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स्कूलों में आग से बचाव के इंतजाम नहीं
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 12 May 2016 11:18 PM IST
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जीआईसी चंपावत
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। पहाड़ पर अधिकांश स्कूलों में आग से बचाव के कोई खास इंतजाम नहीं हैं। भगवान न करे किसी स्कूल में कभी कोई अग्निकांड हो, अगर ऐसा होता है तो बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। नए खुले विद्यालयों के लिए इस मद में कोई बजट नहीं आया।
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चंपावत जिले के सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में भी आग से बचाव के प्रबंध नहीं हैं। कुछ प्राइवेट स्कूलों को छोड़ किसी ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट तक नहीं लिया है। जिले में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा को मिलाकर कुल 903 स्कूल हैं। इन स्कूलों में 48 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। लेकिन इनमें से 95 प्रतिशत से अधिक में तो आग के खतरों से बचाव के इंतजाम नहीं हैं।
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रेत और पानी जैसी जरूरी सुविधा भी कुछ ही स्कूलों में है। स्कूलों तक रोड नहीं होना अथवा संकरी सड़क में आपदा के वक्त फायरब्रिगेड के वाहन का न निकल पाना बड़ी चुनौती है। अग्निशमन विभाग का कहना है कि जिले में सिर्फ एक स्कूल ने ही आग से बचाव का प्रमाणपत्र (फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट) लिया है।
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इसके अलावा फायर स्टेशन नहीं होने से चंपावत के स्कूलों में हालात और भी अधिक चिंताजनक है। आग से बचाव के लिए इस शहर को 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट फायर स्टेशन की सेवाएं लेने को मजबूर होना पड़ता है, जिसमें 20 मिनट से अधिक का वक्त बर्बाद होता है।
चंपावत के मुख्य शिक्षाधिकारी नवीन चंद्र पाठक का कहना है कि आग से बचाव को जरूरी कदम उठाने के लिए शासन ने कई बार निर्देश दिए हैं, लेकिन इन निर्देशों को अमलीजामा पहनाने के लिए धन की कमी आड़े आती है। स्कूलों की आगे होने वाली बैठकों में इस पर चर्चा कर बचाव के उपकरण के लिए पहल की जाएगी।
पिथौरागढ़। प्राइवेट विद्यालयों में आग से बचाव के पूरे उपाय हैं। कई विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र लगाने के साथ-साथ परिसर में गमलों में रेत और मिट्टी भी रखी होती है, ताकि आग की घटना होने पर तत्काल काबू पाया जा सके। उच्च शिक्षण संस्थानों में अग्निशमन के यंत्र लगे हैं।
चंपावत। जिले के चार विकासखंडों में कुल 20 स्कूलों को आदर्श विद्यालय का दर्जा दिया गया है, लेकिन इनमें से किसी में भी आग से बचाव के इंतजाम नहीं है। जिला मुख्यालय के जीआईसी से लेकर न माध्यमिक और न बेसिक अथवा जूनियर हाईस्कूल में अग्निशमन उपकरण हैं।
चंपावत। अग्निशमन विभाग का कहना है कि फायर सेफ्टी के लिए एक्सिटिंग्युस, बालू-रेता, पानी, फायर हुक आदि जरूरी है। साथ ही अग्नि सुरक्षा से संबंधित प्रमाणपत्र होना चाहिए, लेकिन अधिकांश स्कूल इस अनिवार्यता को पूरा नहीं करते। इसके लिए स्कूलों को कई बार चेताया भी गया है।