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तीन साल बाद भी नहीं खुले शौचालय के ताले

Mon, 12 Jun 2017 10:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत Updated Mon, 12 Jun 2017 10:01 PM IST
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Three years later open toilets locks
सूखीढ़ांग में बंद पड़ा शौचालय - फोटो : अमर उजाला

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 एक तरफ तो प्रदेश को खुले में शौच की प्रथा से मुक्ति दिलाने के लिए तमाम दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निर्माण के तीन साल पूरे होने के बाद भी शुलभ शौचालय के ताले तक नहीं खुल सके हैं। टनकपुर-पिथौरागढ़ नेशनल हाइवे पर सूखीढांग में वर्ष 2014 में बने शुलभ शौचालय का ताला एक बार भी नहीं खुल पाया है। 

पर्यटन विभाग की ओर से लाखों रुपये की लागत से बनाए गए शौचालय का हाइवे में चलने वाले यात्रियों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कई बार पर्यटन विभाग के समक्ष शिकायत किए जाने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। लोगों ने शीघ्र शौचालय के ताले न खुलने की दशा में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। 
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सूखीढांग के सामाजिक कार्यकर्ता केएन जोशी, पंडित शंकर दत्त जोशी का कहना है कि वर्ष 2014 में पर्यटन विभाग की ओर से बिना ग्रामीणों को विश्वास में लिए हाइवे किनारे शुलभ शौचालय का निर्माण कर दिया। लेकिन अब तक उसका ताला एक बार भी नहीं खोला गया है। जिस कारण हाइवे से गुजरने वाले यात्रियों के साथ ही मशहूर पर्यटन स्थल श्यामलाताल आने वाले पर्यटकों को इसका कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि इससे पूर्व उन्होंने तत्कालीन एसडीएम नरेश दुर्गापाल के समक्ष भी इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। एसडीएम ने शौचालय का ताला खुलवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कुछ भी नहीं हो सका है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह ऐरी का कहना है कि पर्यटन विभाग ने तो केवल शौचालय का निर्माण किया था, जिसके बाद इसे शुलभ इंटरनेशनल संस्था को हस्तांतरित कर दिया गया है। शौचालय का संचालन शुलभ इंटरनेशनल को करना है।
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रीठा साहिब मेले के कारण उमड़ रही है भीड़
चंपावत। जिले के रीठासाहिब में चल रहे जोड़ मेले के कारण सूखीढांग सहित अन्य कस्बाई इलाकों में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। जिले के मैदानी क्षेत्र के बाद पर्वतीय क्षेत्र का पहला कस्बा होने के कारण इन दिनों सूखीढांग में बड़ी संख्या में सिख तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं, जिन्हें भी शौचालय बंद होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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