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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   The hinges bridge without piers

बिना खंभों के टिका है पुल

Tue, 08 Dec 2015 10:23 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Tue, 08 Dec 2015 10:23 PM IST
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मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर एनएच पर स्थित चल्थी गांव महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस छोटे से इलाके को चल्थी पुल बड़ी पहचान देता है। सिर्फ पहचान ही नहीं, एनएच की आवाजाही का सबसे महत्वपूर्ण सेतु भी यहीं है, मगर देश की आजादी के बाद बने इस पुल के संकरा होने से यहां से एक समय में सिर्फ एक ही वाहन गुजर सकता है। एनएच पर स्थित चल्थी में बना यह पुल बगैर किसी खंभों के सहारे खड़ा है। पुल का पूरा लोड उसके ऊपरी (धनुष आकार वाले ढांचे पर) हिस्से पर है।

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लोक निर्माण विभाग के अभियंता अनुपम राय ने बताया कि 1956 में बना चल्थी का पुल अब भी बेहद मजबूत हैं। आरसीसी स्ट्रक्चर पर आधारित यह पुल करीब छह दशक बाद भी पूरे दमखम के साथ खड़ा है। करीब 110 मीटर लंबाई वाला यह पुल बमुश्किल 10 फीट चौड़ा है, जिस कारण इस पुल से एक समय में एक ही वाहन गुजर सकता है। धौलीगंगा जल विद्युत परियोजना की तमाम भारी-भरकम मशीन और दूसरे उपकरण भी इस पुल से गुजरे। तमाम आपदाओं और अतिवृष्टि का बहादुरी से मुकाबला करने वाले इस पुल को निर्माण के बाद कभी मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ी। अलबत्ता एक बार जरूर इसमें रंग-रोगन किया गया।
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आईआईटी के अभियंता ने बनाया था डिजायन
चल्थी के इस खूबसूरत पुल का डिजाइन पहाड़ पर काम करने वाले एक इंजीनियर ने बनाया था। अभियंता अनुपम राय बताते हैं कि लोहाघाट लोनिवि के सहायक अभियंता पीएन मिश्रा ने इस डिजायन को बनाने के साथ इसका निर्माण कराया था। उस वक्त लोनिवि का लोहाघाट कार्यालय बरेली डिवीजन के अंतर्गत आता था। आईआईटी से इंजीनियरिंग पढ़े मिश्रा बाद में मुख्य अभियंता से रिटायर हुए। उनके इस डिजायन को लोनिवि के लखनऊ स्थित मुख्यालय में सहेजा गया है।
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लटका है चल्थी का दूसरा पुल
चल्थी पुल से एक ही वाहन गुजरने के चलते अधिक चौड़ाई वाले 144 मीटर लंबे पुल का निर्माण प्रस्तावित किया गया था। काम शुरू भी हुआ और बेसमेंट का काम हुआ ही था कि यह पुल अधर में लटक गया है। टनकपुर के एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि इस पुल पर सीमा सड़क संगठन और काम कराने वाले ठेकेदार के बीच विवाद हो गया था, जिस कारण यह मामला कोर्ट में है। और कई वर्षों से काम भी रुका है।


मैदान-पहाड़ को जोड़ रहा पुल
चल्थी क्षेत्र के निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह का कहना है कि चल्थी पुल ने न केवल सामरिक महत्व के इस हाइवे के जरिए मैदान और पहाड़ को जोड़ा, बल्कि इलाके को भी पहचान दी है। अलबत्ता कम चौड़ाई के चलते दूसरा पुल तेजी से बनाया जाना आवश्यक है।

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