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कमाई के इंतजार में सौर ऊर्जा संयंत्र
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 07 May 2017 10:50 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत।
मकानों की छत पर लगे सौर ऊर्जा संयंत्र अंधेरा तो दूर कर रहे हैं, लेकिन इन संयंत्रों से यहां के लोग आमदनी नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह संयंत्रों में मीटर न लग पाना है। इस कारण न तो उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को बिजली की बिक्री हो पा रही है और न संयंत्र लगाने वालों को मुनाफा मिल पा रहा है।
उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) द्वारा सूर्योदय स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 2016-17 में 32 बीपीएल सहित कुल 107 सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए। इस योजना का मकसद घरों को जगमग करने के साथ ही आमदनी में भी इजाफा करना था। योजना के अंतर्गत 1000 वर्ग मीटर जगह या भवनों की छतों पर चार किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए। 3.50 लाख रुपये की इस योजना में 90 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार ने दिया। इस बिजली को अपने उपयोग के अलावा उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को 25 वर्षों तक बेचने का प्रावधान है। लेकिन इस साल जनवरी में सौर ऊर्जा संयंत्र लगने के बावजूद अभी तक सौर ऊर्जा संयंत्र से उत्पादित बिजली नहीं बेची जा सकी है।
इसकी वजह चार माह से अधिक समय बीतने के बावजूद मीटर नहीं लग पाना है। मीटर नहीं लग पाने से सोर ऊर्जा संयंत्र से होने वाले बिजली के उत्पादन, घर में होने वाली खपत व यूपीसीएल को वितरित की जाने वाले बिजली का हिसाब लगाना संभव नहीं हो पा रहा है। यूपीसीएल के चंपावत डिवीजन के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार का कहना है कि उरेडा को मीटर उपलब्ध कराए गए हैं।
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कोट---
चंपावत जिले में 107 सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा चुके हैं। अभी इन संयंत्रों में मीटर नहीं लग सके हैं। मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इस माह के अंत तक सभी संयंत्रों में मीटर लग जाएंगे। -ओम कुमार, परियोजना अधिकारी, उरेडा, चंपावत।
सौर ऊर्जा संयंत्र खटाई में
सौर ऊर्जा संयंत्र की योजना पिछले वित्त वर्ष में शुरू की गई थी। सूर्योदय स्वरोजगार योजना के अंतर्गत चलने वाली यह योजना अब खटाई में पड़ गई है। इसकी वजह इसके लिए फिलहाल बजट का प्रावधान नहीं करना है। उरेडा के परियोजना अधिकारी ओम कुमार का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2017-18 में योजना के संबंध में अब तक कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
मकानों की छत पर लगे सौर ऊर्जा संयंत्र अंधेरा तो दूर कर रहे हैं, लेकिन इन संयंत्रों से यहां के लोग आमदनी नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह संयंत्रों में मीटर न लग पाना है। इस कारण न तो उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को बिजली की बिक्री हो पा रही है और न संयंत्र लगाने वालों को मुनाफा मिल पा रहा है।
उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) द्वारा सूर्योदय स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 2016-17 में 32 बीपीएल सहित कुल 107 सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए। इस योजना का मकसद घरों को जगमग करने के साथ ही आमदनी में भी इजाफा करना था। योजना के अंतर्गत 1000 वर्ग मीटर जगह या भवनों की छतों पर चार किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए। 3.50 लाख रुपये की इस योजना में 90 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार ने दिया। इस बिजली को अपने उपयोग के अलावा उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को 25 वर्षों तक बेचने का प्रावधान है। लेकिन इस साल जनवरी में सौर ऊर्जा संयंत्र लगने के बावजूद अभी तक सौर ऊर्जा संयंत्र से उत्पादित बिजली नहीं बेची जा सकी है।
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इसकी वजह चार माह से अधिक समय बीतने के बावजूद मीटर नहीं लग पाना है। मीटर नहीं लग पाने से सोर ऊर्जा संयंत्र से होने वाले बिजली के उत्पादन, घर में होने वाली खपत व यूपीसीएल को वितरित की जाने वाले बिजली का हिसाब लगाना संभव नहीं हो पा रहा है। यूपीसीएल के चंपावत डिवीजन के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार का कहना है कि उरेडा को मीटर उपलब्ध कराए गए हैं।
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कोट---
चंपावत जिले में 107 सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा चुके हैं। अभी इन संयंत्रों में मीटर नहीं लग सके हैं। मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इस माह के अंत तक सभी संयंत्रों में मीटर लग जाएंगे। -ओम कुमार, परियोजना अधिकारी, उरेडा, चंपावत।
सौर ऊर्जा संयंत्र खटाई में
सौर ऊर्जा संयंत्र की योजना पिछले वित्त वर्ष में शुरू की गई थी। सूर्योदय स्वरोजगार योजना के अंतर्गत चलने वाली यह योजना अब खटाई में पड़ गई है। इसकी वजह इसके लिए फिलहाल बजट का प्रावधान नहीं करना है। उरेडा के परियोजना अधिकारी ओम कुमार का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2017-18 में योजना के संबंध में अब तक कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।