{"_id":"5b54bcc84f1c1bf6548b46d5","slug":"students-of-the-braun-studying-between-danger","type":"story","status":"publish","title_hn":"खतरे के बीच पढ़ रहे बजौन के छात्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खतरे के बीच पढ़ रहे बजौन के छात्र
अमर उजाला /ब्यूरो चंपावत।
Updated Sun, 22 Jul 2018 10:50 PM IST
विज्ञापन
बजौन का जीर्णशीर्ण राजकीय प्राथमिक विद्यालय का भवन। अ
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चंपावत। चंपावत विकासखंड के बजौन गांव का राजकीय प्राथमिक विद्यालय पठन-पाठन से ज्यादा बारिश में खतरे की आहट लिए है। स्थिति यह है कि बारिश में स्कूल की छुट्टी करना शिक्षकों के लिए मजबूरी बन जाता है। इसकी वजह इस स्कूल भवन की जर्जर हालत है। दीवार में मोटी दरारों से लेकर कई जगह टूट-फूट हो रही है।
1959 में बने बजौन के स्कूल भवन की हालत डराने वाली है। दीवार में दरार से लेकर क्षतिग्रस्त दरवाजे छात्र-छात्राओं को डराते हैं। वहीं तेज बारिश में टिन की छत से पानी टपकने से रही-सही कसर भी निकल जाती है। प्रधानाध्यापक रंजीत राणा का कहना है कि भवन की खस्ताहाल के चलते तेज बारिश में यहां पढ़ाई करा पाना मुश्किल है। ऐसे में सुरक्षा के नजरिए से छात्रों को घर भेजना मजबूरी होता है।
कोट
भवन की बदहाली की जानकारी शिक्षा विभाग को अनेकों बार दी जा चुकी है। बाकायदा नए भवन के लिए स्कूल प्रबंधन समिति ने प्रस्ताव भेजा है। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो सका है।
विज्ञापन
भुवन चंद्र,
ग्राम प्रधान, बजौन।
फोटो 22 सीपीटी 01पी
ये हैं चंपावत जिले के जीर्णशीर्ण भवनों वाले 13 प्राथमिक विद्यालय:
डूंगराओड, कोटसारी, खीड़ी, सुनकरी, ककनई, सायली, पोलप, आमनी, हरम, सुंतोला, पल्सो, बजौन व मथेलाछाना।
कोट
प्राथमिक स्तर पर जिले के 13 स्कूल जीर्णशीर्ण हाल में है। इनके पुर्ननिर्माण के प्रस्ताव भेजे गए हैं। धन स्वीकृत होने पर नए भवन बनाए जाएंगे। अलबत्ता प्रधानाध्यापकों को क्षतिग्रस्त कमरों में न बैठाने, छात्रों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी उपाय करने को कहा गया है।
आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
1959 में बने बजौन के स्कूल भवन की हालत डराने वाली है। दीवार में दरार से लेकर क्षतिग्रस्त दरवाजे छात्र-छात्राओं को डराते हैं। वहीं तेज बारिश में टिन की छत से पानी टपकने से रही-सही कसर भी निकल जाती है। प्रधानाध्यापक रंजीत राणा का कहना है कि भवन की खस्ताहाल के चलते तेज बारिश में यहां पढ़ाई करा पाना मुश्किल है। ऐसे में सुरक्षा के नजरिए से छात्रों को घर भेजना मजबूरी होता है।
विज्ञापन
कोट
भवन की बदहाली की जानकारी शिक्षा विभाग को अनेकों बार दी जा चुकी है। बाकायदा नए भवन के लिए स्कूल प्रबंधन समिति ने प्रस्ताव भेजा है। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो सका है।
विज्ञापन
भुवन चंद्र,
ग्राम प्रधान, बजौन।
फोटो 22 सीपीटी 01पी
ये हैं चंपावत जिले के जीर्णशीर्ण भवनों वाले 13 प्राथमिक विद्यालय:
डूंगराओड, कोटसारी, खीड़ी, सुनकरी, ककनई, सायली, पोलप, आमनी, हरम, सुंतोला, पल्सो, बजौन व मथेलाछाना।
कोट
प्राथमिक स्तर पर जिले के 13 स्कूल जीर्णशीर्ण हाल में है। इनके पुर्ननिर्माण के प्रस्ताव भेजे गए हैं। धन स्वीकृत होने पर नए भवन बनाए जाएंगे। अलबत्ता प्रधानाध्यापकों को क्षतिग्रस्त कमरों में न बैठाने, छात्रों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी उपाय करने को कहा गया है।
आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।