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तल्ली लड़ी राजकीय प्राथमिक स्कूल में लटके ताले
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Tue, 18 Jul 2017 11:26 PM IST
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काकड़ पम्दा, ल्वार्की और सुंदरचौड़ राजकीय प्राथमिक विद्यालय के बाद अब तल्ली लड़ी में भी छात्र न होने से ताले लटक गए हैं। इन स्कूलों ने कोई उपलब्धि हासिल नहीं की है। इस तरह इस सत्र में चार राजकीय प्राइमरी स्कूल और दो जूनियर हाइस्कूलों में ताले लटक चुके हैं।
पाटी विकासखंड के तल्ली लड़ी राजकीय प्राथमिक विद्यालय में एक छात्र था और इस छात्र ने भी अपना नाम कटाकर पास के स्कूल में दाखिला ले लिया है। यहां के विद्यालय के शिक्षक ने अन्य जगह संबद्ध करने के लिए आवेदन किया है। यहां तैनात शिक्षक को शिक्षक विहीन स्कूल से संबद्ध किया जाएगा।
जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) सत्यनारायण ने बताया कि इस छात्र के नाम कटाने के बाद इस गांव में एक भी छात्र स्कूल जाने की उम्र का नहीं है। इसी के साथ अब जिले में अब 95 राजकीय जूनियर हाइस्कूल और 500 प्राथमिक स्कूल बच गए हैं।
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इस शिक्षा सत्र में बंद हुए स्कूल
प्राथमिक विद्यालय : काकड़ पम्दा, ल्वार्की, सुंदरचौड़, तल्ली लड़ी।
जूनियर हाइस्कूल : मचकुड़ी और भोकड़ा।
सुविधाएं भी छात्रों को नहीं लुभा पा रहीं
सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को कई सुविधाएं दी जाती हैं। पढ़ाई ही निशुल्क नहीं है, बल्कि मध्यान्ह भोजन योजना, निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, निशुल्क यूनिफार्म, छात्रवृत्ति सहित कई सुविधाएं छात्र-छात्राओं को मिलती हैं, इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाना तो दूर, स्कूलों को खोले रखना तक कठिन हो रहा है।
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पाटी विकासखंड के तल्ली लड़ी राजकीय प्राथमिक विद्यालय में एक छात्र था और इस छात्र ने भी अपना नाम कटाकर पास के स्कूल में दाखिला ले लिया है। यहां के विद्यालय के शिक्षक ने अन्य जगह संबद्ध करने के लिए आवेदन किया है। यहां तैनात शिक्षक को शिक्षक विहीन स्कूल से संबद्ध किया जाएगा।
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जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) सत्यनारायण ने बताया कि इस छात्र के नाम कटाने के बाद इस गांव में एक भी छात्र स्कूल जाने की उम्र का नहीं है। इसी के साथ अब जिले में अब 95 राजकीय जूनियर हाइस्कूल और 500 प्राथमिक स्कूल बच गए हैं।
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इस शिक्षा सत्र में बंद हुए स्कूल
प्राथमिक विद्यालय : काकड़ पम्दा, ल्वार्की, सुंदरचौड़, तल्ली लड़ी।
जूनियर हाइस्कूल : मचकुड़ी और भोकड़ा।
सुविधाएं भी छात्रों को नहीं लुभा पा रहीं
सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को कई सुविधाएं दी जाती हैं। पढ़ाई ही निशुल्क नहीं है, बल्कि मध्यान्ह भोजन योजना, निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, निशुल्क यूनिफार्म, छात्रवृत्ति सहित कई सुविधाएं छात्र-छात्राओं को मिलती हैं, इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाना तो दूर, स्कूलों को खोले रखना तक कठिन हो रहा है।