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बारिश आने पर कर दी जाती है स्कूल की छुट्टी

Thu, 25 Aug 2016 10:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Thu, 25 Aug 2016 10:21 PM IST
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School building in ruins
खंडहर बना स्कूल भवन - फोटो : अमर उजाला

चंपावत। तल्लादेश के बरकुम का प्राइमरी स्कूल तीन माह से छतविहीन है। इस स्कूल की छत 29 मई को आंधी-तूफान में उड़ गई थी, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने अब तक छत बनवाने के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की है। छत की मरम्मत न होने से नौनिहालों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बारिश आने पर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है। 

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तल्लादेश का रियासी बमनगांव नेपाल सीमा से सटा है। 29 मई को आंधी-तूफान में इस ग्राम पंचायत के प्राइमरी स्कूल बरकुम में लगी टिन की छत उड़ गई थी। तब से स्कूल की छत नहीं बन सकी, जबकि इस स्कूल में 21 छात्र-छात्राएं पढ़ती हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य कैलाश सिंह का कहना है कि छत न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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ये छात्र खुली छत में पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह, उप प्रधान मधु देवी, जगदीश प्रसाद, बालम सिंह, दानी राम, शीश राम आदि ने डीएम को ज्ञापन भेजकर छत बनवाने की मांग की है। इससे पहले वह विधायक समेत उप शिक्षाधिकारी से भी गुहार लगा चुके हैं। चंपावत ब्लॉक में अंधड़, अतिवृष्टि से बरकुम के अलावा चार अन्य स्कूलों के भवन भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि बनलेख, दियूरी, बकोड़ा, डाबरी के प्राइमरी स्कूल की दीवार, छत आदि टूटी है।
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लोहाघाट (चंपावत)। क्षेत्रीय समस्याओं का निराकरण न होने के चलते बाराकोट ब्लॉक के अंबेडकर गांव कामाज्यूला के लोगों ने विधानसभा चुनावों के बहिष्कार का एलान किया है। बैठक में पूर्व ज्येष्ठ उपप्रमुख प्रह्लाद राम का कहना था कि कामाज्यूला गांव के हाईस्कूल के उच्चीकरण की मांग को लेकर ग्रामीण लंबे समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों की इस मांग की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उनका कहना था कि हाईस्कूल में अच्छे अंक लाने के बाद छात्र नजदीक में इंटर कॉलेज न होने के चलते 15 किमी दूर लोहाघाट जाने को मजबूर हैं। सबसे अधिक दिक्कतें छात्राओं को हो रही हैं।

अधिकतर छात्राएं हाईस्कूल के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं। जिसके चलते गौरा देवी कन्याधन योजना का उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना था कि सीएम हरीश रावत को उनके टनकपुर भ्रमण के दौरान ज्ञापन भी दिया गया था। ग्रामीणों का कहना था कि गांव की पेयजल योजना कई महीनों से ठप है, लोग गाड़, गधेरों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।


क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना था कि राजनैतिक दल एक दूसरे की निंदा करते हैं, लोगों की समस्याओं से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। केवल वोट के समय नेताओं का गांव की ओर रुख होता है। बैठक में पनी राम, रमेश राम, मदन राम, जगत राम आदि थे।

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