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लोडियालसेरा क्षेत्र में 30-40 पेड़ों पर चल गई आरी
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Wed, 03 Jan 2018 10:46 PM IST
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पोथ ग्राम पंचायत के लोडयालसेरा गांव में अवैध रूप से कटे पेड़।
- फोटो : अमर उजाला
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इन दिनों तस्कर जंगलों पर धड़ल्ले से कुल्हाड़ी चला रहे हैं। अवैध कटान का एक मामला बूम वन क्षेत्र के अंतर्गत उजागर हुआ है। इस वन क्षेत्र के एक गांव के पास के जंगल में 30 से 40 पेड़ों की बलि दे दी गई, मगर विभाग को इसकी भनक तक नहीं है।
वन विभाग के चंपावत डिवीजन में जंगलों से अवैध पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है।
नेपाल सीमा से नजदीक की पोथ ग्राम पंचायत के लोडियालसेरा गांव से लगे जंगल में 30 से अधिक पेड़ काटे गए हैं। पेड़ों के काटे जाने की जानकारी कुछ ग्रामीणों के इस मार्ग से गुजरने से हुई। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि ये पेड़ बीते एक साल के भीतर काटे गए हैं। अलग-अलग प्रजाति के इन पेड़ों की कीमत कई लाख रुपये बताई गई है।
कोट
पेड़ काटे जाने की जानकारी नहीं है। इस वक्त उनकी रेंज के कुछ कर्मियों की ड्यूटी पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की गिनती में लगी है। इस कारण स्टाफ की कमी है। इसके बावजूद घटना स्थल पर विभागीय टीम को भेज मामले की जांच कराई जाएगी।-बीएस महरा, वन क्षेत्राधिकारी, बूम।
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स्याला-पोथ सड़क से आसान हुई तस्करी
चंपावत। स्यांला से पोथ तक बनी सड़क से यहां के काफी गांव सड़क से जुड़ गए हैं, लेकिन यही सड़क समुचित निगरानी तंत्र के अभाव में जंगलों के लिए खतरा भी बन रही है और इस मार्ग के माध्यम से पेड़ों की तस्करी आसान हुई है।
वन विभाग के चंपावत डिवीजन में जंगलों से अवैध पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है।
नेपाल सीमा से नजदीक की पोथ ग्राम पंचायत के लोडियालसेरा गांव से लगे जंगल में 30 से अधिक पेड़ काटे गए हैं। पेड़ों के काटे जाने की जानकारी कुछ ग्रामीणों के इस मार्ग से गुजरने से हुई। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि ये पेड़ बीते एक साल के भीतर काटे गए हैं। अलग-अलग प्रजाति के इन पेड़ों की कीमत कई लाख रुपये बताई गई है।
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कोट
पेड़ काटे जाने की जानकारी नहीं है। इस वक्त उनकी रेंज के कुछ कर्मियों की ड्यूटी पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की गिनती में लगी है। इस कारण स्टाफ की कमी है। इसके बावजूद घटना स्थल पर विभागीय टीम को भेज मामले की जांच कराई जाएगी।-बीएस महरा, वन क्षेत्राधिकारी, बूम।
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स्याला-पोथ सड़क से आसान हुई तस्करी
चंपावत। स्यांला से पोथ तक बनी सड़क से यहां के काफी गांव सड़क से जुड़ गए हैं, लेकिन यही सड़क समुचित निगरानी तंत्र के अभाव में जंगलों के लिए खतरा भी बन रही है और इस मार्ग के माध्यम से पेड़ों की तस्करी आसान हुई है।