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हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेक मनौती मांगी
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Fri, 09 Jun 2017 10:43 PM IST
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जोड़ मेले के समापन के मौके पर वापस जाते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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गुरुद्वारा रीठा साहिब में तीन दिनी सालाना जोड़ मेला संपन्न हुआ। गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ के महाभोग और अरदास के साथ शुक्रवार को मेले का समापन हुआ। तीन दिवसीय मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेक मनौती मांगी। मेला संपन्न होने के बावजूद श्रद्धालुओं की वापसी का सिलसिला तेज हो गया है।
गुरुद्वारे में देर तक सबद-कीर्तन जारी रहा। सिख संगत को संबोधित करते हुए जत्थेदार और ज्ञानियों ने सिख धर्म गुरुओं के त्याग और बलिदान का स्मरण कराया। सरबत की भलाई के लिए अरदास की गई। इस अवसर पर कार सेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह, गुरुद्वारा प्रबंधक बाबा श्याम सिंह समेत तमाम संत मौजूद थे। महाभोग का लंगर छकने के बाद यहां से श्रद्धालुओं की रवानगी शुरू हुई। मेला समाप्त होने के बाद गुरुद्वारे की सफाई में लोग जुटे हुए हैं। ढेरों श्रद्धालुओं ने बाइक और ट्रकों से सफर किया।
खूब हुई ट्रकों में आवाजाही
चंपावत। रीठा साहिब जोड़ मेले में हर साल हजारों लोग शामिल होते हैं। मेले में शिरकत करने के लिए श्रद्धालु जोखिम भी खूब उठाते हैं। ये श्रद्धालु ट्रकों और खुले वाहनों में लद कर यात्रा करते हैं। जिससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। प्रशासन के ढीले रवैये से ट्रकों के जरिए आवाजाही बेरोकटोक चल रही है।
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टनकपुर से रीठासाहिब पहुंचने के लिए 150 किमी का पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ता है। श्रद्धालु मोटर साइकिल, बस, कार समेत तमाम वाहनों के जरिए रीठासाहिब पहुंचते हैं। सबसे अधिक खतरा ट्रकों और खुली गाड़ियों में सफर करने वाले श्रद्धालुओं को होता है। एक-एक ट्रक में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बैठ कर सफर करते हैं। धूनाघाट के बाद तो स्थिति और बदतर हो जाती है। संकरी सड़क और दूसरी तरफ गहरी खाई दोनों ही श्रद्धालुओं से लदे ट्रकों के लिए बड़ा खतरा बनती हैं। बावजूद इसके ट्रकों में बैठ कर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा कर रहे हैं।
लंगर में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया
चंपावत। गुरु रामदास सेवा समिति द्वारा मुड़ियानी में लगाए गए लंगर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। रुद्रपुर, खटीमा, सितारगंज और नानकमत्ता से आए सेवादार बीते तीन दिनों से यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। समिति के बलवंत सिंह, दलजीत सिंह, हरभजन सिंह, बलविंदर सिंह का कहना है कि समिति बीते 12 सालों से इस स्थान पर तीन दिन तक लंगर लगाती आ रही है। भंडारे में लोगों को भोजन और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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गुरुद्वारे में देर तक सबद-कीर्तन जारी रहा। सिख संगत को संबोधित करते हुए जत्थेदार और ज्ञानियों ने सिख धर्म गुरुओं के त्याग और बलिदान का स्मरण कराया। सरबत की भलाई के लिए अरदास की गई। इस अवसर पर कार सेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह, गुरुद्वारा प्रबंधक बाबा श्याम सिंह समेत तमाम संत मौजूद थे। महाभोग का लंगर छकने के बाद यहां से श्रद्धालुओं की रवानगी शुरू हुई। मेला समाप्त होने के बाद गुरुद्वारे की सफाई में लोग जुटे हुए हैं। ढेरों श्रद्धालुओं ने बाइक और ट्रकों से सफर किया।
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खूब हुई ट्रकों में आवाजाही
चंपावत। रीठा साहिब जोड़ मेले में हर साल हजारों लोग शामिल होते हैं। मेले में शिरकत करने के लिए श्रद्धालु जोखिम भी खूब उठाते हैं। ये श्रद्धालु ट्रकों और खुले वाहनों में लद कर यात्रा करते हैं। जिससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। प्रशासन के ढीले रवैये से ट्रकों के जरिए आवाजाही बेरोकटोक चल रही है।
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टनकपुर से रीठासाहिब पहुंचने के लिए 150 किमी का पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ता है। श्रद्धालु मोटर साइकिल, बस, कार समेत तमाम वाहनों के जरिए रीठासाहिब पहुंचते हैं। सबसे अधिक खतरा ट्रकों और खुली गाड़ियों में सफर करने वाले श्रद्धालुओं को होता है। एक-एक ट्रक में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बैठ कर सफर करते हैं। धूनाघाट के बाद तो स्थिति और बदतर हो जाती है। संकरी सड़क और दूसरी तरफ गहरी खाई दोनों ही श्रद्धालुओं से लदे ट्रकों के लिए बड़ा खतरा बनती हैं। बावजूद इसके ट्रकों में बैठ कर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा कर रहे हैं।
लंगर में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया
चंपावत। गुरु रामदास सेवा समिति द्वारा मुड़ियानी में लगाए गए लंगर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। रुद्रपुर, खटीमा, सितारगंज और नानकमत्ता से आए सेवादार बीते तीन दिनों से यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। समिति के बलवंत सिंह, दलजीत सिंह, हरभजन सिंह, बलविंदर सिंह का कहना है कि समिति बीते 12 सालों से इस स्थान पर तीन दिन तक लंगर लगाती आ रही है। भंडारे में लोगों को भोजन और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।