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आरसेटी भवन को मिली रकम, बीएडीपी से रिलीज हुए 90.10 लाख
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किराये में संचालित होने वाले इस भवन में दिया जाता है चंपावत में आरसेटी का प्रशिक्षण।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। बेरोजगारों के बढ़ते ग्राफ और कोरोना महामारी के खतरे के बीच रिवर्स पलायन की संभावना को साकार करने के लिए कौशल विकास जरूरी है और इसमें सबसे मददगार बना है भारतीय स्टेट बैंक का आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान)। आरसेटी का अपने भवन का सपना पूरा हो रहा है। बीएडीपी (सीमावर्ती क्षेत्र विकास निधि) से आरसेटी को 90.10 लाख रुपये अवमुक्त कर दिए गए हैं।
सीडीओ राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि चंपावत के पास जूप में 10 नाली जमीन पर 3.42 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आरसेटी के भवन के लिए बीएडीपी से 1.82 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसकी पहली किस्त दे दी गई है। इसी के साथ पौड़ी, बागेश्वर व अल्मोड़ा के बाद चंपावत प्रदेश में चौथा जिला होगा, जहां आरसेटी के पास अपना भवन होगा।
आरसेटी के निदेशक आरपी टम्टा ने बताया कि शेष 1.60 करोड़ रुपये में से एक करोड़ राष्ट्रीय ग्राम विकास संस्थान देगी, जबकि 60 लाख रुपये बैंक खुद खर्च करेगा। इस रकम से प्रशासनिक और प्रशिक्षण भवन के अलावा 48 बेड का बालक और 24 बेड का बालिकाओं का आवास बनेगा। अगले महीने तक भवन निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
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चंपावत। आरसेटी एसबीआई की स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण देने वाली संस्था है। ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता व कौशल विकास के लिए स्थापित आरसेटी को कौशल विकास से संबंधित तमाम गतिविधियों के संचालन के लिए नोडल एजेंसी है। लेकिन बुनियादी ढांचे और खुद का आवासीय भवन न होना कई बार प्रशिक्षण में दुश्वारी पैदा करता है। आरसेटी के निदेशक आरपी टम्टा ने बताया कि 6 दिन से 45 दिन तक के रोजगारपरक प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को हुनरमंद बनाने वाली यह संस्था 70 फीसदी प्रशिक्षित लोगों को स्वरोजगार देती है। अभी किराये के भवन में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अब तक प्रशिक्षित हो चुके 3165 नौजवान
चंपावत। आरसेटी कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग, सिलाई टेलरिंग के अलावा कृषि फार्मिंग, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, बकरी पालन, मौनपालन आदि का प्रशिक्षण दे रही है। 2011 से शुरू हुए चंपावत जिले के इस संस्थान में अब तक 119 प्रशिक्षण शिविर के जरिए 3165 युवाओं को प्रशिक्षण दे चुका है। इन प्रशिक्षित लोगों में से 2103 को स्वरोजगार दिया जा चुका है। इन स्वरोजगार कर रहे लोगों में से 1007 को विभिन्न बैंकों ने वित्तीय सहायता दी है।
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सीडीओ राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि चंपावत के पास जूप में 10 नाली जमीन पर 3.42 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आरसेटी के भवन के लिए बीएडीपी से 1.82 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसकी पहली किस्त दे दी गई है। इसी के साथ पौड़ी, बागेश्वर व अल्मोड़ा के बाद चंपावत प्रदेश में चौथा जिला होगा, जहां आरसेटी के पास अपना भवन होगा।
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आरसेटी के निदेशक आरपी टम्टा ने बताया कि शेष 1.60 करोड़ रुपये में से एक करोड़ राष्ट्रीय ग्राम विकास संस्थान देगी, जबकि 60 लाख रुपये बैंक खुद खर्च करेगा। इस रकम से प्रशासनिक और प्रशिक्षण भवन के अलावा 48 बेड का बालक और 24 बेड का बालिकाओं का आवास बनेगा। अगले महीने तक भवन निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
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चंपावत। आरसेटी एसबीआई की स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण देने वाली संस्था है। ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता व कौशल विकास के लिए स्थापित आरसेटी को कौशल विकास से संबंधित तमाम गतिविधियों के संचालन के लिए नोडल एजेंसी है। लेकिन बुनियादी ढांचे और खुद का आवासीय भवन न होना कई बार प्रशिक्षण में दुश्वारी पैदा करता है। आरसेटी के निदेशक आरपी टम्टा ने बताया कि 6 दिन से 45 दिन तक के रोजगारपरक प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को हुनरमंद बनाने वाली यह संस्था 70 फीसदी प्रशिक्षित लोगों को स्वरोजगार देती है। अभी किराये के भवन में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अब तक प्रशिक्षित हो चुके 3165 नौजवान
चंपावत। आरसेटी कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग, सिलाई टेलरिंग के अलावा कृषि फार्मिंग, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, बकरी पालन, मौनपालन आदि का प्रशिक्षण दे रही है। 2011 से शुरू हुए चंपावत जिले के इस संस्थान में अब तक 119 प्रशिक्षण शिविर के जरिए 3165 युवाओं को प्रशिक्षण दे चुका है। इन प्रशिक्षित लोगों में से 2103 को स्वरोजगार दिया जा चुका है। इन स्वरोजगार कर रहे लोगों में से 1007 को विभिन्न बैंकों ने वित्तीय सहायता दी है।