{"_id":"575d93794f1c1b0e4211b8ac","slug":"save-the-schools-from-becoming-sumgdh","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुमगढ़ बनने से स्कूलों को बचाओ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुमगढ़ बनने से स्कूलों को बचाओ
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 12 Jun 2016 10:23 PM IST
विज्ञापन
द्यूरी प्राथमिक विद्यालय की टूटी दीवार दिखाते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर जिले के सुमगढ़ में पांच साल पहले की बरसात में एक स्कूल में आए मलबे ने कई छात्रों की जिंदगी निगल ली थी। हालांकि, चंपावत जिले में अब तक ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ है, मगर खतरे यहां भी कम नहीं है। जिले में 27 स्कूल जर्जर हाल में हैं।
मुख्य शिक्षाधिकारी नवीन चंद्र पाठक (सीईओ) ने बताया कि जिले में 25 प्राथमिक विद्यालय और दो जूनियर हाईस्कूल जीर्णशीर्ण श्रेणी में हैं। इसके अलावा 64 स्कूल नदी-नालों के नजदीक अथवा भूस्खलन की जद में हैं। चंपावत में दियूरी प्राथमिक विद्यालय का पुराना भवन बेहद खराब हाल में है। इसकी दीवारें कई जगह से टूटी है। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष दीपक नेगी का कहना है कि इसमें बैठना खतरे से खाली नहीं है, वहीं करीब एक दशक पूर्व बनी इमारत की हालत भी ठीक नहीं है। थोड़ी बारिश में छत से पानी टपकने लगता है। प्रबंध समिति ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है।
सुरक्षा को उठाएंगे सभी जरूरी कदम
सीईओ नवीन चंद्र पाठक का कहना है कि खतरे वाले अधिकांश स्कूलों के स्थान पर नए भवन अथवा मरम्मत के प्रस्ताव भेजे गए हैं। जिन स्कूलों के प्रस्ताव नहीं गए हैं, उन्हें निर्देशित किया जा रहा है। इसके अलावा इन सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बरसात होने पर जोखिम वाले कमरों के बजाय सुरक्षित कक्षों में बैठाने को कहा गया है। सुरक्षित कमरे नहीं होने पर बरसात वाले दिनों में स्कूलों को बंद करने पर भी विचार किया जाने की बात कही गई है।
विज्ञापन
टूटी छत से हो रही दो स्कूलों में पढ़ाई
लोहाघाट/पाटी। राजकीय प्राथमिक विद्यालय मनिहार गांव का भवन बेहद जर्जर हाल में है। भवन में दरार आने के साथ विद्यालय की छत में बिछाई गई लकड़ियां भी सड़ चुकी हैं। ऐसे में यह खतरनाक छत यहां पढ़ने वालों के लिए खतरा बनी है। यहां के लोगों का कहना है कि भवन की मरम्मत की मांग को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पाटी विकासखंड में 21 मई को आए अंधड़ के चलते जीआईसी दुबचौड़ा की छत की 60 से 70 टिन उड़ गई थी, लेकिन इसकी मरम्मत के भी फिलहाल कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। छत उड़ने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अलबत्ता दूसरे कमरों में बच्चों को बैठाया जा रहा है। प्रधानाचार्य माधवानंद जोशी का कहना है कि स्कूल में 150 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। छत को नए शिक्षा सत्र से पूर्व ठीक करा लिया जाएगा।
वहीं, आठ जून को आए अंधड़ से प्राथमिक विद्यालय थुवामौनी की छत की भी लगभग 30 टिन उड़ गई, जिसमें भी अभी कोई काम नहीं हुआ है। अलबत्ता गर्मियों के अवकाश के चलते विद्यालय बंद है। विद्यालय खुलने के बाद बच्चों के बैठने की समस्या पैदा हो सकती है। प्रधानाध्यापक चतुर सिंह मौनी का कहना है कि विद्यालय की छत उड़ने की जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी जा चुकी है। उनके निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
मुख्य शिक्षाधिकारी नवीन चंद्र पाठक (सीईओ) ने बताया कि जिले में 25 प्राथमिक विद्यालय और दो जूनियर हाईस्कूल जीर्णशीर्ण श्रेणी में हैं। इसके अलावा 64 स्कूल नदी-नालों के नजदीक अथवा भूस्खलन की जद में हैं। चंपावत में दियूरी प्राथमिक विद्यालय का पुराना भवन बेहद खराब हाल में है। इसकी दीवारें कई जगह से टूटी है। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष दीपक नेगी का कहना है कि इसमें बैठना खतरे से खाली नहीं है, वहीं करीब एक दशक पूर्व बनी इमारत की हालत भी ठीक नहीं है। थोड़ी बारिश में छत से पानी टपकने लगता है। प्रबंध समिति ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है।
विज्ञापन
सुरक्षा को उठाएंगे सभी जरूरी कदम
सीईओ नवीन चंद्र पाठक का कहना है कि खतरे वाले अधिकांश स्कूलों के स्थान पर नए भवन अथवा मरम्मत के प्रस्ताव भेजे गए हैं। जिन स्कूलों के प्रस्ताव नहीं गए हैं, उन्हें निर्देशित किया जा रहा है। इसके अलावा इन सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बरसात होने पर जोखिम वाले कमरों के बजाय सुरक्षित कक्षों में बैठाने को कहा गया है। सुरक्षित कमरे नहीं होने पर बरसात वाले दिनों में स्कूलों को बंद करने पर भी विचार किया जाने की बात कही गई है।
विज्ञापन
टूटी छत से हो रही दो स्कूलों में पढ़ाई
लोहाघाट/पाटी। राजकीय प्राथमिक विद्यालय मनिहार गांव का भवन बेहद जर्जर हाल में है। भवन में दरार आने के साथ विद्यालय की छत में बिछाई गई लकड़ियां भी सड़ चुकी हैं। ऐसे में यह खतरनाक छत यहां पढ़ने वालों के लिए खतरा बनी है। यहां के लोगों का कहना है कि भवन की मरम्मत की मांग को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पाटी विकासखंड में 21 मई को आए अंधड़ के चलते जीआईसी दुबचौड़ा की छत की 60 से 70 टिन उड़ गई थी, लेकिन इसकी मरम्मत के भी फिलहाल कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। छत उड़ने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अलबत्ता दूसरे कमरों में बच्चों को बैठाया जा रहा है। प्रधानाचार्य माधवानंद जोशी का कहना है कि स्कूल में 150 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। छत को नए शिक्षा सत्र से पूर्व ठीक करा लिया जाएगा।
वहीं, आठ जून को आए अंधड़ से प्राथमिक विद्यालय थुवामौनी की छत की भी लगभग 30 टिन उड़ गई, जिसमें भी अभी कोई काम नहीं हुआ है। अलबत्ता गर्मियों के अवकाश के चलते विद्यालय बंद है। विद्यालय खुलने के बाद बच्चों के बैठने की समस्या पैदा हो सकती है। प्रधानाध्यापक चतुर सिंह मौनी का कहना है कि विद्यालय की छत उड़ने की जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी जा चुकी है। उनके निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।