फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Lockdown 4.0 in Uttarakhand : pregnant lady Reached his village amidst difficulties

Lockdown 4.0 in Uttarakhand : भूख प्यास से लड़कर पति संग गर्भवती पहुंची गांव

Fri, 22 May 2020 02:46 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो चंद्रशेखर जोशी, अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी, अमर उजाला, चंपावत Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Fri, 22 May 2020 02:46 PM IST
विज्ञापन
Lockdown 4.0 in Uttarakhand : pregnant lady Reached his village amidst difficulties
बाराकोट के एक क्वारंटीन सेंटर में मौजूद सुंदर राम, उनकी पत्नी व भाई। - फोटो : AMAR UJALA

पंजाब के डेराबसी में मामूली नौकरी करने वाले बाराकोट ब्लाक के पम्दा ग्राम पंचायत के सुंदर राम और उनकी गर्भवती पत्नी ममता देवी के लिए लॉकडाउन की अवधि किसी लॉकअप से कम नहीं रही।

विज्ञापन


जनता कर्फ्यू से दो दिन पहले 20 मार्च को सुंदर राम पत्नी ममता देवी सहित 122 किमी दूर संगरूर अपने रिश्तेदार के घर गया था और पूरे 56 दिन यानी 6 मई तक वहीं फंसा रहा। 07 मई को किसी तरह वह वापस डेराबसी पहुंच सका।
विज्ञापन


कहां तो उसे 25 मार्च को नवरात्र की पूजा में गांव आना था, मगर हालात ऐसे बने कि उसे घर पहुंचने के लिए भी घर से ही आठ हजार रुपये मंगवाने पड़े। सुंदर राम इस वक्त पत्नी और भाई हरीश कुमार के साथ अपनी ग्राम पंचायत के एक स्कूल में क्वारंटीन हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

बताते हैं कि संगरूर में रहने वाले रिश्तेदार के घर से उन्हें चौथे दिन 23 मार्च को लौटना था। फिर डेराबसी से 25 मार्च को पत्नी व भाई को लेकर गांव आना था। पर रिश्तेदारी में एक कमरे में 06 मई तक फंसे रहे। जेब में महज डेढ़ हजार रुपये थे। गर्भवती पत्नी की दवा से लेकर खान-पान के खर्चे थे।

भाई डेराबसी में फंसा था। संगरूर से किसी तरह पास बनवाकर 07 मई को 1200 रुपये में डेराबसी पहुंच पाए। खर्चो को पूरा करने के लिए गांव से आठ हजार रुपये मंगाए। जिस गेस्टहाउस में काम करते थे, वहां 20 मार्च से काम छूट गया।

मकान मालिक ने दो महीने का किराया नहीं ले इंसानियत दिखाई। चंडीगढ़ से रोडवेज बस के जरिए 16 मई को अपने गांव पहुंचा। मगर रास्ते के अनुभव भी बेहद खट्टे रहे। रास्ते में कहीं भी खाना तो दूर इक्कादुक्का खुली दुकानों ने भी उनसे खतरा मान पानी की बोतल तक देने से इंकार कर दिया।

रास्तेभर गर्भवती ममता देवी भूख से बेहाल रही। सुंदर बताते हैं कि एक जगह रास्ते में नल से बोतल में पानी भरा। अब अपने गांव में अपने लोगों के बीच पहुंच कर उन्हें सुकून का अहसास है। कहते हैं कि अब गांव नहीं छोड़ेंगे। पम्दा में क्वारंटीन का वक्त पूरा होने के बाद अपने गांव मचूघडग़ड़ी जाकर कुछ दिन आराम के बाद खेती, पशुपालन या दूसरे काम के साथ गुजारा कर लेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed