंद्रीय मंत्री और सांसद के रूप में वे 17 बार यहां आ चुके हैं।