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टांण राजकीय हाइस्कूल में नहीं है शौचालय
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Sun, 06 Aug 2017 10:51 PM IST
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लधिया घाटी के स्कूल का क्षतिग्रस्त शौचालय भवन।
- फोटो : amar ujala
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पहले शौचालय-फिर देवालय का नारा वर्षों से गूंजता रहा। मगर इस जिले में विद्या के कई मंदिर शौचालय के लिए तरस गए हैं। पाटी विकासखंड के टांण राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक भी शौचालय नहीं है। इस स्कूल के छात्र-छात्राओं से लेकर शिक्षक तक हर कोई शौच या लघुशंका के लिए स्कूल से लगे जंगल में जाने को मजबूर हैं।
टांण राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की तस्वीर स्वच्छ भारत अभियान के नारे की पोल खोल रही है। अक्तूबर 2014 से शुरू स्वच्छ भारत अभियान के तहत चंपावत जिले में 45 हजार से अधिक शौचालय बन चुके हैं। जिले को पिछले साल 9 नवंबर को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया था। लेकिन अभी भी कई स्कूल ऐसे हैं, जहां शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है।
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15 जुलाई को राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर में शिफ्ट किया गया। दोनों स्कूलों की कुल मिलाकर 69 की छात्र संख्या है। मगर नए विद्यालय परिसर में एक भी शौचालय या मूत्रालय नहीं है। यहां की छात्राओं तक को इसके लिए स्कूल परिसर से बाहर जंगल में जाना पड़ता है। छात्राएं और उनके अभिभावक इस असुविधा के साथ असुरक्षा के अंदेशे से भी चिंचित हैं। भोला दत्त गड़कोटी सहित यहां के अभिभावकों का कहना है कि कई बार विद्यालय में शौचालय के निर्माण को लेकर आग्रह किया जाता रहा है, लेकिन अब तक इन्हें बनाया नहीं जा सका। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि यहां काफी पुराना शौचालय था। जो जीर्णशीर्ण होने के बाद कुछ वर्ष पूर्व टूट चुका है। नए शौचालय के निर्माण के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया था। लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी है।
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टांण राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक भी शौचालय नहीं है। पिछले सप्ताह यहां का मुआयना कर विद्यालय के आधारभूत ढांचे सहित अन्य गतिविधियों का जायजा लिया गया था। निरीक्षण रिपोर्ट में शौचालय की जरूरत को इंगित किया गया है। जल्द से जल्द इस कमी को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
उदय प्रताप मिश्र
खंड शिक्षाधिकारी, पाटी।
कमियों के चलते 43 स्कूलों के शौचालय बेकाम के
चंपावत जिले में 43 स्कूल ऐसे हैं जिनमें शौचालय तो बने हैं लेकिन इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। इन स्कूलों में पेयजल सुविधा का न होना और शौचालयों के दरवाजे का टूटा होना इसका मुख्य कारण बना हुआ है। विभाग के अनुसार पेयजल सुविधा न होने के कारण इनकी सफाई करना संभव नहीं हो रहा है। जिसके कारण कारण इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
चंपावत जिले में पेयजल सुविधा से वंचित 43 स्कूल
राजकीय प्राथमिक विद्यालय रैघांव, चौड़ी, कालोनी, चांचड़ी, चूलागांव, पांचपीपल, चमरोली, मथियाबांज, अमगड़ी, निगाली, खर्ककार्की, कारी, रियासी, लमकवां, थपयिलाखेड़ा, चौड़ी, सीम, टमटकांडे, नई बलाई, चमदेवल, बोयल, बलचौड़ा, कर्णकरायत, मानाढुंगा, सिब्यौली, डसियाचामी, जनकांडे, पोखरी, बरूनारी, कुकड़ौनी, बड़ेत, मछियाड़, तोला, मंगललेख, कनवाड़, ढरोज, सिल्योड़ीगूंठ, बरूसखोला, सिमली, खायाछीना और उच्चतर प्राथमिक विद्यालय पन्थ्यूड़ा, निडिल, विल्देधार।