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छात्रवृत्ति को तरस रहे छात्र
ब्यूरो /अमर उजाला, चंपावत
Updated Wed, 15 Jul 2015 10:30 PM IST
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समाज कल्याण विभाग की कई योजनाओं का लाभ छात्र-छात्राओं तक नहीं पहुंच रहा है। जिले के कई स्कूलों के छात्रों को वित्त वर्ष बीतने के बावजूद वजीफे की रकम नहीं मिली है। कई बार आवाज उठा चुके अभिभावकों ने फिर से शिक्षा अधिकारी से गुहार लगाई है।
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श्यामलाताल, दियूरी राजकीय इंटर कालेज के अभिभावकों का आरोप है कि 2011 से अनुसूचित, पिछड़े जाति के छात्र-छात्राओं को वजीफे की रकम नहीं मिल सकी है। ग्रामीण रमेश राम, प्रकाश राम, महेश, सोबी राम, हरीश राम, फकीर राम, श्याम राम, पुष्कर राम, भोला राम, सुरेश राम का कहना है कि गरीब परिवार के इन बच्चों को लंबे समय से छात्रवृत्ति नहीं दी गई है। पूछने पर भी विभाग कोई ठीक जानकारी नहीं दे रहा है। इस संबंध में अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भेज तीन साल की छात्रवृत्ति दिलाने की मांग की है। छात्रवृत्ति नहीं मिलने की शिकायत अद्र्ध विधिक स्वैच्छिक स्वयंसेवक (पीएलवी) राजेंद्र प्रसाद भी अलग-अलग मंचों से कई बार उठा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
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खाते में ट्रांसफर की जा रही है रकम
समाज कल्याण विभाग का कहना है कि छात्रवृत्ति की कुछ रकम पोर्टल के जरिए भारत सरकार ने सीधे लाभार्थियों के खातों में डाल दी। पोर्टल की गड़बड़ी से यह रकम काफी छात्रों तक नहीं पहुंच सकी। वंचित रह गए छात्रों के लिए मार्च में विभाग को 20 लाख रुपया मिला। इस रकम को विभाग छात्रों के खाते में डाल रहा है।
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छह हजार छात्र-छात्राएं हैं छात्रवृत्ति के पात्र
जिले में पहली कक्षा से बारहवीं कक्षा तक कुल छह हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति मिलती है। पेंशन की ये रकम अलग-अलग कक्षाओं के हिसाब से 600 रुपये से 2600 रुपये तक है।
छात्रवृत्ति नहीं मिलने की अभिभावकों की ओर से शिकायतें लगातार मिल रही है। यह प्रकरण 13 जुलाई को हुई प्रधानाचार्यों की बैठक में भी उठा। बैठक में मौजूद जिला समाज कल्याण अधिकारी को इस संबंध में अवगत कराया गया है।
आरसी आर्या, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।