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बनबसा छात्रवृत्ति घोटाला: संचालकों को जमा कराने होंगे 39.52 लाख रुपये
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चंपावत। बनबसा के देवभूमि विद्यापीठ में हुए 39.52 लाख रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कोरोना के चलते सुस्त पड़ गई थी। अलबत्ता अब इस जांच में पुलिस फिर से जुट गई है। एसपी लोकेश्वर सिंह का कहना है कि पुलिस की तफ्तीश पूरी हो गई है और जल्द ही आरोप पत्र दाखिल कर दिए जाएंगे। हरिद्वार की अदालत ने आरोपी संचालकों को घोटाले की रकम जमा करने के आदेश दिए हैं। इस घोटाले में पिछले साल 15 दिसंबर को सहायक समाज कल्याण अधिकारी सहित सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
देवभूमि विद्यापीठ नाम की गैर मान्यता प्राप्त संस्था पर 2015-16 में 221 एससी और 140 एसटी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति के नाम पर 39.52 लाख रुपये के फर्जीवाड़े का आरोप है। पुलिस जांच में इस बात की तस्दीक हुई थी कि समाज कल्याण विभाग से मिली ये रकम विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं तक नहीं पहुंची। इसके बाद बनबसा थाने में देवभूमि विद्यापीठ के चार संचालक चैरब जैन, अनिल गोयल, विवेक शर्मा, गौरव जैन (हरिद्वार जिला निवासी), बिचौलिए मुकेश कुमार, प्रदीप (दोनों यूएस नगर जिला निवासी) और सहायक समाज कल्याण अधिकारी गोपाल सिंह राणा के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। टनकपुर के कोतवाल धीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल इस मामले की जांच कर रहा है। एसपी ने बताया कि हरिद्वार की अदालत ने आरोपी संचालकों को घोटाले की राशि जमा करने के आदेश दिए हैं। अलबत्ता आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोप पत्र पेश किया जाएगा।
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देवभूमि विद्यापीठ नाम की गैर मान्यता प्राप्त संस्था पर 2015-16 में 221 एससी और 140 एसटी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति के नाम पर 39.52 लाख रुपये के फर्जीवाड़े का आरोप है। पुलिस जांच में इस बात की तस्दीक हुई थी कि समाज कल्याण विभाग से मिली ये रकम विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं तक नहीं पहुंची। इसके बाद बनबसा थाने में देवभूमि विद्यापीठ के चार संचालक चैरब जैन, अनिल गोयल, विवेक शर्मा, गौरव जैन (हरिद्वार जिला निवासी), बिचौलिए मुकेश कुमार, प्रदीप (दोनों यूएस नगर जिला निवासी) और सहायक समाज कल्याण अधिकारी गोपाल सिंह राणा के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। टनकपुर के कोतवाल धीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल इस मामले की जांच कर रहा है। एसपी ने बताया कि हरिद्वार की अदालत ने आरोपी संचालकों को घोटाले की राशि जमा करने के आदेश दिए हैं। अलबत्ता आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोप पत्र पेश किया जाएगा।
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