{"_id":"57acaea54f1c1b8e34ee5664","slug":"surprise-inspections-found-numerous-flaws-in-the-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"औचक निरीक्षण में अस्पताल में मिली कई खामियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
औचक निरीक्षण में अस्पताल में मिली कई खामियां
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Thu, 11 Aug 2016 10:28 PM IST
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पीपीपी मोड में संचालित लोहाघाट सीएचसी में अभिलेखों का निरीक्षण करती स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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पीपीपी मोड के तहत संचालित सीएचसी का चिकित्सा टीम ने औचक निरीक्षण किया। जिसमें तमाम खामियां पाई गई। सीएमओ के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सीएचसी का औचक निरीक्षण कर अस्पताल की अव्यवस्थाओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। साथ ही जांच टीम ने अस्पताल के अभिलेखों को अपने कब्जे में ले लिया है।
निरीक्षण के दौरान किसी भी डाक्टर तथा पैरा मेडिकल स्टाफ के पास पांच साल का अनुभव तक नहीं मिला। जबकि मानकों के अनुसार पांच साल का अनुभव होने के बाद ही डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती का प्रावधान है। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में पांच विशेषज्ञ डॉक्टर तथा दो ईएमओ मौजूद मिले। अस्पताल में व्याप्त गंदगी को देखकर प्रबंधक को कड़ी फटकार लगाई।
बृहस्पतिवार को एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत, संयुक्त निदेशक डॉ. आरपी खंडूरी, डॉ. उदय शंकर तथा डॉ. सुषमा नेगी की संयुक्त टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। टीम के अस्पताल पहुंचने की भनक लगते ही अस्पताल कर्मियों में हड़कंप मच गया।
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प्लास्टर कक्ष में जाने के बाद फैली गंदगी और स्टोर किए पानी को लेकर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने तुरंत व्यवस्थाएं ठीक करने के निर्देश दिए। हड्डी रोग विशेषज्ञ के कक्ष में डाक्टर के न होने के कारण वहां पर बाल रोग विशेषज्ञ रोगियों की जांच कर रहा था। अस्पताल के किसी भी कक्ष में राष्ट्रीय कार्यक्रमों के कोई प्रचार साहित्य न लगा होने पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। अस्पताल में बॉयो वेस्ट का कोई इंतजाम नहीं पाया गया। अस्पताल में मेडिकल वेस्टेज के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है तथा यूजर चार्जेज का कोई हिसाब नहीं मिला। जांच टीम ने रोगियों से भी जानकारी प्राप्त की और पूरे डेली रजिस्टरों की जांच की।
निरीक्षण में 12 की जगह मिले पांच डाक्टर
लोहाघाट। निरीक्षण के दौरान सीएचसी में 12 डाक्टरों के स्थान पर मात्र पांच विशेषज्ञ डाक्टर तथा दो ईएमओ पाए गए। जबकि नेत्र सर्जन, अस्थि रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, निश्चेतक आदि चिकित्सक नहीं पाए गए। उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में अधिकांश डाक्टरों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। एक्सरे टेक्नीशियन की अनुपस्थिति में पर्यावरण मित्र एक्सरे करता है। मशीन का उत्तराखंड प्रदूषण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन नहीं पाया गया है। जांच टीम के पूछने पर प्रबंधक ने बताया कि अग्निशमन यंत्र को चलाने के बारे में किसी को ज्ञान नहीं है।
नहीं दिखा पाए निश्चेतक का ज्वाइनिंग लेटर
लोहाघाट। अस्पताल प्रबंधन की ओर से रजिस्टरों में निश्चेतक की ज्वाइनिंग दिखाने के बाद उसे छुट्टी में दर्शाया गया था। जांच टीम की ओर से निश्चेतक का ज्वाइनिंग लेटर दिखाने की बात कहने पर प्रबंधक अंत तक ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिखा पाए।
पैथोलॉजी लैब में पाई गई अनियमितताएं
लोहाघाट। जांच के दौरान पैथोलॉजी लैब में भारी अनियमितताएं पाई गई। मुख्य परामर्शदाता पैथोलॉजी डॉ. सुषमा नेे निरीक्षण में पाया कि एक ही कक्ष में एचआईवी, डाट्स तथा रक्त संबंधी सभी जांचें हो रही हैं। उनका कहना था कि एचआईवी तथा डाट्स गंभीर बीमारियां हैं, इनकी जांच के लिए अलग अलग कक्ष निर्धारित होने चाहिए। लेकिन एक ही कक्ष में एक साथ सभी प्रकार की जांचें होने से संक्रमण फैलने की संभावनाएं होती हैं।
नहीं पाए गए मानकों के अनुरूप डाक्टर
लोहाघाट। डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि निरीक्षण के दौरान मानकों के अनुसार डाक्टर नहीं पाए गए। कुछ डाक्टर तो 2016 के पास आउट पाए गए। उनका कहना था कि अनुबंध के अनुसार पांच वर्ष का अनुभव प्राप्त करने के बाद पीपीपी मोड में संचालित अस्पताल में डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की जानी थी। लेकिन किसी के पास भी पांच वर्ष का अनुभव नहीं है। खंडूरी का कहना है कि अस्पताल के पूरे स्टाफ के दस्तावेजों को सील कर अपने साथ ले गए हैं।
सीसीटीवी बंद मिले
लोहाघाट। अनुबंध के अनुसार अस्पताल में डाक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ तथा अन्य कर्मियों की उपस्थिति के लिए बायोमैट्रिक मशीन लगाई जानी थी। लेकिन प्रबंधन की ओर से ढाई वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद भी अभी तक अस्पताल में बायोमैट्रिक मशीन नहीं लगाई गई है। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे भी बंद पड़े हैं।
पीपीपी मोड हटने तक जारी रहेगा आंदोलन
सीएचसी को पीपीपी मोड से हटाने तथा ट्रामा सेंटर चालू करने की मांग को लेकर व्यापार संघ का धरना प्रदर्शन 10वें दिन भी जारी रहा। तहसील परिसर में चल रहे धरना प्रदर्शन को बृहस्पतिवार को भी बड़ी संख्या में लोगों ने अपना समर्थन दिया तथा पाटन पाटनी के लोग धरने में बैठे। व्यापार संघ अध्यक्ष भैरव राय, चेयरमैन लता वर्मा, रीता गहतोड़ी, सचिन जोशी आदि का कहना था कि जब तक सीएचसी को पीपीपी मोड से नहीं हटाया जाता और ट्रामा सेंटर चालू नहीं किया जाता है तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरना देने वालों में चंद्र सिंह, खुशाल सिंह, लक्ष्मण सिंह, कुंवर सिंह, प्रकाश बोहरा, रमेश पाटनी, धर्मानंद पांडेय आदि थे। इस जनांदोलन को लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है। चंदन सिंह बोहरा, जोध सिंह ढेेक, अंकित देव, जगदीश बोहरा, उमेश जोशी, रमेश गड़कोटी, आशीष राय आदि ने प्रदर्शन को समर्थन दिया। बाद में आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम के पेशकार को सौंपा। जिसमें शीघ्र सीएचसी को पीपीपी मोड से हटाकर सरकारी तौर से चलाने तथा ट्रामा सेंटर चालू करने की मांग की गई।
निरीक्षण के दौरान किसी भी डाक्टर तथा पैरा मेडिकल स्टाफ के पास पांच साल का अनुभव तक नहीं मिला। जबकि मानकों के अनुसार पांच साल का अनुभव होने के बाद ही डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती का प्रावधान है। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में पांच विशेषज्ञ डॉक्टर तथा दो ईएमओ मौजूद मिले। अस्पताल में व्याप्त गंदगी को देखकर प्रबंधक को कड़ी फटकार लगाई।
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बृहस्पतिवार को एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत, संयुक्त निदेशक डॉ. आरपी खंडूरी, डॉ. उदय शंकर तथा डॉ. सुषमा नेगी की संयुक्त टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। टीम के अस्पताल पहुंचने की भनक लगते ही अस्पताल कर्मियों में हड़कंप मच गया।
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प्लास्टर कक्ष में जाने के बाद फैली गंदगी और स्टोर किए पानी को लेकर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने तुरंत व्यवस्थाएं ठीक करने के निर्देश दिए। हड्डी रोग विशेषज्ञ के कक्ष में डाक्टर के न होने के कारण वहां पर बाल रोग विशेषज्ञ रोगियों की जांच कर रहा था। अस्पताल के किसी भी कक्ष में राष्ट्रीय कार्यक्रमों के कोई प्रचार साहित्य न लगा होने पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। अस्पताल में बॉयो वेस्ट का कोई इंतजाम नहीं पाया गया। अस्पताल में मेडिकल वेस्टेज के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है तथा यूजर चार्जेज का कोई हिसाब नहीं मिला। जांच टीम ने रोगियों से भी जानकारी प्राप्त की और पूरे डेली रजिस्टरों की जांच की।
निरीक्षण में 12 की जगह मिले पांच डाक्टर
लोहाघाट। निरीक्षण के दौरान सीएचसी में 12 डाक्टरों के स्थान पर मात्र पांच विशेषज्ञ डाक्टर तथा दो ईएमओ पाए गए। जबकि नेत्र सर्जन, अस्थि रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, निश्चेतक आदि चिकित्सक नहीं पाए गए। उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में अधिकांश डाक्टरों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। एक्सरे टेक्नीशियन की अनुपस्थिति में पर्यावरण मित्र एक्सरे करता है। मशीन का उत्तराखंड प्रदूषण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन नहीं पाया गया है। जांच टीम के पूछने पर प्रबंधक ने बताया कि अग्निशमन यंत्र को चलाने के बारे में किसी को ज्ञान नहीं है।
नहीं दिखा पाए निश्चेतक का ज्वाइनिंग लेटर
लोहाघाट। अस्पताल प्रबंधन की ओर से रजिस्टरों में निश्चेतक की ज्वाइनिंग दिखाने के बाद उसे छुट्टी में दर्शाया गया था। जांच टीम की ओर से निश्चेतक का ज्वाइनिंग लेटर दिखाने की बात कहने पर प्रबंधक अंत तक ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिखा पाए।
पैथोलॉजी लैब में पाई गई अनियमितताएं
लोहाघाट। जांच के दौरान पैथोलॉजी लैब में भारी अनियमितताएं पाई गई। मुख्य परामर्शदाता पैथोलॉजी डॉ. सुषमा नेे निरीक्षण में पाया कि एक ही कक्ष में एचआईवी, डाट्स तथा रक्त संबंधी सभी जांचें हो रही हैं। उनका कहना था कि एचआईवी तथा डाट्स गंभीर बीमारियां हैं, इनकी जांच के लिए अलग अलग कक्ष निर्धारित होने चाहिए। लेकिन एक ही कक्ष में एक साथ सभी प्रकार की जांचें होने से संक्रमण फैलने की संभावनाएं होती हैं।
नहीं पाए गए मानकों के अनुरूप डाक्टर
लोहाघाट। डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि निरीक्षण के दौरान मानकों के अनुसार डाक्टर नहीं पाए गए। कुछ डाक्टर तो 2016 के पास आउट पाए गए। उनका कहना था कि अनुबंध के अनुसार पांच वर्ष का अनुभव प्राप्त करने के बाद पीपीपी मोड में संचालित अस्पताल में डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की जानी थी। लेकिन किसी के पास भी पांच वर्ष का अनुभव नहीं है। खंडूरी का कहना है कि अस्पताल के पूरे स्टाफ के दस्तावेजों को सील कर अपने साथ ले गए हैं।
सीसीटीवी बंद मिले
लोहाघाट। अनुबंध के अनुसार अस्पताल में डाक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ तथा अन्य कर्मियों की उपस्थिति के लिए बायोमैट्रिक मशीन लगाई जानी थी। लेकिन प्रबंधन की ओर से ढाई वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद भी अभी तक अस्पताल में बायोमैट्रिक मशीन नहीं लगाई गई है। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे भी बंद पड़े हैं।
पीपीपी मोड हटने तक जारी रहेगा आंदोलन
सीएचसी को पीपीपी मोड से हटाने तथा ट्रामा सेंटर चालू करने की मांग को लेकर व्यापार संघ का धरना प्रदर्शन 10वें दिन भी जारी रहा। तहसील परिसर में चल रहे धरना प्रदर्शन को बृहस्पतिवार को भी बड़ी संख्या में लोगों ने अपना समर्थन दिया तथा पाटन पाटनी के लोग धरने में बैठे। व्यापार संघ अध्यक्ष भैरव राय, चेयरमैन लता वर्मा, रीता गहतोड़ी, सचिन जोशी आदि का कहना था कि जब तक सीएचसी को पीपीपी मोड से नहीं हटाया जाता और ट्रामा सेंटर चालू नहीं किया जाता है तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरना देने वालों में चंद्र सिंह, खुशाल सिंह, लक्ष्मण सिंह, कुंवर सिंह, प्रकाश बोहरा, रमेश पाटनी, धर्मानंद पांडेय आदि थे। इस जनांदोलन को लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है। चंदन सिंह बोहरा, जोध सिंह ढेेक, अंकित देव, जगदीश बोहरा, उमेश जोशी, रमेश गड़कोटी, आशीष राय आदि ने प्रदर्शन को समर्थन दिया। बाद में आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम के पेशकार को सौंपा। जिसमें शीघ्र सीएचसी को पीपीपी मोड से हटाकर सरकारी तौर से चलाने तथा ट्रामा सेंटर चालू करने की मांग की गई।