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उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटालाः सबूत तलाशने में जुटी एसआईटी, फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं

Tue, 17 Dec 2019 11:24 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंपावत/बनबसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंपावत/बनबसा Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Tue, 17 Dec 2019 11:24 AM IST
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Scholarship Scam uttarakhand: SIT investigation
चंपावत के एसपी धीरेंद्र गुंज्याल। - फोटो : CHAMPAWAT

बनबसा के देवभूमि विद्यापीठ में हुए 39.52 लाख रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की तफ्तीश विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सोमवार से शुरू कर दी है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इस मामले में जांच टीम सबूतों की तलाश में जुट गई है। टीम का कहना है कि छात्रों के साथ ही इस संस्थान के शिक्षकों से भी पूछताछ की जाएगी।

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सूत्र बताते हैं कि ज्यादातर पढ़ाने वाले टनकपुर और खटीमा के हैं। पचपकरिया गांव में किराए के भवन में चलने वाले इस विद्यापीठ के भवन स्वामी सुखदेव कुमार पुरी को नोटिस भेज पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। एसआईटी के सदस्य जांच अधिकारी टनकपुर के कोतवाल धीरेंद्र कुमार और बनबसा के थानाध्यक्ष जसवीर सिंह चौहान ने बताया कि साक्ष्यों की तलाश के लिए टीम काम कर रही है।

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बनबसा में देवभूमि विद्यापीठ नाम से फर्जी शिक्षण संस्था खोलकर अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) की छात्रवृत्ति में घोटाला उजागर हुआ। जांच में पाया गया कि इस फर्जी संस्था ने 2015-16 में 221 एससी और 140 एसटी छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति के नाम पर 39.52 लाख रुपये हड़प लिए।

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आरोपी देवभूमि विद्यापीठ के संचालक चैरब जैन, अनिल गोयल, विवेक शर्मा, गौरव जैन, तत्कालीन सहायक समाज कल्याण अधिकारी गोपाल सिंह राणा और बिचौलिये मुकेश कुमार और प्रदीप के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत 15 दिसंबर को बनबसा थाने में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

 

आरोपी सहायक समाज कल्याण अधिकारी वर्तमान में पाटी में तैनात है लेकिन सोमवार को न वह पाटी में थे और न ही उनका मोबाइल चालू था। 2011 की आबादी के मुताबिक जिले में एसटी की संख्या महज 1339 है और उसमें इंटर पास युवा बमुश्किल 97 हैं लेकिन अकेले देवभूमि विद्यापीठ से छात्रवृत्ति पाने वालों की तादाद 140 होना भी संदेह पैदा कर रही है।


कहीं बैंक से गायब तो नहीं हुए रिकार्ड


दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले के खुलासे ने कई सवालों को जन्म दिया है। एसआईटी की जांच टीम को पहले दिन बैंक संबंधी दस्तावेज नहीं मिल सके। बैंक अधिकारियों के मुताबिक उस वक्त के बैंक के रिकार्ड नहीं मिल रहे हैं। इन्हें खोजे जाने की बात कही गई है।


एसआईटी टीम के टनकपुर के कोतवाल धीरेंद्र कुमार और बनबसा के थानाध्यक्ष जसवीर सिंह चौहान सोमवार को बैंक ऑफ बड़ौदा (बॉब) की बनबसा शाखा पहुंचे। टीम ने बैंक से विद्यापीठ और छात्र-छात्राओं के खातों से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी ली लेकिन बैंक टीम को खास जानकारी मुहैया नहीं करा सकी।


बॉब की बनबसा शाखा के प्रबंधक अंकित राठौर ने बताया कि करीब एक हजार छात्र-छात्राओं के खाते खुले थे लेकिन उस दौर के रिकार्ड फिलहाल नहीं मिल रहे हैं। इनकी तलाश की जा रही है। ऐसे में इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं फर्जीवाड़ा करने वालों ने बैंक से ये रिकार्ड पहले ही तो गायब नहीं करवा दिए। रिकार्ड नहीं मिलने की सूरत में जांच पर भी असर पड़ सकता है।


समाज कल्याण के तत्कालीन अफसरों से होगी पूछताछ: एसपी


एसपी धीरेंद्र गुंज्याल का कहना है कि छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपियों को दबोचने के लिए एसआईटी के तहत कई टीमें बनाई जा रही हैं। घोटाले के दौरान समाज कल्याण विभाग के आला अफसरों की भूमिका का पता लगाने के जिले के तत्कालीन अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। यह भी पता लगाया जा रहा है कि देवभूमि विद्यापीठ ने प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह का कोई गड़बड़झाला तो नहीं किया है।

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