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राज्य आंदोलनकारी परिचय पत्र लौटाया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 28 Jan 2016 10:41 PM IST
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राज्य की जंग लड़ने वाले युवा सामाजिक कार्यकर्ता मंदीप सिंह ढेक ने राज्य आंदोलनकारी पहचान पत्र वापस कर दिया है। इसकी वजह अलग राज्य बनने की अवधारणा के जमीन पर नजर नहीं आने की बात कही गई है। उन्होंने बृहस्पतिवार को एक पत्र के साथ राज्य आंदोलनकारी परिचय पत्र जिलाधिकारी दीपेंद्र कुमार चौधरी को लौटाया। डीएम ने पत्र और परिचय पत्र शासन को भेज दिया है। आंदोलनकारियों को रोडवेज बस में निशुल्क यात्रा, चिकित्सा सहित कई तरह की सुविधाएं दी जाती है।
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प्रदेश के हालात से चिंतित मंदीप का कहना है कि राज्य आंदोलन की लड़ाई में राज्य के कई लोग और उनकी भावना जुड़ी थी, मगर 15 साल से अधिक समय होने के बावजूद उत्तराखंड बुनियादी विकास की राह से भटका है। पहाड़ के हिस्से का विकास, उद्योग और रोजगार मैदानी जिलों को मिल रहा है। गैरसैंण में विधानसभा के कुछ सत्र कराने के अलावा प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए कुछ ठोस अब तक किया नहीं गया है। उत्तराखंड के 10 पहाड़ी जिलों की कीमत पर अधिकांश बुनियादी सुविधाएं और औद्योगिक विकास महज तीन मैदानी जिलों में हो रहा है।
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जिले में अब तक एक भी रोजगारपक उद्योग नहीं लगा, उल्टे उप्र के दौर की केएमवीएन की रोजिन टरपंटाइन फैक्ट्री बंद हो चुकी है। बेरोजगारी का आंकड़ा भी चार गुने से अधिक बढ़कर 22 हजार पार कर गया है। ब्लड बैंक से लेकर ट्रामा सेंटरों का लोगों के लिए उपयोग नहीं हो पा रहा है। तल्लादेश, गुमदेश सहित नेपाल सीमा से लगे अथवा दूरदराज के अन्य गांवों की जरूरतों को अब तक पूरा नहीं किया जा सका है। गांव का पिछड़ापन हो या पलायन, हालात पहले से बदतर हुए हैं, मगर ग्रामीण विकास के नाम पर पैसे की फिजूलखर्ची कई गुना बढ़ी है। आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने के बजाय सरकारी अस्पताल रेफरल सेंटर में तब्दील हो गए हैं, जबकि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड के अस्पताल भी लोगों के दर्द को दूर करने के बजाय फिजूलखर्ची के अड्डे बने हैं।
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स्कूलों की संख्या के आंकड़े जरूर बढ़े, लेकिन शिक्षक न होने और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं होने से पढ़ाई की स्थिति और खराब हुई है। चंपावत छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके मंदीप ढेक कहते हैं कि उत्तर प्रदेश से अलग होकर पहाड़ी राज्य की मांग केंद्र में आम लोगों की सुनवाई न होना था, लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद भी इस स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आ सका है।