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Champawat News: सड़क का बारहमासी नाम, सिर्फ 12 घंटे कर रही काम
Wed, 05 Jul 2023 10:34 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Wed, 05 Jul 2023 10:34 PM IST
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चंपावत। नाम ऑलवेदर सड़क लेकिन काम ऑलवेदर नहीं। ग्रीष्म और शीतकाल में तो यह सड़क ऑल टाइम चल रही है लेकिन मानसून काल में इस सड़क पर ऑल टाइम के बजाय हाफ टाइम ही संचालन हो रहा है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक से निर्मित यह सड़क बरसात में जवाब दे जा रही है। चंपावत में पांच दिन में 85 मिमी से कम बारिश के बावजूद सड़क पर रात को आवाजाही पर लगी रोक से लोग सड़क के नाम और काम को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कारोबारियों से लेकर आवाजाही करने वाले सामान्य लोगों को भी दिक्कत हो रही है।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग का चौड़ीकरण चारधाम परियोजना का हिस्सा है। चल्थी पुल को छोड़कर यह सड़क पहले ही पूरी हो चुकी है। इस साल 18 मार्च से इस सड़क पर रात में संचालन शुरू किया गया था लेकिन साढ़े तीन माह से भी कम समय बाद ही सड़क पर रात के समय आवाजाही बंद कर दी गई है।
हर मौसम और हर पल के लिए बनाई गई इस सड़क पर मौसम के मद्देनजर डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने एक जुलाई से शाम छह से सुबह छह बजे तक वाहनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन की दलील है कि मलबा आने के अंदेशे के बीच सुरक्षा कारणों की वजह से यह रोक लगाई गई है। इधर रात की आवाजाही बंद होने से आम लोगों के साथ ही व्यापारियों को दुश्वारी हो रही है। संवाद
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बाक्स
एनच पर संवेदनशील हैं 60 स्थान
चंपावत। एनएच पर कई जगह पहाड़ियां अति संवेदनशील हैं। सूखीढांग, बेलखेत, अमोड़ी, स्वांला, धौन, भारतोली, दिल्लीबैंड, गुरना सहित कुल 60 स्थान पहाड़ी से मलबा गिरने की वजह से संवेदनशील हैं।
कोट
बारहमासी सड़क पर कई स्थान संवेदनशील हैं। सर्वे, भूगर्भीय सहित विभिन्न परीक्षण हो चुके हैं। बरसात निपटने के बाद अक्तूबर से इन संवेदनशील स्थानों को ठीक करने का काम कराया जाएगा। मौसम ठीक होने के बाद अस्थायी रूप से धौन के संवेदनशील हिस्से में सुधार किया जाएगा। - सुनील कुमार, ईई, एनएच खंड, लोनिवि।
इनसेट
बारहमासी सड़क के बंद होने से हो रहा नुकसान
1. कारोबारियों को लग रही आर्थिक चपत। 12 घंटे संचालन बंद होने से वाहन खड़े करने की बाध्यता।
2. सुबह जल्दी काम होने पर एक दिन पूर्व पहाड़ आने की मजबूरी से आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
3. रात में वाहनों पर प्रतिबंध से दिन के समय यातायात का अतिरिक्त दबाव।
कोट
मोटी रकम खर्च होने के बावजूद एनएच पर रात को वाहनों का संचालन नहीं होना सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है। इससे लोगों की दिक्कत बढ़ने के साथ ही आवाजाही में अधिक समय लगेगा। आमतौर पर पहाड़ रात में आवाजाही के लिए अधिक सुरक्षित हैं। - पंडित नेत्र बल्लभ तिवारी, पूर्णागिरि धाम।
कोट
यह बारहमासी सड़क 12 महीनों के बजाय 12 घंटे की सड़क बन कर रह गई है। जब सड़क संकरी थी तब भी इस पर वाहनों के संचालन, सड़क बंद होने और मरम्मत में इतनी दिक्कत नहीं होती थी जितनी अब हो रही है। - बहादुर सिंह फर्त्याल, पूर्व प्रमुख चंपावत।
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग का चौड़ीकरण चारधाम परियोजना का हिस्सा है। चल्थी पुल को छोड़कर यह सड़क पहले ही पूरी हो चुकी है। इस साल 18 मार्च से इस सड़क पर रात में संचालन शुरू किया गया था लेकिन साढ़े तीन माह से भी कम समय बाद ही सड़क पर रात के समय आवाजाही बंद कर दी गई है।
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हर मौसम और हर पल के लिए बनाई गई इस सड़क पर मौसम के मद्देनजर डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने एक जुलाई से शाम छह से सुबह छह बजे तक वाहनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन की दलील है कि मलबा आने के अंदेशे के बीच सुरक्षा कारणों की वजह से यह रोक लगाई गई है। इधर रात की आवाजाही बंद होने से आम लोगों के साथ ही व्यापारियों को दुश्वारी हो रही है। संवाद
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एनच पर संवेदनशील हैं 60 स्थान
चंपावत। एनएच पर कई जगह पहाड़ियां अति संवेदनशील हैं। सूखीढांग, बेलखेत, अमोड़ी, स्वांला, धौन, भारतोली, दिल्लीबैंड, गुरना सहित कुल 60 स्थान पहाड़ी से मलबा गिरने की वजह से संवेदनशील हैं।
कोट
बारहमासी सड़क पर कई स्थान संवेदनशील हैं। सर्वे, भूगर्भीय सहित विभिन्न परीक्षण हो चुके हैं। बरसात निपटने के बाद अक्तूबर से इन संवेदनशील स्थानों को ठीक करने का काम कराया जाएगा। मौसम ठीक होने के बाद अस्थायी रूप से धौन के संवेदनशील हिस्से में सुधार किया जाएगा। - सुनील कुमार, ईई, एनएच खंड, लोनिवि।
इनसेट
बारहमासी सड़क के बंद होने से हो रहा नुकसान
1. कारोबारियों को लग रही आर्थिक चपत। 12 घंटे संचालन बंद होने से वाहन खड़े करने की बाध्यता।
2. सुबह जल्दी काम होने पर एक दिन पूर्व पहाड़ आने की मजबूरी से आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
3. रात में वाहनों पर प्रतिबंध से दिन के समय यातायात का अतिरिक्त दबाव।
कोट
मोटी रकम खर्च होने के बावजूद एनएच पर रात को वाहनों का संचालन नहीं होना सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है। इससे लोगों की दिक्कत बढ़ने के साथ ही आवाजाही में अधिक समय लगेगा। आमतौर पर पहाड़ रात में आवाजाही के लिए अधिक सुरक्षित हैं। - पंडित नेत्र बल्लभ तिवारी, पूर्णागिरि धाम।
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यह बारहमासी सड़क 12 महीनों के बजाय 12 घंटे की सड़क बन कर रह गई है। जब सड़क संकरी थी तब भी इस पर वाहनों के संचालन, सड़क बंद होने और मरम्मत में इतनी दिक्कत नहीं होती थी जितनी अब हो रही है। - बहादुर सिंह फर्त्याल, पूर्व प्रमुख चंपावत।