{"_id":"f6a165c5ff42a6b55c263179e01d3b57","slug":"the-tea-plantation-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यटन ग्रिड से जोड़े जाएंगे विकसित हो चुके चाय बागान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यटन ग्रिड से जोड़े जाएंगे विकसित हो चुके चाय बागान
सतीश जोशी ‘सत्तू’/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 22 Nov 2015 10:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धार्मिक नगरी के रूप में विख्यात रहे चंपावत की वर्तमान पहचान प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र के रूप में भी होने लगी है। अलग राज्य बनने के बाद से चंपावत क्षेत्र ने ग्रीन लीफ (हरी पत्ती) चाय के उत्पादन में विशिष्ट पहचान बनाने में कामयाबी हासिल की है। राज्य सरकार की ओर से संचालित चाय विकास परियोजना के तहत जिले में दार्जिलिंग और असम की तर्ज पर चाय बागान विकसित किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
अब राज्य सरकार की ओर से जिले में दो सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में विकसित किए जा चुके चाय बागानों को पर्यटन ग्रिड से जोड़ा जाएगा। चाय विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष कुबेर सिंह कठायत के अनुसार इस कार्य के लिए पांच लाख रुपये की टोकन मनी जारी कर दी गई है। जल्द ही जिले में आने वाले पर्यटकों को चाय बागानों का भ्रमण कराया जाएगा।
विज्ञापन
चंपावत की जलवायु दार्जिलिंग और असम क्षेत्र की जलवायु के समान होने से यहां चाय के बागानों का क्षेत्रफल साल-दर-साल बढ़ रहा है। ब्रिटिश हुकूमत के दौर में भी चंपावत में कई स्थानों पर चाय के बागान स्थापित किए गए थे। उस समय यहां की चाय आयातित होकर इंग्लैंड तक जाती थी, लेकिन आजादी मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण की सुविधा नहीं होने से चाय के बागान वीरान होते चले गए। राज्य गठन से पूर्व एकीकृत उत्तर प्रदेश के समय में चंपावत को चाय विकास परियोजना में शामिल किया गया, जिसकी जिम्मेदारी कुमाऊं मंडल विकास निगम को सौंपी गई, जिसके बाद वीरान पड़े चाय बागान को फिर से हरा-भरा करने एवं नए स्थानों पर चाय बागान लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
विज्ञापन
चाय विकास परियोजना के प्रबंधक डेसमंड के मुताबिक वर्तमान में सिलंटाक, क्षीणापानी, मुडियानी, लमाई, चौकी, फूंगर, च्यूराखर्क, भगानामेहरा, खुनाड़ी, कालूखान, गड़कोट, राजपुरा में चाय बागानों से ग्रीन लीफ (हरी पत्ती) का उत्पादन किया जा रहा है।
साल-दर-साल बढ़ रहा चाय का उत्पादन
वर्ष चाय उत्पादन (किलोग्राम)
2009-10 19400
2010-11 28800
2011-12 35000
2012-13 54000
2013-14 77000
2014-15 87430