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न केंद्रीय कार्यशाला बनेगी और न आधुनिक बस स्टेशन
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परिवहन निगम का टनकपुर स्थित कार्यशाला। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : TANAKPUR
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चंपावत(चंद्रशेखर जोशी)। जिले में न तो रोडवेज की केंद्रीय कार्यशाला बनेगी और न आधुनिक बस स्टेशन अस्तित्व में आएगा। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की ये घोषणाएं हवाई रहीं और अब इन्हें पूरी तरह विलोपित कर दिया गया है।
उत्तराखंड परिवहन निगम के टनकपुर का क्षेत्रीय कार्यालय उत्तर प्रदेश के दौर के 16 कार्यालयों में से एक है। राज्य बनने के बाद भी इसकी तस्वीर नहीं बदल सकी। इस कार्यशाला से संबद्ध तीन डिपो (टनकपुर, लोहाघाट और पिथौरागढ़) के जरिये 175 से अधिक बस सेवाएं पांच हजार से अधिक मुसाफिरों को मंजिल तक पहुंचाती हैं लेकिन न केवल तीनों डिपो पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं, बल्कि इनमें रत्तीभर सुधार भी नहीं हुआ है। इससे भी बुरे हाल क्षेत्रीय कार्यशाला के हैं।
इस सबको देखते हुए टनकपुर में आधुनिक बस स्टेशन और क्षेत्रीय कार्यशाला को उत्तराखंड रोडवेज की केंद्रीय कार्यशाला में बदलने की जरूरत महसूस की गई। तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 18 जुलाई 2017 को केंद्रीय कार्यशाला और 23 अक्तूबर 2019 को कार्यशाला परिसर में आधुनिक बस स्टेशन के निर्माण का एलान किया था। सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद भी इस दिशा में एक कदम आगे नहीं बढ़ा जा सका। उल्टा पिछले साल इन दोनों घोषणाओं को विलोपित कर दिया गया।
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अब भी छह दशक पुराने स्टेशन में पार्क हो रही बसें
चंपावत। चंपावत और पिथौरागढ़ जिले का सबसे बड़ा और सबसे पुराना रोडवेज स्टेशन टनकपुर में है। 1960 में बने टनकपुर स्टेशन की क्षमता बेहद कम थी। तब 12 बसों को पार्क करने के अलावा यात्रियों के विश्राम की जगह थी। आबादी और बस बेड़ा बढ़ने से धीरे-धीरे ये स्टेशन जरूरत को पूरा करने में विफल रहा। स्टेशन परिसर के एक किनारे बने पुराने भवन को तोड़ बसों को खड़ा किया गया। जगह की कमी की वजह से बस स्टेशन को शिफ्ट करने की कई बार मांग भी उठती रही। इसे यहां से क्षेत्रीय कार्यशाला परिसर में ले जाने का भी प्रस्ताव रखा गया लेकिन अब ये सारे प्रस्ताव निरस्त हो गए हैं।
उत्तराखंड रोडवेज का टनकपुर में घोषित केंद्रीय कार्यशाला और टनकपुर में आधुनिक बस स्टेशन की घोषणा विलोपित की गई है। इन दोनों घोषणाओं को परिवहन निगम द्वारा दी गई आख्या के आधार पर शासन पिछले साल विलोपित कर चुका है। - विनीत तोमर, डीएम, चंपावत।
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उत्तराखंड परिवहन निगम के टनकपुर का क्षेत्रीय कार्यालय उत्तर प्रदेश के दौर के 16 कार्यालयों में से एक है। राज्य बनने के बाद भी इसकी तस्वीर नहीं बदल सकी। इस कार्यशाला से संबद्ध तीन डिपो (टनकपुर, लोहाघाट और पिथौरागढ़) के जरिये 175 से अधिक बस सेवाएं पांच हजार से अधिक मुसाफिरों को मंजिल तक पहुंचाती हैं लेकिन न केवल तीनों डिपो पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं, बल्कि इनमें रत्तीभर सुधार भी नहीं हुआ है। इससे भी बुरे हाल क्षेत्रीय कार्यशाला के हैं।
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इस सबको देखते हुए टनकपुर में आधुनिक बस स्टेशन और क्षेत्रीय कार्यशाला को उत्तराखंड रोडवेज की केंद्रीय कार्यशाला में बदलने की जरूरत महसूस की गई। तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 18 जुलाई 2017 को केंद्रीय कार्यशाला और 23 अक्तूबर 2019 को कार्यशाला परिसर में आधुनिक बस स्टेशन के निर्माण का एलान किया था। सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद भी इस दिशा में एक कदम आगे नहीं बढ़ा जा सका। उल्टा पिछले साल इन दोनों घोषणाओं को विलोपित कर दिया गया।
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अब भी छह दशक पुराने स्टेशन में पार्क हो रही बसें
चंपावत। चंपावत और पिथौरागढ़ जिले का सबसे बड़ा और सबसे पुराना रोडवेज स्टेशन टनकपुर में है। 1960 में बने टनकपुर स्टेशन की क्षमता बेहद कम थी। तब 12 बसों को पार्क करने के अलावा यात्रियों के विश्राम की जगह थी। आबादी और बस बेड़ा बढ़ने से धीरे-धीरे ये स्टेशन जरूरत को पूरा करने में विफल रहा। स्टेशन परिसर के एक किनारे बने पुराने भवन को तोड़ बसों को खड़ा किया गया। जगह की कमी की वजह से बस स्टेशन को शिफ्ट करने की कई बार मांग भी उठती रही। इसे यहां से क्षेत्रीय कार्यशाला परिसर में ले जाने का भी प्रस्ताव रखा गया लेकिन अब ये सारे प्रस्ताव निरस्त हो गए हैं।
उत्तराखंड रोडवेज का टनकपुर में घोषित केंद्रीय कार्यशाला और टनकपुर में आधुनिक बस स्टेशन की घोषणा विलोपित की गई है। इन दोनों घोषणाओं को परिवहन निगम द्वारा दी गई आख्या के आधार पर शासन पिछले साल विलोपित कर चुका है। - विनीत तोमर, डीएम, चंपावत।