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इस बारहमासी मार्ग में भी कम नहीं हैं खतरे
Fri, 21 Dec 2018 10:44 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Fri, 21 Dec 2018 10:44 PM IST
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में खतरनाक चट्टानें।
- फोटो : amar ujala
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रुद्रप्रयाग जिले में निर्माणाधीन बारहमासी के अगस्त्यमुनि-गौरीकुंड मोटर मार्ग पर भीरी और बांसबाड़ा के बीच चट्टान गिरने से सात लोगों की मौत हो गई है, जबकि चार मजदूर घायल हो गए। इनमें से तीन की हालत गंभीर है। इधर टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी बारहमासी मोटर मार्ग का काम चल रहा है, यहां भी हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है।
पिछले साल इस रूट पर एक मजदूर समेत दो लोगों की मौत हो चुकी है। इस रूट पर यहां के पूर्व एडीएम हेमंत कुमार वर्मा और हल्द्वानी के प्रभागीय वनाधिकारी चंद्रशेखर सनवाल सहित कई लोग बाल-बाल बचे थे।
निर्माणाधीन बारहमासी सड़क में सूखीढांग, बेलखेत, स्वांला, धौन, बाराकोट, घाट आदि स्थानों में अक्सर मलबा आने से हर वक्त खतरा रहता है।
यहां कई जगह सुरक्षा में पुख्ता प्रबंध का अभाव है। सड़क को चौड़ा करने के लिए पहाड़ को काटने के दौरान काफी जगह पर्याप्त सुरक्षा नहीं है। ऐसे आरोप इस रूट पर आवाजाही करने वाले लोग लगाते रहे हैं। हालांकि इस मार्ग पर काम करने वाली एजेंसियां सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त होने का दावा करती हैं।
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निर्माणाधीन बारहमासी रोड में वाहनों में गिरा मलबे से हुई दुर्घटनाएं:
22 जुलाई:स्वांला के समीप एडीएम हेमंत कुमार वर्मा की कार भारी-भरकम पत्थर गिरा, बाल-बाल बचे।
25 जुलाई:बारहमासी सड़क कटिंग करा रही शिवालया कंपनी का एक वाहन मलबे की चपेट में आया।
26 जुलाई:बनलेख के पास कार में मलबा गिरने से बाल-बाल बचे शिक्षक।
3 अगस्त:हल्द्वानी के प्रभागीय वनाधिकारी चंद्रशेखर सनवाल की कार में अमरूबैंड के पास मलबा गिरा, कार को नुकसान, बाल-बाल बचे अधिकारी।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में कोई खास खतरे वाले स्पॉट नहीं हैं। फिर भी पूरा एहतियात बरता जा रहा है। अधिकांश जगहों में भूगर्भशास्त्री, सुरक्षा कर्मी और सुपरवाइजर के जरिए हिफाजत की जा रही है।
एलडी मथैला, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, लोहाघाट।
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पिछले साल इस रूट पर एक मजदूर समेत दो लोगों की मौत हो चुकी है। इस रूट पर यहां के पूर्व एडीएम हेमंत कुमार वर्मा और हल्द्वानी के प्रभागीय वनाधिकारी चंद्रशेखर सनवाल सहित कई लोग बाल-बाल बचे थे।
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निर्माणाधीन बारहमासी सड़क में सूखीढांग, बेलखेत, स्वांला, धौन, बाराकोट, घाट आदि स्थानों में अक्सर मलबा आने से हर वक्त खतरा रहता है।
यहां कई जगह सुरक्षा में पुख्ता प्रबंध का अभाव है। सड़क को चौड़ा करने के लिए पहाड़ को काटने के दौरान काफी जगह पर्याप्त सुरक्षा नहीं है। ऐसे आरोप इस रूट पर आवाजाही करने वाले लोग लगाते रहे हैं। हालांकि इस मार्ग पर काम करने वाली एजेंसियां सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त होने का दावा करती हैं।
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निर्माणाधीन बारहमासी रोड में वाहनों में गिरा मलबे से हुई दुर्घटनाएं:
22 जुलाई:स्वांला के समीप एडीएम हेमंत कुमार वर्मा की कार भारी-भरकम पत्थर गिरा, बाल-बाल बचे।
25 जुलाई:बारहमासी सड़क कटिंग करा रही शिवालया कंपनी का एक वाहन मलबे की चपेट में आया।
26 जुलाई:बनलेख के पास कार में मलबा गिरने से बाल-बाल बचे शिक्षक।
3 अगस्त:हल्द्वानी के प्रभागीय वनाधिकारी चंद्रशेखर सनवाल की कार में अमरूबैंड के पास मलबा गिरा, कार को नुकसान, बाल-बाल बचे अधिकारी।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में कोई खास खतरे वाले स्पॉट नहीं हैं। फिर भी पूरा एहतियात बरता जा रहा है। अधिकांश जगहों में भूगर्भशास्त्री, सुरक्षा कर्मी और सुपरवाइजर के जरिए हिफाजत की जा रही है।
एलडी मथैला, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, लोहाघाट।