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चाय की खुशबू से महकेगा दिगालीचौड़ पौधशाला
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लोहाघाट के दूरस्थ दिगालीचौड़ में चाय बागान में चाय के पौधे लगाते लोग।
- फोटो : LOHAGHAT
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लोहाघाट (चंपावत)। दिगालीचौड़ की पौधशाला (नर्सरी) जल्द ही चाय की खुशबू से महकेगा। इस पौधशाला के 50 प्रतिशत हिस्से में चाय के बागान लगाए जाएंगे। इसके लिए चाय की पौध लगाना शुरू कर दिया गया है।
जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि शासन के निर्देश के बाद कुछ समय पहले उद्यान विभाग की ओर से दिगालीचौड़ पौधशाला की करीब 8.77 हेक्टेयर में से 4.67 हेक्टेयर जमीन चाय बागान लगाने के लिए चाय विकास बोर्ड को दी गई है।
पौधशाला का यह हिस्सा बंजर था, जबकि शेष 4.10 हेक्टेयर जमीन पर पौधशाला ही रहेगा। अब बाकायदा चाय बोर्ड ने यहां चाय के पौध लगाना शुरू कर दिया है। इस काम में 25 महिलाएं लगी हैं। चाय के पौध लगाने का का काम दो माह में पूरा कर लिया जाएगा।
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दिगालीचौड़ से पहले चंपावत जिले के पहाड़ी हिस्सों में 232.20 हेक्टेयर में चाय बागान हैं। इसमें काम कर रहे 454 मजदूर हर साल औसतन 47 हजार किलो चाय का उत्पादन करते हैं। यहां की चाय कोलकाता में चाय बोर्ड में तो नीलामी में हिस्सा लेती ही है, साथ ही 2020 में यहां की चार यूएसए के यंग माउंटेन टी संस्था ने भी खरीदी थी।
दो माह में चाय के 70 हजार पौध लगेंगे
लोहाघाट (चंपावत)। चाय विकास बोर्ड के सुपरवाइजर जीवन रावत का कहना है कि दिगालीचौड़ में 4.67 हेक्टेयर में 70 हजार चाय के पौधे लगाए जा रहे हैं। दो महीने में बागान में चाय पौधे रोप लिए जाएंगे। तीन साल से पौधों में से चायपत्ती तोड़ना शुरू हो जाता है। यहां की चाय में किसी भी तरह का रासायनिक उपयोग नहीं होता है। ये चाय पूरी तरह से जैविक चाय की खेती की जाती है।
4.10 हेक्टेयर पौधशाला में लगाए जा रहे हैं आड़ू, अखरोट की पौध
लोहाघाट (चंपावत)। चंपावत जिले में उद्यान विभाग के छह राजकीय पौधालय मुड़ियानी, चंपावत, गोशनी, खतेड़ा, पाटन, दिगालीचौड़ में हैं। 33 हेक्टेयर में फैली जिले की छह नर्सरियों में से तीन चंपावत, मुड़ियानी, पाटन में अखरोट के पौधों की नर्सरी बनाने का प्रस्ताव है। दिगालीचौड़ पौधशाला के पास शेष बची 4.10 हेक्टेयर भूमि में पौधशाला, बगीचा तैयार किया गया है। इसमें आड़ू, अखरोट, नींबू प्रजाति के पौध तैयार की जा रही है।
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जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि शासन के निर्देश के बाद कुछ समय पहले उद्यान विभाग की ओर से दिगालीचौड़ पौधशाला की करीब 8.77 हेक्टेयर में से 4.67 हेक्टेयर जमीन चाय बागान लगाने के लिए चाय विकास बोर्ड को दी गई है।
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पौधशाला का यह हिस्सा बंजर था, जबकि शेष 4.10 हेक्टेयर जमीन पर पौधशाला ही रहेगा। अब बाकायदा चाय बोर्ड ने यहां चाय के पौध लगाना शुरू कर दिया है। इस काम में 25 महिलाएं लगी हैं। चाय के पौध लगाने का का काम दो माह में पूरा कर लिया जाएगा।
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दिगालीचौड़ से पहले चंपावत जिले के पहाड़ी हिस्सों में 232.20 हेक्टेयर में चाय बागान हैं। इसमें काम कर रहे 454 मजदूर हर साल औसतन 47 हजार किलो चाय का उत्पादन करते हैं। यहां की चाय कोलकाता में चाय बोर्ड में तो नीलामी में हिस्सा लेती ही है, साथ ही 2020 में यहां की चार यूएसए के यंग माउंटेन टी संस्था ने भी खरीदी थी।
दो माह में चाय के 70 हजार पौध लगेंगे
लोहाघाट (चंपावत)। चाय विकास बोर्ड के सुपरवाइजर जीवन रावत का कहना है कि दिगालीचौड़ में 4.67 हेक्टेयर में 70 हजार चाय के पौधे लगाए जा रहे हैं। दो महीने में बागान में चाय पौधे रोप लिए जाएंगे। तीन साल से पौधों में से चायपत्ती तोड़ना शुरू हो जाता है। यहां की चाय में किसी भी तरह का रासायनिक उपयोग नहीं होता है। ये चाय पूरी तरह से जैविक चाय की खेती की जाती है।
4.10 हेक्टेयर पौधशाला में लगाए जा रहे हैं आड़ू, अखरोट की पौध
लोहाघाट (चंपावत)। चंपावत जिले में उद्यान विभाग के छह राजकीय पौधालय मुड़ियानी, चंपावत, गोशनी, खतेड़ा, पाटन, दिगालीचौड़ में हैं। 33 हेक्टेयर में फैली जिले की छह नर्सरियों में से तीन चंपावत, मुड़ियानी, पाटन में अखरोट के पौधों की नर्सरी बनाने का प्रस्ताव है। दिगालीचौड़ पौधशाला के पास शेष बची 4.10 हेक्टेयर भूमि में पौधशाला, बगीचा तैयार किया गया है। इसमें आड़ू, अखरोट, नींबू प्रजाति के पौध तैयार की जा रही है।