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सुविधाओं के अभाव में अहमियत खोते जा रहे सरकारी आवास गृह
Tue, 07 May 2019 11:09 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
सतीश जोशी ‘सत्तू’ चंपावत।
सतीश जोशी ‘सत्तू’ चंपावत।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Tue, 07 May 2019 11:09 PM IST
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जिले में कुमाऊं मंडल विकास निगम के बदहाल पर्यटक आवास गृह पर्यटन व्यवसाय को पलीता लगा रहे हैं। पर्यटकों के ठहरने के लिए सरकारी आवास गृहों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। स्टाफ की कमी, फर्नीचर के अभाव और पर्यटकों को लुभाने वाली योजनाओं के न होने से निगम के आवास गृह अपनी अहमियत खो रहे हैं। आवास गृहों में सुधार लाने की बजाय इनका निजीकरण किया जा रहा है।
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चंपावत जिले में कुमाऊं मंडल विकास निगम के कुल छह आवासगृह हैं। इनमें से पूर्णागिरि और श्यामलाताल आवास गृह को निजी हाथों को सौंपा जा चुका है।
जबकि चंपावत नगर में स्थित आवास गृह में कर्मचारियों की भारी कमी है। लोहाघाट में 28 बिस्तरों वाले आवास गृह की दशा भी ठीक नहीं है। खेतीखान में भी छह बिस्तरों वाला आवास गृह बना है लेकिन इसका उपयोग कम ही पर्यटक करते हैं। टनकपुर में 56 बिस्तरों वाले आवास गृह की दशा अन्य आवास गृहों के मुकाबले कुछ ठीक-ठाक है। राज्य सरकार की ओर से आवास गृहों की दशा सुधारने के बजाय उनको पब्लिक, प्राइवेट, पाटर्नशिप (पीपीपी) मोड में निजी हाथों में सौंपने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद बावजूद निगम के आवास गृहों को पीपीपी मोड में संचालित करने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा है।
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पर्यटक भी होटलों को देते हैं तवज्जो
चंपावत। जिले के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से रूबरू होने के लिए यहां आने वाले पर्यटक निगम के आवास गृहों के बजाय होटलों में रुकना ज्यादा पसंद करते हैं। जिला मुख्यालय के आवास गृह में एक माह के भीतर 10 से 15 के बीच ही पर्यटक आते हैं।
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राज्य सरकार को कुमाऊं मंडल विकास निगम के आवास गृहों को निजी हाथों में देने के बजाय इनकी दशा सुधारने को स्वयं पहल करनी चाहिए जिससे निगम की आमदनी बढ़ाने के साथ ही पर्यटकों को लुभाया जा सके। -दिनेश गुरुरानी, निगम कर्मचारी महासंघ अध्यक्ष।