{"_id":"c3528546760ce76cd07be8d9554ceb2f","slug":"thousands-of-e-rickshaws-stop-on-unemployed-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ई-रिक्शों पर रोक से हजारों बेरोजगार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ई-रिक्शों पर रोक से हजारों बेरोजगार
ब्यूरो /अमर उजाला, चंपावत
Updated Sat, 27 Jun 2015 10:43 PM IST
विज्ञापन
दिल्ली की तर्ज पर रोजगार का माध्यम बने ई-रिक्शा पर परिवहन विभाग ने रोक लगा दी है। कल तक बेधड़क सवारी ढो रहे बैट्री चालित ये रिक्शे अब सड़क पर नजर नहीं आ रहे हैं। दरअसल हाईकोर्ट के आदेश पर परिवहन विभाग ने इन रिक्शों के संचालन पर रोक लगा दी है। विभाग का कहना है कि ये वाहन विभाग द्वारा प्रमाणित नहीं है और इसका कामर्शियल उपयोग अवैधानिक हैं।
निर्माता कंपनियों ने भी इन्हें बनाने और बेचने के लिए अनुमति नहीं ली है, लेकिन अब कुछ निर्माता कंपनियों द्वारा आवेदन किए जाने पर परिवहन मंत्रालय इन वाहनों के वैधानिक पंजीकरण पर विचार कर रहा है। वहीं, सरकार द्वारा इनके संचालन पर रोक लगाने से हजारों बेरोजगारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पिछले तीन-चार दिन से ई-रिक्शा चालक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। अकेले टनकपुर-बनबसा क्षेत्र में करीब 45 ई-रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी छिन गई है। एआरटीओ वीके सिंह ने बताया कि विभाग ने जुलाई 2014 में ही निर्माण कंपनियों के डीलरों को नोटिस जारी किया था, लेकिन उन्होंने विभाग से ई-रिक्शा की वैधानिकता के लिए आवेदन ही नहीं किया। उन्होंने 30 जून तक कुछ न कुछ हल निकलने की उम्मीद जताई है।
विज्ञापन
निर्माता कंपनियों ने भी इन्हें बनाने और बेचने के लिए अनुमति नहीं ली है, लेकिन अब कुछ निर्माता कंपनियों द्वारा आवेदन किए जाने पर परिवहन मंत्रालय इन वाहनों के वैधानिक पंजीकरण पर विचार कर रहा है। वहीं, सरकार द्वारा इनके संचालन पर रोक लगाने से हजारों बेरोजगारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पिछले तीन-चार दिन से ई-रिक्शा चालक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। अकेले टनकपुर-बनबसा क्षेत्र में करीब 45 ई-रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी छिन गई है। एआरटीओ वीके सिंह ने बताया कि विभाग ने जुलाई 2014 में ही निर्माण कंपनियों के डीलरों को नोटिस जारी किया था, लेकिन उन्होंने विभाग से ई-रिक्शा की वैधानिकता के लिए आवेदन ही नहीं किया। उन्होंने 30 जून तक कुछ न कुछ हल निकलने की उम्मीद जताई है।
विज्ञापन