Lockdown 4.0 in Uttarakhand : भूख प्यास से लड़कर पति संग गर्भवती पहुंची गांव
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पंजाब के डेराबसी में मामूली नौकरी करने वाले बाराकोट ब्लाक के पम्दा ग्राम पंचायत के सुंदर राम और उनकी गर्भवती पत्नी ममता देवी के लिए लॉकडाउन की अवधि किसी लॉकअप से कम नहीं रही।
जनता कर्फ्यू से दो दिन पहले 20 मार्च को सुंदर राम पत्नी ममता देवी सहित 122 किमी दूर संगरूर अपने रिश्तेदार के घर गया था और पूरे 56 दिन यानी 6 मई तक वहीं फंसा रहा। 07 मई को किसी तरह वह वापस डेराबसी पहुंच सका।
कहां तो उसे 25 मार्च को नवरात्र की पूजा में गांव आना था, मगर हालात ऐसे बने कि उसे घर पहुंचने के लिए भी घर से ही आठ हजार रुपये मंगवाने पड़े। सुंदर राम इस वक्त पत्नी और भाई हरीश कुमार के साथ अपनी ग्राम पंचायत के एक स्कूल में क्वारंटीन हैं।
बताते हैं कि संगरूर में रहने वाले रिश्तेदार के घर से उन्हें चौथे दिन 23 मार्च को लौटना था। फिर डेराबसी से 25 मार्च को पत्नी व भाई को लेकर गांव आना था। पर रिश्तेदारी में एक कमरे में 06 मई तक फंसे रहे। जेब में महज डेढ़ हजार रुपये थे। गर्भवती पत्नी की दवा से लेकर खान-पान के खर्चे थे।
भाई डेराबसी में फंसा था। संगरूर से किसी तरह पास बनवाकर 07 मई को 1200 रुपये में डेराबसी पहुंच पाए। खर्चो को पूरा करने के लिए गांव से आठ हजार रुपये मंगाए। जिस गेस्टहाउस में काम करते थे, वहां 20 मार्च से काम छूट गया।
मकान मालिक ने दो महीने का किराया नहीं ले इंसानियत दिखाई। चंडीगढ़ से रोडवेज बस के जरिए 16 मई को अपने गांव पहुंचा। मगर रास्ते के अनुभव भी बेहद खट्टे रहे। रास्ते में कहीं भी खाना तो दूर इक्कादुक्का खुली दुकानों ने भी उनसे खतरा मान पानी की बोतल तक देने से इंकार कर दिया।
रास्तेभर गर्भवती ममता देवी भूख से बेहाल रही। सुंदर बताते हैं कि एक जगह रास्ते में नल से बोतल में पानी भरा। अब अपने गांव में अपने लोगों के बीच पहुंच कर उन्हें सुकून का अहसास है। कहते हैं कि अब गांव नहीं छोड़ेंगे। पम्दा में क्वारंटीन का वक्त पूरा होने के बाद अपने गांव मचूघडग़ड़ी जाकर कुछ दिन आराम के बाद खेती, पशुपालन या दूसरे काम के साथ गुजारा कर लेंगे।