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Champawat News: सेनानियों के गांन ओलीगांव में स्मारक तक नहीं
Sat, 12 Aug 2023 10:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 12 Aug 2023 10:50 PM IST
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खेतीखान गोशनी के ओली गांव में देश को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता संग्राम
लोहाघाट (चंपावत)। आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले खेतीखान क्षेत्र के प्रमुख सेनानियों का गांव ओलीगांव बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम से उनके मूल गांव में स्मारक तक नहीं बना है। गांव तक पहुंचने के लिए न तो अच्छे रास्ते हैं और न ही पेयजल की पुख्ता व्यवस्था ही है।
सेनानियों के गांव की उपेक्षा से क्षेत्रीय लोग आहत हैं। आठ मार्च 1890 को जन्मे काली कुमाऊं के बब्बर शेर के नाम से विख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित हर्षदेव ओली छह मई 1897 को जन्मे सेनानी पंडित दुर्गादत्त ओली और 14 जून 1902 को जन्मे सेनानी पंडित दयाराम ओली का पैतृक गांव ओलीगांव आज भी पहचान को तरस रहा है। लंबी जेल काटने वाले इन सेनानियों के नाम से गांव में एक सरकारी स्मारक तक नहीं बना है।
आजादी से पूर्व इस गांव में करीब 56 परिवारों की एक बाखुली (पट्टी) हुआ करती थी। जहां यह सब लोग रहा करते थे। अलबत्ता गांव से करीब तीन किमी दूर खेतीखान बाजार में इंद्रा पार्क में इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमा जरूर लगाई गई है। सेनानी के प्रपौत्र राजेश ओली सहित तमाम लोगों का कहना है कि बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने से ओलीगांव में बनी 56 परिवारों की बाखुली का नामोनिशान तक मिट गया है। आज इस स्थान पर होली गायन से लेकर सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम खुले आसमान के नीचे होते हैं।
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बाक्स
ओलीगांव का ही व्यक्ति चुना जाता था सरपंच
लोहाघाट (चंपावत)। आजादी की लड़ाई के दौरान खेतीखान के ओलीगांव का खास महत्व था। क्षेत्र के गांवों में होने वाली महापंचायत के लिए ओलीगांव के व्यक्ति को ही सरपंच चुना जाता था। जिसमें यहां की महिलाएं भी शामिल रहती थी। जो बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष न्याय करते थे।
कोट
ग्राम पंचायत गोशनी के ओलीगांव का भ्रमण कर वहां की समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। ग्रामीणों की ओर से गांव की कुछ समस्याओं की जानकारी दी है। यदि गांव में विकास कार्य नहीं हुए हैं तो लोगों की मांग के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर वहां विकास कार्य कराए जाएंगे।
आरएस रावत, सीडीओ, चंपावत।
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सेनानियों के गांव की उपेक्षा से क्षेत्रीय लोग आहत हैं। आठ मार्च 1890 को जन्मे काली कुमाऊं के बब्बर शेर के नाम से विख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित हर्षदेव ओली छह मई 1897 को जन्मे सेनानी पंडित दुर्गादत्त ओली और 14 जून 1902 को जन्मे सेनानी पंडित दयाराम ओली का पैतृक गांव ओलीगांव आज भी पहचान को तरस रहा है। लंबी जेल काटने वाले इन सेनानियों के नाम से गांव में एक सरकारी स्मारक तक नहीं बना है।
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आजादी से पूर्व इस गांव में करीब 56 परिवारों की एक बाखुली (पट्टी) हुआ करती थी। जहां यह सब लोग रहा करते थे। अलबत्ता गांव से करीब तीन किमी दूर खेतीखान बाजार में इंद्रा पार्क में इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमा जरूर लगाई गई है। सेनानी के प्रपौत्र राजेश ओली सहित तमाम लोगों का कहना है कि बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने से ओलीगांव में बनी 56 परिवारों की बाखुली का नामोनिशान तक मिट गया है। आज इस स्थान पर होली गायन से लेकर सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम खुले आसमान के नीचे होते हैं।
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ओलीगांव का ही व्यक्ति चुना जाता था सरपंच
लोहाघाट (चंपावत)। आजादी की लड़ाई के दौरान खेतीखान के ओलीगांव का खास महत्व था। क्षेत्र के गांवों में होने वाली महापंचायत के लिए ओलीगांव के व्यक्ति को ही सरपंच चुना जाता था। जिसमें यहां की महिलाएं भी शामिल रहती थी। जो बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष न्याय करते थे।
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ग्राम पंचायत गोशनी के ओलीगांव का भ्रमण कर वहां की समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। ग्रामीणों की ओर से गांव की कुछ समस्याओं की जानकारी दी है। यदि गांव में विकास कार्य नहीं हुए हैं तो लोगों की मांग के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर वहां विकास कार्य कराए जाएंगे।
आरएस रावत, सीडीओ, चंपावत।