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काम पूरा होने का तय समय समाप्त लेकिन नहीं शुरू हुआ काम
चंद्रशेखर जोशी
Updated Mon, 02 Jan 2017 10:43 PM IST
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रोप वे
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के प्रमुख तीर्थ स्थल मां पूर्णागिरि धाम में ठूलीगाड़-मां पूर्णागिरि रोपवे प्रोजेक्ट का काम दिसंबर 2016 में पूरा हो जाना था। इस अवधि तक काम पूरा होना तो दूर, काम शुरू ही नहीं हो सका है। सीएम हरीश रावत ने 15 जून 2015 को इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था। चंद पेड़ों के कटने के अलावा आगे कुछ भी काम नहीं हो सका है। यहां तक कि काम शुरू करने के लिए अभी बिजली का थ्री-फेज कनेक्शन तक नहीं लिया जा सका है। यूपीसीएल के चंपावत डिवीजन के ईई राजेश कुमार का कहना है कि धन जमा नहीं कराने के चलते कनेक्शन नहीं दिया गया है।
रोपवे का काम केआर आनंद एंड केआरए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड में 35 करोड़ रुपए की लागत से बनाना था। चार ट्रालियों वाले इस रोपवे में एक घंटे में 800 यात्रियों की आवाजाही की क्षमता है। रोपवे एक दिन में अधिकतम 10 घंटे तक चलेगा। कंपनी के प्रतिनिधि आनंद शर्मा का कहना है कि रोपवे स्थल के शुरुआती बिंदु और आसपास आने वाले पेड़ों को पिछले साल कटाया जा चुका है। थ्री-फेस बिजली लाइन के लिए आवेदन किया गया है।
बरसात में रोपवे के प्रस्तावित स्थल में पानी भरा होने और मार्ग पर रास्ते में नदी का मलबा आने से काम में अवरोध आता रहा। देरी की वजह से अब यह काम 35 करोड़ के बजाय करीब 50 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। संशोधित इस्टीमेट के लिए सरकार से आग्रह किया गया है। कंपनी का कहना है कि इस माह के अंत तक बिजली कनेक्शन लेने के बाद काम शुरू हो जाएगा। वैसे रोपवे को दिसंबर 2016 तक पूरा होना था। सीएम ने पिछले साल जून में इसका शिलान्यास भी किया। पर आगे का काम लटका रहा है।
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10 मिनट में पूरा होगा 70 मिनट का सफर
रोपवे बनने से प्रमुख शक्तिपीठ मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन करने में सहजता होगी। 70 मिनट का पैदल सफर रोपवे से महज 10 मिनट में पूरा हो सकेगा। रोपवे से तीर्थयात्री मुख्य मंदिर से 200 मीटर पूर्व मां काली मंदिर तक पहुंच सकेंगे। फिलहाल यात्रियों को भैरव मंदिर तक जीप और यहां से मां पूर्णागिरि के मुख्य मंदिर तक के 3 किमी दूरी को पैदल पार करना होता है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही मां पूर्णागिरि धाम आने वाले यात्रियों को सहूलियत होगी। साथ ही तीर्थ यात्रियों की संख्या में भी इजाफा होगा। मां पूर्णागिरि धाम के पुजारी पंडित नेत्र बल्लभ तिवारी का कहना है कि रोपवे से न केवल देवी दर्शन आसान होंगे, बल्कि धाम की प्रसिद्धि को और विस्तार मिलेगा। जिला पर्यटन विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह ऐरी का कहना है कि रोपवे प्रोजेक्ट का काम शुरू करने के लिए कंपनी को पत्र भेजा गया है। थ्री-फेस लाइन के बिजली कनेक्शन के लिए रकम जमा करने के साथ अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने को कहा गया है। ताकि परियोजना का काम जल्द से जल्द शुरू हो सके।
रोपवे प्रोजेक्ट के मुख्य तथ्य
1.हनुमान मंदिर से काली मंदिर तक 903.225 मीटर लंबाई के रोपवे का 10840 वर्ग मीटर का कॉरिडोर एरिया है।
2.ठुलीगाड़ में प्रशासनिक भवन, पार्किंग, कमरे आदि बनेगा।
3.लोअर टर्मिनल में रोपवे स्टेशन भवन, यात्री होल्डिंग एरिया, टिकट काउंटर, प्रशासनिक कार्यालय और सेवा एरिया, सार्वजनिक सहूलियत होगी।
4.मुख्य मंदिर के पास अपर टर्मिनल बनेगा।
5.सुरक्षा के लिए खास उपाय प्रस्तावित। गुलमर्ग और त्वांग रोपवे में लगी विदेशी तकनीक लगेगी।
रोपवे का काम केआर आनंद एंड केआरए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड में 35 करोड़ रुपए की लागत से बनाना था। चार ट्रालियों वाले इस रोपवे में एक घंटे में 800 यात्रियों की आवाजाही की क्षमता है। रोपवे एक दिन में अधिकतम 10 घंटे तक चलेगा। कंपनी के प्रतिनिधि आनंद शर्मा का कहना है कि रोपवे स्थल के शुरुआती बिंदु और आसपास आने वाले पेड़ों को पिछले साल कटाया जा चुका है। थ्री-फेस बिजली लाइन के लिए आवेदन किया गया है।
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बरसात में रोपवे के प्रस्तावित स्थल में पानी भरा होने और मार्ग पर रास्ते में नदी का मलबा आने से काम में अवरोध आता रहा। देरी की वजह से अब यह काम 35 करोड़ के बजाय करीब 50 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। संशोधित इस्टीमेट के लिए सरकार से आग्रह किया गया है। कंपनी का कहना है कि इस माह के अंत तक बिजली कनेक्शन लेने के बाद काम शुरू हो जाएगा। वैसे रोपवे को दिसंबर 2016 तक पूरा होना था। सीएम ने पिछले साल जून में इसका शिलान्यास भी किया। पर आगे का काम लटका रहा है।
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10 मिनट में पूरा होगा 70 मिनट का सफर
रोपवे बनने से प्रमुख शक्तिपीठ मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन करने में सहजता होगी। 70 मिनट का पैदल सफर रोपवे से महज 10 मिनट में पूरा हो सकेगा। रोपवे से तीर्थयात्री मुख्य मंदिर से 200 मीटर पूर्व मां काली मंदिर तक पहुंच सकेंगे। फिलहाल यात्रियों को भैरव मंदिर तक जीप और यहां से मां पूर्णागिरि के मुख्य मंदिर तक के 3 किमी दूरी को पैदल पार करना होता है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही मां पूर्णागिरि धाम आने वाले यात्रियों को सहूलियत होगी। साथ ही तीर्थ यात्रियों की संख्या में भी इजाफा होगा। मां पूर्णागिरि धाम के पुजारी पंडित नेत्र बल्लभ तिवारी का कहना है कि रोपवे से न केवल देवी दर्शन आसान होंगे, बल्कि धाम की प्रसिद्धि को और विस्तार मिलेगा। जिला पर्यटन विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह ऐरी का कहना है कि रोपवे प्रोजेक्ट का काम शुरू करने के लिए कंपनी को पत्र भेजा गया है। थ्री-फेस लाइन के बिजली कनेक्शन के लिए रकम जमा करने के साथ अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने को कहा गया है। ताकि परियोजना का काम जल्द से जल्द शुरू हो सके।
रोपवे प्रोजेक्ट के मुख्य तथ्य
1.हनुमान मंदिर से काली मंदिर तक 903.225 मीटर लंबाई के रोपवे का 10840 वर्ग मीटर का कॉरिडोर एरिया है।
2.ठुलीगाड़ में प्रशासनिक भवन, पार्किंग, कमरे आदि बनेगा।
3.लोअर टर्मिनल में रोपवे स्टेशन भवन, यात्री होल्डिंग एरिया, टिकट काउंटर, प्रशासनिक कार्यालय और सेवा एरिया, सार्वजनिक सहूलियत होगी।
4.मुख्य मंदिर के पास अपर टर्मिनल बनेगा।
5.सुरक्षा के लिए खास उपाय प्रस्तावित। गुलमर्ग और त्वांग रोपवे में लगी विदेशी तकनीक लगेगी।