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75 किमी दूर से हो रही अकेले स्टेडियम की निगरानी
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टनकपुर स्टेडियम में बना वॉलीबाल कोर्ट।
- फोटो : CHAMPAWAT
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इन दिनों खेल महाकुंभ के तहत जिले में खेल गतिविधियां हो रही हैं लेकिन जिले के इकलौते स्टेडियम के हाल इस कदर खराब हैं कि बीते दस दिन से स्टेडियम की देखरेख के लिए न विभागीय अधिकारी है और न ही कोई कर्मी।
75 किमी दूर चंपावत से टनकपुर स्टेडियम की खेल गतिविधियां और बॉक्सिंग हॉस्टल को मॉनिटर किया जा रहा है। मुक्केबाजी के 17 छात्र इस हॉस्टल में हैं लेकिन हॉस्टल में न पूर्णकालिक वार्डन है और न ही पूर्णकालिक कोच।
टनकपुर स्टेडियम में हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, मुक्केबाजी, वॉलीबाल, ताइक्वांडो और बास्केटबॉल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संविदा प्रशिक्षक इन खेलों की बारीकियां सिखा रहे हैं लेकिन उप जिला क्रीड़ाधिकारी और बाक्सिंग कोच जेएस मेहता के रिटायर होने के बाद यहां कोई विभागीय अधिकारी नहीं है।
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इससे विभागीय निगरानी पर असर पड़ रहा है। विभाग की ओर से एकमात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मी महिला वहां पर है। इस वजह से खेल विभाग की भूमिका भी सिकुड़ गई है। टनकपुर स्टेडियम का विभागीय नियंत्रण भी कम हो गया है। खेल गतिविधियों पर चंपावत से नजर रखने की बात कही जा रही है।
हॉस्टल की क्षमता 20 की, रह रहे 17
चंपावत। 20 छात्रों की क्षमता वाले बॉक्सिंग हॉस्टल में इस वक्त कुल 17 छात्र रह रहे हैं। ये छात्र टनकपुर के विभिन्न स्कूलों में पढ़ाई करने के साथ ही मुक्केबाजी का प्रशिक्षण ले रहे हैं लेकिन पहली दिसंबर से पूर्णकालिक प्रशिक्षक नहीं है।
फिलहाल संविदा कोच रेखा पांडेय से काम चलाया जा रहा है। हल्द्वानी के शुभम कुमार और अल्मोड़ा के अमित रैंसवाल बताते हैं कि उप क्रीड़ाधिकारी के रिटायरमेंट के बाद विभाग ने अस्थायी तौर पर व्यवस्थाएं की हैं जिससे उन्हें खास परेशानी नहीं है। अस्थायी वार्डन सूरज पांडेय व्यवस्था को सुचारु करने का प्रयास कर रहे हैं।
टनकपुर के उप जिला क्रीड़ाधिकारी और मुक्केबाजी के बाक्सिंग प्रशिक्षक जेएस मेहता नवंबर में रिटायर हो गए हैं। इस वजह से स्टेडियम में फिलहाल विभागीय अधिकारी तैनात नहीं है। संविदा प्रशिक्षकों के जरिए खेल गतिविधियां जारी हैं।
साथ ही चंपावत से स्टेडियम पर नजर रखने के अलावा हर सप्ताह या तो मैं स्वयं या चंपावत के उप जिला क्रीड़ाधिकारी को वहां मुआयने के लिए भेजता हूं। साथ ही विभागीय नियंत्रण किया जा रहा है। आरएस धामी, जिला क्रीड़ाधिकारी चंपावत।
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75 किमी दूर चंपावत से टनकपुर स्टेडियम की खेल गतिविधियां और बॉक्सिंग हॉस्टल को मॉनिटर किया जा रहा है। मुक्केबाजी के 17 छात्र इस हॉस्टल में हैं लेकिन हॉस्टल में न पूर्णकालिक वार्डन है और न ही पूर्णकालिक कोच।
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टनकपुर स्टेडियम में हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, मुक्केबाजी, वॉलीबाल, ताइक्वांडो और बास्केटबॉल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संविदा प्रशिक्षक इन खेलों की बारीकियां सिखा रहे हैं लेकिन उप जिला क्रीड़ाधिकारी और बाक्सिंग कोच जेएस मेहता के रिटायर होने के बाद यहां कोई विभागीय अधिकारी नहीं है।
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इससे विभागीय निगरानी पर असर पड़ रहा है। विभाग की ओर से एकमात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मी महिला वहां पर है। इस वजह से खेल विभाग की भूमिका भी सिकुड़ गई है। टनकपुर स्टेडियम का विभागीय नियंत्रण भी कम हो गया है। खेल गतिविधियों पर चंपावत से नजर रखने की बात कही जा रही है।
हॉस्टल की क्षमता 20 की, रह रहे 17
चंपावत। 20 छात्रों की क्षमता वाले बॉक्सिंग हॉस्टल में इस वक्त कुल 17 छात्र रह रहे हैं। ये छात्र टनकपुर के विभिन्न स्कूलों में पढ़ाई करने के साथ ही मुक्केबाजी का प्रशिक्षण ले रहे हैं लेकिन पहली दिसंबर से पूर्णकालिक प्रशिक्षक नहीं है।
फिलहाल संविदा कोच रेखा पांडेय से काम चलाया जा रहा है। हल्द्वानी के शुभम कुमार और अल्मोड़ा के अमित रैंसवाल बताते हैं कि उप क्रीड़ाधिकारी के रिटायरमेंट के बाद विभाग ने अस्थायी तौर पर व्यवस्थाएं की हैं जिससे उन्हें खास परेशानी नहीं है। अस्थायी वार्डन सूरज पांडेय व्यवस्था को सुचारु करने का प्रयास कर रहे हैं।
टनकपुर के उप जिला क्रीड़ाधिकारी और मुक्केबाजी के बाक्सिंग प्रशिक्षक जेएस मेहता नवंबर में रिटायर हो गए हैं। इस वजह से स्टेडियम में फिलहाल विभागीय अधिकारी तैनात नहीं है। संविदा प्रशिक्षकों के जरिए खेल गतिविधियां जारी हैं।
साथ ही चंपावत से स्टेडियम पर नजर रखने के अलावा हर सप्ताह या तो मैं स्वयं या चंपावत के उप जिला क्रीड़ाधिकारी को वहां मुआयने के लिए भेजता हूं। साथ ही विभागीय नियंत्रण किया जा रहा है। आरएस धामी, जिला क्रीड़ाधिकारी चंपावत।