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तो अब बढ़ती कीमतें नहीं रहा सियासी मुद्दा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 17 Sep 2015 10:50 PM IST
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एक झटके में पेट्रोल के दाम पांच रुपये प्रति लीटर बढ़ गए। इसके चलते बुधवार से शहर में पेट्रोल की कीमत 67 रुपये को पार कर गई है। तेल में लगी इस आग से लोग भले ही झुलस रहे हो, लेकिन कीमतों में आसमान सरीखी उछाल पर सियासत ने हिलोरे नहीं मारी। छोटे-छोटे मसलों पर पुतला दहन करने वाले राजनीतिक दलों द्वारा इस मामले में प्रदर्शन तो दूर, पूरी तरह मौन साध लिया गया।
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प्याज से लेकर दूसरी सब्जी हो या अरहर की दाल से लेकर दूसरी दालें, अब इनकी खरीद करना आम आदमी की वश में नहीं रह गया है। चंपावत में प्याज 60 और अरहर की दाल 130 रुपये प्रति किलो को पार कर गई है और अब पेट्रोल के दाम में 8.31 प्रतिशत (61.95 से बढ़कर 67.10 रुपये प्रति लीटर) की बढ़ोतरी ने लोगों के बीच हाहाकार मचा दिया है। आने वाले समय में जरूरी चीजों के दामों में भी इस वजह से बढ़ोतरी की आहट पैदा हो रही है।
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दाम में उछाल के बावजूद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया बेहद ठंडी रही। कई लोगों को तो कीमतों में इजाफे की सामान्य जानकारी तक नहीं थी और इक्का-दुक्का सियासी दलों के प्रतिनिधियों का कहना था कि उनके प्रदर्शन से तो बढ़े दाम वापस होने से रहे। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे में आम शख्स राजनीतिक दलों से उम्मीद करें भी तो कैसे।
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सांप-सीढ़ी का खेल बनी डीजल की कीमत
मंगलवार को डीजल 47.23 रुपये प्रति लीटर था। बुधवार को ये कीमत 49.30 रुपये हो गई और बृहस्पतिवार सुबह से ये दाम फिर 47.22 रुपये हो गए। डीजल की कीमत नहीं बढ़ने से किसान, वाहन संचालकों और अन्य लोगों को राहत तो मिली, लेकिन डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का ये गणित आम लोगों की समझ से परे हैं।